बूंदी-स्मार्ट हलचल|आज अतिक्रमण हटाओ अभियान के अंतर्गत छत्रपुरा रोड पर अतिक्रमण हटायें गऐ। जिसमें मुख्य छत्रपुरा रोड से जिन भूखण्ड स्वामियों ने नालो को कवर कर रेंप बना लिए थे उन्हें हटाया गया ओर चेतावनी दी कि पुनः नालों को कवर कर पानी निकासी अवरूद्ध नहीं करे।शहर से हटाये जा रहे स्थाई अस्थाई अतिक्रमणों, ठेले, गुमटियां हटने से शहर की सडके खुली खुली सी लगने लगी है। गोपाल सिंह प्लाजा एवं बहादुर सर्कल से नैनवां रोड,मीरागेट की तरफ रोड से हटाऐ गये अतिक्रमणों अस्थाई ठेले गुमटियां से पोस्ट आफिस भवन, जलदाय विभाग का भवन,सहकार भवन नजर आने लगे हैं। बस स्टैंड के सामने से हटाए अतिक्रमण से लगभग 30 वर्ष से नगर पालिका बूंदी द्वारा संचालित सुलभ कांप्लेक्स भी दिखाई देने लगा है ओर तो ओर स्टेट टाइम पर लगाया गया जिला मुख्यालय पर स्थित चिकित्सालय का बोर्ड भी नज़र आने लगा है। ओर शहर में लगने लगा कि नगरपरिषद है। साथ ही शहर के मुख्य मार्केट में अस्थाई रूप से लगे ठेले वालो में भी प्रशासन का भय देखने को मिला।एक दूसरा ठेले गुमठियों वाला एक दूसरे से जानकारी लेता नजर आया कि हमारे तरफ भी आयगा क्या अतिक्रमण हटाओ अभियान।
कोटा रोड पर करोड़ों,लाखों रुपए खर्च कर दुकानदार दुकान ओर शोरूम खोल कर भी परेशान है ओर एक ठेले वाला पांच हजार का सामान ले के ठेला इस प्रकार दुकान शोरूम के आगे लगाता है जैसे उसने रोड खरीद लिया हो, ओर फिर तिरपाल भी ऐसे लगायगा कि दुकान व शोरुम में जाने का रास्ता भी नहीं रहता। यानि कि लाखों करोड़ों लगाकर शोरूम व दुकान लगाने वाला पीछे ओर पांच हजार रुपए लगाकर ठेला लगाने वाला आगे आ जाता है। ओर ठेले वाला राजनितिक दृष्टि से इतना मजबूत रहता है कि शोरूम व दुकानदार उसे नहीं हटा पाता।
ये स्थिति कोटा रोड, सब्जी मंडी रोड पर अधिक देखने को मिलेगी। यह दोनों मार्केट बूंदी शहर के मुख्य मार्केट में गिने जाते हैं। इसलिए इन मार्केट में ठेले वालों की संख्या भी अधिक है, जिनसे अधिकांश दुकानदार परेशान हैं, यदि दुकानदार या शोरूम मालिक ठेले वाले को ठेला हटाने को कहता है तो ठेले वाला लडाई झगडे पर आमादा हो जाता है
