पोटलां।स्मार्ट हलचल|क्षेत्र में अच्छी मानसूनी बारिश, खेतों में लहलहाती फसल की पैदावार तथा पूरे गांव की सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना के लिए पोटलां कस्बे में धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया। इस दौरान ग्रामीणों ने पूरी आस्था और पारंपरिक उल्लास के साथ तालाब की पाल पर स्थित चामुंडा माता मंदिर पर पहुंचकर इंद्रदेव और ग्राम देवता ‘खेड़ा देव’ की विशेष पूजा-अर्चना की।
भारतीय ग्रामीण संस्कृति में प्रकृति और लोक देवताओं के प्रति अटूट आस्था का दौर हमेशा से रहा है। पोटलां कस्बे में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान का मुख्य उद्देश्य प्रकृति के देवताओं को प्रसन्न करना था। ग्रामीणों का मानना है कि समय पर वर्षा होने और खेतों में अन्न की बंपर पैदावार होने से न केवल किसानों का जीवन खुशहाल होता है, बल्कि संपूर्ण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। इसी भावना के साथ कस्बे के मंदिरों देवरों के भोपा पुजारियों, प्रबुद्ध नागरिकों, युवाओं और बुजुर्गों ने मिलकर इंद्रदेव को रिझाने के लिए विशेष अनुष्ठान संपन्न किए। लोक परंपरा के अनुसार ‘खेड़ा देव’ को किसी भी गांव की भौगोलिक सीमा, उसकी भूमि और वहां निवास करने वाले समस्त जीव-जंतुओं और इंसानों के संरक्षक देवता के रूप में पूजा जाता है। गांव की रक्षा करने वाले खेड़ा देव की पूजा से महामारी, अमंगल और प्राकृतिक आपदाओं का भय दूर होता है। इस अनुष्ठान के माध्यम से समस्त समाज एक सूत्र में बंधकर अपने आराध्य देव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है और आने वाले सीजन के लिए आशीर्वाद मांगता है। इस दौरान देवस्थान पर विशेष साफ-सफाई कर पारंपरिक विधि-विधान से पूजा की गई। पंडितों और बुजुर्गों के मार्गदर्शन में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन और पूजन संपन्न हुआ। ग्रामीणों ने जल, कुमकुम, चावल, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित कर इंद्रदेव से प्रार्थना की कि वे अपनी कृपा बरसाएं और बादलों को समय पर क्षेत्र में सक्रिय करें, ताकि धरती की प्यास बुझ सके और सूखे की स्थिति उत्पन्न न हो। इस धार्मिक आयोजन में पोटलां कस्बे के सभी वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अनुष्ठान के पश्चात प्रसादी का वितरण किया गया, जिससे पूरे कस्बे में आपसी भाईचारे और धार्मिक उल्लास का वातावरण देखने को मिला। ग्रामीणों ने पूर्ण विश्वास जताया कि लोक देवताओं की कृपा से इस वर्ष क्षेत्र में झमाझम बारिश होगी और किसानों के चेहरे खिले-खिले नजर आएंगे।
