​तीन बार गुहार के बाद भी PWD बेखबर: सड़कों पर फैलीं ‘मौत की झाड़ियां’, हादसे का इंतजार?

ग्रामीण सेवा व फॉलोअप शिविरों में 27 जून, 3 जुलाई और 27 जुलाई को दिए ज्ञापन बेअसर; पूर्व सरपंच बोले—कार्रवाई नहीं तो शिविरों का क्या औचित्य?

खजूरी (स्मार्ट हलचल/अलकेश पारीक)

क्षेत्र की ग्रामीण सड़कों पर सड़क तक बुरी तरह फैल चुके कांटेदार अंग्रेजी बबूल और झाड़ियां अब राहगीरों के लिए गंभीर ‘मौत का जाल’ बनते जा रहे हैं। कई स्थानों पर झाड़ियां इतनी घनी हो चुकी हैं कि अंधाधुंध मोड़ों पर सामने से आने वाला वाहन समय रहते दिखाई ही नहीं देता। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) की ओर से इन्हें हटाने की कोई कार्रवाई नहीं की जा रही, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश गहराता जा रहा है।

तीन तारीखें, तीन शिकायतें… फिर भी कार्रवाई शून्य

पूर्व सरपंच राकेश खटीक के अनुसार, इस गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों ने 27 जून, 3 जुलाई और 27 जुलाई को आयोजित ग्रामीण सेवा शिविरों एवं फॉलोअप शिविरों में लिखित शिकायतें और ज्ञापन सौंपकर अंग्रेजी बबूल व झाड़ियों को कटवाने की पुरजोर मांग की थी। इसके बावजूद अब तक धरातल पर कोई कार्रवाई नजर नहीं आई है।

🛑 इन प्रमुख मार्गों पर मंडरा रहा हादसों का खतरा:

  • खेरूना – मेवासा मार्ग
  • टिटोडा – अडीमल जी का खेड़ा मार्ग
  • शक्करगढ़ – बरोदा मार्ग
  • बाकरा – शक्करगढ़ मार्ग
  • बाकरा – हर्षलो की झुपड़िया मार्ग

संकरी होती सड़कें, सामने से वाहन आते ही बढ़ता है जोखिम

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के दोनों ओर उगे कांटेदार बबूल कई जगहों पर सड़क की मुख्य सीमा तक आ गए हैं। ऐसे में दो वाहन आमने-सामने आने पर चालकों को किनारे से सुरक्षित निकलने तक की जगह नहीं मिलती। मोड़ों पर दृश्यता शून्य होने से विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों के लिए हर पल दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

‘शिकायतों पर सुनवाई नहीं तो शिविरों का क्या औचित्य?’

पूर्व सरपंच राकेश खटीक ने प्रशासनिक प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आमजन की समस्याओं के निवारण के लिए लगाए जाने वाले सरकारी शिविरों में बार-बार शिकायतें देने पर भी जब कोई सुनवाई नहीं होती, तो ऐसे शिविरों का क्या औचित्य रह जाता है? उन्होंने जिला प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप कर संबंधित मार्गों से झाड़ियां हटवाने का आग्रह किया है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि पीडब्ल्यूडी विभाग को किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय समय रहते त्वरित कदम उठाने चाहिए। यदि झाड़ियों के कारण कोई गंभीर दुर्घटना होती है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की तय कराई जाएगी।