इंटमारिया की ‘ममता की डॉक्टर’ को भावभीनी विदाईरू तबादले पर फूट-फूटकर रोए बच्चे, भावुक हुए ग्रामीण, सेवा और समर्पण की मिसाल बनीं डॉ. मुक्ता प्रभा

शाहपुरा-मूलचन्द पेसवानी
सरकारी अस्पतालों में अक्सर चिकित्सकों की अनुपस्थिति, लापरवाही और मरीजों की परेशानियों की खबरें सुर्खियां बनती हैं, लेकिन शाहपुरा तहसील की ग्राम पंचायत इंटमारिया ने एक ऐसा दृश्य देखा जिसने यह साबित कर दिया कि यदि एक चिकित्सक सेवा को केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपना दायित्व मान ले तो वह लोगों के दिलों में ऐसी अमिट छाप छोड़ सकता है, जिसे वर्षों तक भुलाया नहीं जा सकता।
शाहपुरा तहसील स्थित आयुष केंद्र इंटमारिया की प्रभारी डॉ. मुक्ता प्रभा के जयपुर तबादले की खबर जैसे ही गांव में पहुंची, पूरे गांव में मायूसी छा गई। यह केवल एक चिकित्सक के स्थानांतरण की सूचना नहीं थी, बल्कि गांव के लोगों के लिए ऐसा क्षण था मानो उनके परिवार का कोई अपना उनसे बिछड़ रहा हो। सबसे अधिक भावुक दृश्य तब देखने को मिला जब स्कूल की नन्ही-नन्ही बालिकाएं अपनी प्रिय ‘डॉक्टर दीदी’ को विदा करते समय फूट-फूटकर रो पड़ीं। उनकी आंखों से बहते आंसू इस बात की गवाही दे रहे थे कि डॉ. मुक्ता प्रभा ने केवल इलाज नहीं किया, बल्कि लोगों के दिलों पर राज किया।
डॉ. मुक्ता प्रभा आयुर्वेद चिकित्सक जरूर थीं, लेकिन उनकी पहचान केवल एक डॉक्टर तक सीमित नहीं रही। उन्होंने गांव की बालिकाओं के लिए शिक्षिका, मार्गदर्शक और अभिभावक की भूमिका निभाई। अस्पताल में आने वाली बच्चियों को वह केवल दवा ही नहीं देती थीं, बल्कि उन्हें शिक्षा का महत्व समझाती थीं, स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करती थीं और योग का नियमित प्रशिक्षण देकर स्वस्थ जीवन की राह भी दिखाती थीं।
विशेष बात यह रही कि उन्होंने स्कूल समय के अतिरिक्त स्वयं पहल करते हुए बालिकाओं की पढ़ाई के लिए अलग से अध्ययन की व्यवस्था करवाई। गांव के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले, इसके लिए उन्होंने अपने स्तर पर ट्यूशन जैसी व्यवस्था कराई। यही कारण रहा कि गांव की बच्चियां उन्हें डॉक्टर कम और अपनी शिक्षिका तथा मां जैसा स्नेह देने वाली संरक्षक अधिक मानती थीं।
डॉ. मुक्ता प्रभा ने अपने कार्यकाल में केवल चिकित्सा सेवाओं तक स्वयं को सीमित नहीं रखा। उन्होंने पूरे क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण, नारी उत्थान, स्वावलंबन, शिक्षा, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन तथा स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर लगातार अभियान चलाए। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया, किशोरियों को स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया तथा योग के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि डॉ. मुक्ता प्रभा के अस्पताल में आने के बाद आयुष केंद्र केवल इलाज का स्थान नहीं रहा, बल्कि सामाजिक बदलाव का केंद्र बन गया। गांव की बेटियों में आत्मविश्वास बढ़ा, महिलाओं में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता आई और बच्चों में शिक्षा के प्रति नई ऊर्जा दिखाई देने लगी।
उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने कभी सरकारी सीमाओं का बहाना नहीं बनाया। गांव की समस्याओं को अपनी समस्या समझकर समाधान का प्रयास किया। मरीजों के प्रति उनका व्यवहार इतना आत्मीय था कि लोग बिना किसी झिझक के अपनी हर परेशानी उनसे साझा कर लेते थे। वे हर व्यक्ति को परिवार के सदस्य की तरह सम्मान देती थीं और यही अपनापन उन्हें लोगों के दिलों के बेहद करीब ले गया।
डॉ. मुक्ता प्रभा के विदाई समारोह का दृश्य हर किसी की आंखें नम कर देने वाला था। समारोह में गांव के बुजुर्ग, महिलाएं, युवा, बच्चे और मरीज बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी के चेहरों पर बिछड़ने का दर्द साफ दिखाई दे रहा था। कई ग्रामीणों की आंखों से आंसू छलक पड़े, जबकि मासूम बच्चियां अपनी प्रिय डॉक्टर को गले लगाकर बिलखती रहीं।
भावुक माहौल के बीच डॉ. मुक्ता प्रभा ने भी अपने संबोधन में कहा कि उनके लिए इंटमारिया केवल कार्यस्थल नहीं, बल्कि उनका अपना परिवार रहा है। यहां के लोगों का प्रेम और विश्वास जीवनभर उनकी सबसे बड़ी पूंजी रहेगा। उन्होंने कहा कि इस गांव से उनका रिश्ता कभी समाप्त नहीं होगा और जहां भी रहेंगी, इंटमारिया हमेशा उनके दिल में बसा रहेगा।
उन्होंने अपने संबोधन में एक प्रेरणादायक संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि किरदार का पर्दा गिरने के बाद भी सम्मान में तालियां बजती रहें, यही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। इसका अर्थ है कि हमें अपना हर दायित्व इतनी ईमानदारी, लगन और मेहनत से निभाना चाहिए कि जब विदा होने का समय आएकृचाहे वह जीवन का हो या कार्यक्षेत्र काकृतब लोग हमारी कमी महसूस करें और हमारे अच्छे कार्यों को याद करते हुए सम्मान दें।
उनके इन शब्दों ने उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया। ग्रामीणों ने भी माना कि डॉ. मुक्ता प्रभा ने जिस निष्ठा और सेवा भावना के साथ गांव में कार्य किया, वह आज के समय में दुर्लभ उदाहरण है। ग्रामवासियों ने बताया कि डॉ. मुक्ता प्रभा को हमेशा गांव के बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य की चिंता रहती थी। वे हर घर तक पहुंचकर लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देती थीं और बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती थीं। यही कारण है कि उनके स्थानांतरण की खबर सुनकर गांव का हर व्यक्ति खुद को असहाय महसूस कर रहा है।
ऐसे समय में, जब आए दिन सरकारी अस्पतालों से चिकित्सकों की अनुपस्थिति, लापरवाही और मरीजों की परेशानियों की खबरें सामने आती रहती हैं, वहीं ग्राम पंचायत इंटमारिया में डॉ. मुक्ता प्रभा ने सेवा, समर्पण और संवेदनशीलता की ऐसी मिसाल कायम की है, जिसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि चिकित्सक अपने दायित्व को मानव सेवा का माध्यम मान ले तो वह केवल मरीजों का इलाज ही नहीं करता, बल्कि समाज का भविष्य भी संवार सकता है।
विदाई समारोह में नर्स मोनिका डोगी, योग प्रशिक्षक कृष्ण कुमार गौड़, गथिया बानो सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे। इस अवसर पर डॉ. मुक्ता प्रभा ने अपने समस्त स्टाफ और ग्रामवासियों का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें जो सम्मान, स्नेह और अपनापन इंटमारिया में मिला है, वह उनके जीवन की अमूल्य धरोहर रहेगा।