जिन बेटियों पर नाज था, उन्होंने वीडियो कॉल पर पिता का 5,100 रुपये भेजकर कराया अंतिम संस्कार

मुंबई के रहने वाले शिवचरण राम रतन गुप्ता. अपने समय के जाने-माने कपड़ा व्यापारी. खूब कमाया. एक परिवार था. पत्नी थी. तीन बेटियां थीं. दुनिया भर के पिताओं की तरह शिवचरण ने भी कई सारे सपने देखे. अपनी बेटियों को खूब पढ़ाया-लिखाया. अच्छी तालीम दिलाई. बेटियां भी सफल हुईं. अच्छे परिवार में शादी हुई और पिता के घर की दहलीज लांघकर अपने-अपने ससुराल चली गईं. शिवचरण को अपनी बेटियों की कामयाबी पर बहुत गर्व था. उनकी दो बेटियां टीचर बनीं. उनकी सबसे बड़ी बेटी अनीता नेपाल में रहती हैं, निशा उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में रहती हैं, जबकि सबसे छोटी बेटी प्रिया मुंबई में रहती हैं. तीनों की शादी हो चुकी है और उनके अपने परिवार हैं.

जीवन में सबकुछ ठीक चल रहा था. समय का पहिया अपनी गति से घूमा. पति-पत्नी बूढ़े हुए और सोनीपत (हरियाणा) के एक वृद्धाश्रम में आकर रहने लगे. मंगलवार, 4 जुलाई को शिवचरण ने अपनी आखिरी सांस ली. बेटियों को फोन करके इसकी जानकारी दी गई. लेकिन उन्होंने सोनीपत आने से इनकार कर दिया. बेटियों ने तकनीक का फायदा उठाया और वीडियो कॉल के जरिए अपने पिता के अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया.

‘कॉल आनी बंद हो गईं’

शिवचरण राम रतन गुप्ता सोनीपत में ‘समाज कल्याण शिक्षा समिति’ के ओल्ड-एज होम में लगभग डेढ़ साल से रह रहे थे. वे अपनी पत्नी मीना के साथ यहां आए थे, जिनका पहले ही निधन हो चुका था. ओल्ड-एज होम के एडमिनिस्ट्रेटर आनंद कुमार ने बताया कि मौत से करीब 20 दिन पहले बेटियों को उनके पिता की बिगड़ती सेहत के बारे में जानकारी दी गई थी, लेकिन वे उनसे मिलने नहीं आईं

5,100 रुपये भेजकर कराया अंतिम संस्कार

नेपाल में रहने वाली अनीता ने ऑनलाइन 5,100 रुपये भेजे और गुजारिश की कि उनके पिता का अंतिम संस्कार ठीक से किया जाए. अनीता टीचर हैं. दाह संस्कार के बाद बेटियों ने ओल्ड-एज होम मैनेजमेंट से अंतिम संस्कार के वीडियो भेजने को कहा. उनमें से एक को कॉल पर यह कहते हुए सुना गया,