पुनित चपलोत
भीलवाड़ा। महात्मा गांधी (एमजी) अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर मंगलवार को गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब सरकारी सामान बाहर ले जाने के दो अलग-अलग मामले एक ही दिन में सामने आए। घटनाओं के बाद चिकित्सा महकमे और प्रशासन में हड़कंप मच गया।
पहले मामले में अस्पताल परिसर के पिछले हिस्से से एक लोडिंग टेंपो में पुरानी टेबल, पंखे और व्हीलचेयर सहित हजारों रुपये का सरकारी सामान बिना अनुमति लादा गया। मुख्य परिसर से बाहर निकलने से पहले ड्यूटी पर तैनात दो कर्मचारियों को संदेह हुआ। उन्होंने टेंपो रुकवाकर चालक से सामान ले जाने के दस्तावेज मांगे, लेकिन वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। इसके बाद पूरा सामान वापस अस्पताल के स्टोर में उतरवा दिया गया।
यह मामला शांत भी नहीं हुआ था कि कुछ ही घंटों बाद दूसरी घटना सामने आ गई। अस्पताल में कार्यरत एक वार्ड लेडी कबाड़ का सामान बिना अनुमति बाहर ले जाती दिखाई दी। ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड कर्मी ने उसे रोककर पूछताछ की तो वह सामान वहीं छोड़कर मौके से भाग गई।
एक ही दिन में सामने आई इन दोनों घटनाओं ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और सरकारी संपत्ति की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह भी आशंका जताई जा रही है कि बिना अंदरूनी सहयोग के इतनी बड़ी मात्रा में सामान परिसर से बाहर ले जाना संभव नहीं है।
नियमों के अनुसार सरकारी संपत्ति, चाहे उपयोग में हो या कबाड़, उसे सक्षम अधिकारी की लिखित अनुमति और निर्धारित प्रक्रिया के बिना परिसर से बाहर नहीं ले जाया जा सकता। अस्पताल प्रशासन पूरे मामले में पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच मुख्य साजिशकर्ताओं तक पहुंचेगी या मामला केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा।
