सुनील बाजपेई
कानपुर। स्मार्ट हलचल|उत्तराखंड और यूपी के 5 जिलों को कूट रचित दस्तावेजों और धोखाधड़ी जैसे हथकंडों से करोड़ों की चपत लगाने में सफल हुई ब्लैक लिस्टेड गैर सरकारी संस्था एन जी ओ ने कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिली भगत से कानपुर देहात को भी अपना शिकार बना लिया। उसने यहां भी विकास कार्यों के नाम पर 6 करोड़ 32 लाख से ज्यादा की विधायक निधि को चपत लगा दी, जिसके फल स्वरुप बख्शी का तालाब लखनऊ, अंबेडकर नगर, बस्ती, मिर्जापुर के बाद ब्लैकलिस्टेड गैर-सरकारी संस्था भारतीय कोऑपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड के मास्टरमाइंड बताए जाने वाले महाप्रबंधक पवन कुमार पांडे तथा प्रबंध निदेशक विजय कुमार गोयल व टीम के अन्य लोगों के खिलाफ कानपुर देहात के रुरा थाने में भी विभिन्न संगीन धाराओं में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई है। साथ ही सेंट्रल रजिस्ट्रार को भी इस ब्लैक लिस्टेड एन जी ओ
भारतीय कोऑपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड के रजिस्ट्रेशन निरस्त करने हेतु पत्र भेजा गया है।
प्रभावी कार्यवाही की मांग को लेकर उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश शासन को भेजे गए शिकायत पत्र के मुताबिक संस्था उत्तर प्रदेश के कई जनपदों बस्ती, मिर्जापुर, कानपुर देहात, लखनऊ, अंबेडकर नगर आदि में पहले से ही ब्लैकलिस्टेड है। साथ ही बक्शी का तालाब (लखनऊ)’ स्थित क्षेत्रीय ग्रामीण विकास संस्थान की महानिदेशक आई ए एस श्रीमती वीरा उपाध्याय द्वारा संस्था के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए इसके विरुद्ध एफ आई आर भी दर्ज कराई जा चुकी है। सेंट्रल रजिस्ट्रार के स्पष्ट शासनादेश के बावजूद अपने नाम भारतीय कोऑपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड में गैर कानूनी तरीके से ‘भारतीय’ शब्द का भी प्रयोग करने वाली यह प्राइवेट संस्था संसदीय निधि व सोलर कार्य में भी घोटाले को लेकर चर्चा का विषय बनी हुई है। वह सोलर लाइट आदि कार्यों के लिए सेंट्रल रजिस्ट्रार से अधिकृत ही नहीं है। पहले से ही ब्लैक लिस्टेड इस संस्था द्वारा जनपद मिर्जापुर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की सांसद निधि में भी भारी घोटाला किया गया है, जिसके भी खिलाफ एफ आई आर पहले से ही दर्ज है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक भ्रष्ट अधिकारियों की मिली भगत से अब तक करोड़ों का घोटाले में सफल संस्था भारतीय कोऑपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड में कोई भी सरकारी अधिकारी ,लोक सेवक तैनात नहीं है।
पूर्व सदस्यों और भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक मास्टर माइंड बताये जाने वाले महाप्रबंधक पवन कुमार पांडे तथा प्रबंध निदेशक विजय कुमार गोयल की अगुवाई वाली इस भारतीय कोऑपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड के टेक्निकल स्टाफ व पदाधिकारियों की शैक्षणिक योग्यता और नियुक्तियां भी पूरी तरह फर्जी और बेहद संदिग्ध बताई जाती हैं।
जानकार सूत्रों का दावा यह भी है कि इस संस्था के उत्तराखंड स्थित बैंक खातों पर कभी भी रोक भी लग सकती है, क्योंकि इस संस्था पर यूपी शासन की लगभग ₹20 करोड़ की रिकवरी बकाया है, और अगर ऐसा कुछ होता है तो फिर इसका भारी असर उत्तराखंड राज्य के विकास कार्यों पर भी पड़ेगा। यहां तक कि कई कार्य ठप भी हो सकते हैं। उसने 2006 से 2025 तक की कोई भी अधिकृत रिपोर्ट सेंट्रल रजिस्ट्रार के पास जमा भी नहीं की गई है।
इस संदर्भ में यह भी बहुत उल्लेखनीय है कि भारतीय कोऑपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड को पर्वतीय/पहाड़ी क्षेत्रों में कार्य करने का कोई अनुभव नहीं है। आरोप है कि यह संस्था स्वयं ही फर्जी ठेकेदार बनाकर धनराशि का आहरण काफी अरसे से कर रही है। शिकायत कर्ताओं को यह भी आशंका है कि संस्था उत्तराखंड से लगभग ₹50 से ₹60 करोड़ का घोटाला कर फरार भी हो सकती है। उनका दावा है कि संस्था को उत्तराखंड में साठगांठ व अनुचित प्रभाव के आधार पर गलत तथ्य प्रस्तुत करके सूचीबद्ध कराया गया है। भविष्य में होने वाली गड़बड़ियों पर पर्दा डालने के इरादे से पूर्व में सिफारिश करने वाले व्यक्तियों को ही अब संस्था में पद दिए जाने की प्रबल आशंका भी सूत्रों ने जाहिर की है। कुल मिलाकर कई एफ आई आर ,दर्जनों प्रार्थना पत्रों के बाद भी अब तक करोड़ों का गबन कर चुकी इस ब्लैक लिस्ट गैर सरकारी संस्था के पदाधिकारियों के खिलाफ अब तक कोई भी प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने की वजह भ्रष्ट्र अधिकारियों की मिली भगत ही होने की चर्चा है।
