जल निकासी के दावों की खुली पोल, पानी में फंसे वाहन; हर बारिश में वही समस्या, जिम्मेदारों की तैयारियों पर सवाल
पुनित चपलोत
भीलवाड़ा। स्मार्ट हलचल|बुधवार को हुई तेज बारिश ने नगर निगम और प्रशासन की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। कुछ देर की बारिश में ही शहर की प्रमुख सड़कें जलमग्न हो गईं और कई अंडरपास तालाब में तब्दील हो गए। सड़कों पर भरे पानी के बीच दोपहिया वाहन, ऑटो और कारें बंद हो गईं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।शहर के कई इलाकों में हालात ऐसे रहे कि सड़क और नाले का अंतर ही नजर नहीं आया। अंडरपास में पानी भरने से यातायात बाधित हुआ और वाहन चालकों को रास्ता बदलकर जाना पड़ा। पानी में सड़क के गड्ढे दिखाई नहीं देने से हादसे का खतरा भी बढ़ गया।
ऑटो चालक अमजद मंसूरी ने बताया कि शाम करीब 4 बजे वह कावाखेड़ा से सवारी लेकर सुभाष नगर जा रहा था। अंडरपास में पानी इतना भर गया कि सवारी सहित ऑटो बीच रास्ते में बंद हो गया। उनका कहना था कि हर बारिश में यही हाल होता है, लेकिन नगर निगम और प्रशासन स्थायी समाधान के बजाय हर बार बारिश के बाद पानी निकालने में जुट जाता है।
मंसूरी ने आरोप लगाया कि जलभराव की समस्या को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होती। चंद्रशेखर पुलिया सहित शहर के कई पुलिया और अंडरपास में बारिश के दौरान जलभराव आम समस्या बन चुकी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि मानसून से पहले जल निकासी की तैयारियों और करोड़ों रुपये के विकास कार्यों के दावों के बावजूद पहली तेज बारिश में ही शहर की व्यवस्था क्यों चरमरा गई? यदि संवेदनशील स्थानों की पहले से पहचान थी तो वहां पानी निकासी के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
बारिश ने नगर निगम और प्रशासन के उन दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें मानसून से पहले नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने की बात कही गई थी। लोगों का कहना है कि हर साल बारिश में यही तस्वीर सामने आती है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जाता।
वहीं नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि जलभराव वाले स्थानों पर पंप लगाकर पानी की निकासी कराई जा रही है। लेकिन सवाल यह है कि जनता को हर बार जलभराव के बाद राहत देने की कवायद क्यों करनी पड़ती है, बारिश से पहले व्यवस्था क्यों नहीं सुधारी जाती? शहरवासियों ने निगम और प्रशासन से केवल तात्कालिक राहत नहीं, बल्कि जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है।
