ओम जैन
शंभूपुरा।स्मार्ट हलचल|सेन्थी स्थित शांतिभवन में साध्वी श्री प्रतिभा श्री जी आदि ठाणा 4 बिराजित है जिनके प्रतिदिन प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रावक श्राविकाएं पहुंच लाभान्वित हो रहे है।
चातुमासिक श्रृंखला मे सोमवार को जैन सिद्धान्ताचार्य श्री प्रतिभाजी म.सा ने अपने प्रवचन में फरमाया कि आत्मा अज्ञान व मोहवश पाप व पुण्य का बंध करती हुई नरकादि गतियों मे परिभ्रमण करती आ रही है। एकेन्द्रिय से पंचन्द्रीय तक समस्त जीव न्यूनाधिक पाप करते ही है। सांसारिक जीव को जाने अनजाने मे अठारह पाप करने पड़ते है जिससे प्रतिक्षण आत्मा के साथ कर्मबंध निरन्तर चालू रहता है।
भव परम्परा मे पुण्य पाप का खेल अनवरत रहता है। जब कषाय की मंदता होती है तब शुभ भावों की तीव्रता मे जीव पुण्य का बंध करता है। अनंत पुद्गल परावर्तन बीत गए कितने काल चक्र व्यतीत हो गए पाप प्रवाह निरन्तर गतिमान है। अंधेरे मे पाप अधिक होते है। दुष्ट प्रवृतियां अधिकार मे ही सक्रिय होती है।
प्रवक्ता रोशनलाल चोपड़ा ने बताया कि चातुर्मास में शांतिभवन में प्रतिदिन नवकार मंत्र का जाप चल रहा है इसी कड़ी मे 18 अगस्त को नवकार मंत्र जाप प्रकाश चन्द्र जितेंद्र मेहता का रहेगा। अधिकाधिक संख्या मे पधारकर कर्म निर्जरा करने का आव्हान किया।
संघ अध्यक्ष अनिल पोखरना ने बाहर से आये अतिथियों का अभिनन्दन कर आभार प्रकट किया।
