बहुचर्चित सजना हत्याकांड में महिला उत्पीड़न प्रकरण न्यायालय का अहम फैसला : दो आरोपी आजीवन कारावास और अर्थदंड से दंडित

पुनित चपलोत
भीलवाड़ा // स्मार्ट हलचल|महिला उत्पीड़न प्रकरण न्यायालय ने वर्ष 2022 के सजना हत्याकांड में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को हत्या का दोषी करार दिया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (महिला उत्पीड़न प्रकरण) ऋचा चौधरी ने आरोपी उगमलाल पुत्र नंदराम निवासी खेड़ा, थाना बनेड़ा तथा नारायण पुत्र रामकरण निवासी थाना बनेड़ा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों आरोपियों पर अलग-अलग धाराओं में अर्थदंड भी लगाया गया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

मामले के अनुसार 20 मई 2022 को जमनालाल ने बनेड़ा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी करीब 40 वर्षीय पुत्री सजना पत्नी शिवलाल की उसके ससुराल में हत्या कर दी गई। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची तो सजना का शव कमरे में चारपाई और अलमारी के पास पड़ा मिला। उसके गले पर धारदार हथियार से वार के निशान पाए गए। पुलिस ने मौके से खून से सना चाकू सहित अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए। मृतका के गले में पहना जाने वाला रामनामी मादलिया भी गायब मिला था।

पुलिस ने मामले की जांच के बाद आरोपी उगमलाल के खिलाफ धारा 302, 201, 397, 450 व 120-बी भादंसं तथा आरोपी नारायण के खिलाफ धारा 302 व 120-बी भादंसं सहित संबंधित धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया।

*16 गवाह और 52 दस्तावेज बने अहम*

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष अदिति सेठिया की ओर से 16 गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज करवाए गए, जबकि 52 दस्तावेज साक्ष्य के रूप में पेश किए गए। उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने दोनों आरोपियों को हत्या के मामले में दोषी माना।

न्यायालय ने आरोपी नारायण को धारा 302 में आजीवन कारावास व 10 हजार रुपए अर्थदंड तथा धारा 120-बी में आजीवन कारावास व 5 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं आरोपी उगमलाल को धारा 302 में आजीवन कारावास व 10 हजार रुपए अर्थदंड, धारा 120-बी में आजीवन कारावास व 5 हजार रुपए अर्थदंड के साथ धारा 450 में 5 वर्ष, धारा 397 में 3 वर्ष तथा धारा 201 में 3 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई। इन धाराओं में भी अलग-अलग अर्थदंड लगाया गया।

अर्थदंड जमा नहीं कराने पर दोनों आरोपियों को संबंधित धाराओं में अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी तथा पुलिस एवं न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि को नियमानुसार सजा की अवधि में समायोजित किया जाएगा।