मंगरोप@मुकेश खटीक।भीलवाड़ा जिले के मंगरोप कस्बे के राजकीय सीनियर स्कूल में एक अध्यापिका द्वारा छात्रों के बाल काटने का मामला सामने आया है।घटना को लेकर छात्रों में भय का माहौल है।आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने पूरे मामले को दबाने के लिए छात्रों को पैसे देकर बस स्टैंड स्थित सैलून पर भेजा और उनके बाल दोबारा सेट करवाए,ताकि घटना की भनक बाहर न लगे।जानकारी के अनुसार,स्कूल की 9वीं कक्षा में अध्ययनरत एक छात्र ने बताया कि उसके बाल सामान्य से कुछ बड़े थे।अध्यापिका ने बाल कटवाने को कहा तो उसने स्पष्ट रूप से बताया कि वह अगले दिन बाल कटवा लेगा।छात्र के अनुसार,उसी दिन क्षेत्र में बारिश होने के कारण वह सैलून नहीं जा सका।शुक्रवार को जब वह रोज की तरह स्कूल पहुंचा तो अध्यापिका ने उसे पकड़ लिया और कैंची से उसके सिर के बाल काट दिए।छात्र का आरोप है कि उसके अलावा तीन अन्य छात्रों के भी इसी तरह बाल काटे गए।
मामला दबाने के लिए सैलून भेजने का आरोप
पीड़ित छात्रों का कहना है कि घटना के बाद स्कूल प्रबंधन ने अपनी गलती छिपाने के लिए उन्हें कुछ पैसे दिए और बस स्टैंड स्थित एक सैलून पर भेजकर बाल ठीक करवाए।इससे यह आरोप और गंभीर हो गया है कि मामले को सार्वजनिक होने से रोकने का प्रयास किया गया।
फेल करने के डर से सहमे छात्र
घटना के बाद छात्र मानसिक रूप से डरे हुए हैं।उनका कहना है कि यदि उन्होंने इस संबंध में खुलकर शिकायत की तो उन्हें परीक्षा में फेल करने या अन्य तरीके से परेशान किए जाने का डर है।यही वजह है कि अधिकांश छात्र खुलकर सामने आने से बच रहे हैं।
परिजन भी साधे हुए हैं चुप्पी
बताया जा रहा है कि छात्रों के अभिभावक भी बच्चों के भविष्य को देखते हुए खुलकर कुछ बोलने से बच रहे हैं।हालांकि,घटना की चर्चा पूरे कस्बे में होने लगी है और लोग सवाल उठा रहे हैं कि अनुशासन के नाम पर किसी छात्र के बाल काटना क्या उचित है?
उठ रहे कई सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने स्कूलों में अनुशासन की सीमाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।यदि किसी छात्र के बाल निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं थे,तो क्या उसे समझाइश देकर अभिभावकों को सूचना देना उचित तरीका नहीं था?क्या किसी अध्यापक को छात्र के बाल स्वयं काटने का अधिकार है?और यदि ऐसा हुआ है,तो मामले को दबाने के लिए छात्रों को सैलून भेजने की जरूरत क्यों पड़ी?वही ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जब कोई शिकायत लेकर स्कूल में चला जाए तो स्टाफ उसे थाने में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और महिला स्टाफ से बदतमीजी का झूठा आरोप लगाने तक की धमकियां दी जाती है।
इस मामले में सहायक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने कहा कि स्कूलों में अनुशासन बनाए रखना आवश्यक है,लेकिन इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।यदि किसी छात्र के बाल स्कूल के नियमों के अनुरूप नहीं हैं या किसी प्रकार की उद्दंडता का मामला है, तो संबंधित छात्र के अभिभावकों को बुलाकर समझाइश दी जा सकती है और आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।उन्होंने कहा कि आवेश में आकर किसी भी छात्र की अस्मिता और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य करना उचित नहीं है।यदि इस मामले में शिकायत प्राप्त होती है या जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारी बोले
सहायक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने कहा कि अनुशासन बनाए रखने के लिए छात्रों के अभिभावकों को बुलाकर समझाइश देना और नियमों की जानकारी देना उचित प्रक्रिया है। किसी भी छात्र के साथ आवेश में आकर उसकी गरिमा और अस्मिता को ठेस पहुंचाने वाला व्यवहार करना उचित नहीं है। यदि मामला संज्ञान में आता है और जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
