सीसीटीवी निष्क्रिय, डेपुटेशन और अवकाश से चरमराई चिकित्सा व्यवस्था, मरीज निजी अस्पतालों की ओर मजबूर
सुरज वर्मा
स्मार्ट हलचल|फूलियाकलां में राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दावे कर रही है, लेकिन शाहपुरा विधानसभा क्षेत्र के अंतिम छोर पर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) फूलियाकलां की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। जिला कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को बार-बार स्थिति से अवगत कराने के बावजूद अस्पताल में चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। नतीजतन पूरा अस्पताल नर्सिंग स्टाफ के भरोसे संचालित हो रहा है और मरीजों को समुचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है।
रविवार को भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे, लेकिन अस्पताल में एक भी चिकित्सक मौजूद नहीं मिला। मजबूरी में नर्सिंग स्टाफ ने मानवीय संवेदनाओं के तहत ओपीडी में मरीजों का प्राथमिक उपचार किया। हालांकि चिकित्सक की अनुपस्थिति में इस प्रकार उपचार किया जाना नियमों के अनुरूप नहीं माना जाता और किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना भी चुनौती बन सकता है।
अवकाश और डेपुटेशन ने बढ़ाई मुश्किलें
अस्पताल सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सत्यनारायण शर्मा एक जून से मेडिकल अवकाश पर हैं, जबकि डॉ. नितेश झाजोरिया दो जुलाई से अवैतनिक अवकाश पर चल रहे हैं। वहीं डॉ. दुर्गेश खिंची, जिन्हें पीएचसी कोठियां से वापस सीएचसी फूलियाकलां लगाया गया था, वे भी अवकाश पर हैं। ऐसे में पूरे अस्पताल की जिम्मेदारी नर्सिंग स्टाफ के कंधों पर आ गई है।
केवल चिकित्सकों की ही नहीं, अन्य आवश्यक कर्मचारियों की कमी भी स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी पड़ रही है। फार्मासिस्ट हितेश सेन पिछले छह माह से केकड़ी में डेपुटेशन पर कार्यरत हैं, जबकि लैब टेक्नीशियन सालु खां पिछले पांच माह से बच्छखेड़ा पीएचसी में सेवाएं दे रहे हैं। इससे दवा वितरण, पैथोलॉजी जांच और अन्य जरूरी सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
गंभीर मरीज रेफर, सामान्य मरीज भी निजी अस्पतालों की ओर
चिकित्सकों और तकनीकी स्टाफ की कमी के कारण गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर करना अस्पताल की मजबूरी बन गई है। वहीं सामान्य मरीज भी पर्याप्त उपचार नहीं मिलने से निजी अस्पतालों का रुख करने को विवश हैं। इससे गरीब और ग्रामीण परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
बायोमेट्रिक और सीसीटीवी व्यवस्था भी ठप
अस्पताल में कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने वाली बायोमेट्रिक मशीन लंबे समय से बंद पड़ी है, जिससे वास्तविक उपस्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे भी लंबे समय से निष्क्रिय हैं, जिससे निगरानी व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है।
ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश
ग्रामीणों का आरोप है कि फूलियाकलां सीएचसी लंबे समय से विभागीय उपेक्षा का शिकार है। उनका कहना है कि अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान व्यवस्थाएं अस्थायी रूप से दुरुस्त दिखा दी जाती हैं, लेकिन निरीक्षण समाप्त होते ही हालात फिर पुराने जैसे हो जाते हैं।
ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि जब राज्य सरकार ने अनावश्यक डेपुटेशन पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं, तो फिर यहां के चिकित्सकों और कर्मचारियों को अन्य संस्थानों में किस आधार पर भेजा गया।
आश्वासन मिले, समाधान अब भी अधूरा
ग्रामीणों के अनुसार करीब एक सप्ताह पूर्व मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव शर्मा ने दो दिन में व्यवस्था सुधारने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। रविवार को भी शीघ्र व्यवस्था सुधारने की बात कही गई, लेकिन अस्पताल की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
सीएचसी फूलियाकलां में तत्काल चिकित्सकों की नियुक्ति की जाए।
डेपुटेशन पर भेजे गए कर्मचारियों को मूल पदस्थापन स्थल पर वापस लगाया जाए।
बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली और सीसीटीवी कैमरे तत्काल चालू किए जाएं।
अस्पताल में दवा, जांच और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाएं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि उपखंड क्षेत्र के सबसे बड़े सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की यह स्थिति है, तो दूरस्थ पीएचसी और उप स्वास्थ्य केंद्रों की हालत का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का अधिकार कब तक केवल कागजों में ही मिलता रहेगा।
