पुनित चपलोत
भीलवाड़ा।स्मार्ट हलचल|कहने को तो महात्मा गांधी जिला अस्पताल जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। यहां रोजाना हजारों मरीज इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन अस्पताल की व्यवस्थाओं की हकीकत कई बार इसके बिल्कुल विपरीत नजर आती है। रामधाम चौराहे पर हादसे में घायल एक मरीज को लेकर पहुंची 108 एंबुलेंस करीब 20 मिनट तक अस्पताल के गेट के बाहर खड़ी रही। एंबुलेंस का सायरन लगातार बजता रहा, लेकिन घायल को लेने के लिए अस्पताल से कोई वार्ड बॉय या वार्ड लेडी नहीं पहुंची।
108 एंबुलेंस के पायलट प्रभु प्रजापत ने बताया कि गुरवार को रामधाम चौराहे पर एक्सीडेंट की सूचना मिलते ही 108 मौके पर पहुंची। वहां घायल के साथ कोई अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं था। इसके बाद घायल को लेकर एंबुलेंस महात्मा गांधी जिला अस्पताल पहुंची। करीब 1 बजे मरीज को अस्पताल के गेट पर लेकर पहुंचे, लेकिन 1:20 बजे तक भी कोई मरीज की सुध लेने कोई नहीं आया।
प्रजापत ने बताया कि इस दौरान एंबुलेंस का सायरन लगातार बजता रहा। इसके बावजूद अस्पताल की ओर से मरीज को लेने के लिए कोई कर्मचारी नहीं आया। वार्ड बॉय और वार्ड लेडी से मरीज को अंदर ले जाने के लिए कहा गया तो उनके द्वारा बताया गया कि अस्पताल में इमरजेंसी मुख्य द्वार पर केवल दो ही स्ट्रेचर हैं और दोनों ही उपलब्ध नहीं हैं।
*20 मिनट तक बजता रहा सायरन, फिर भी नहीं खुली जिम्मेदारों की आंख*
प्रत्यक्षदर्शी मोहन सिंह ने बताया कि 108 एंबुलेंस अस्पताल के गेट के बाहर आकर खड़ी हुई थी और उसका सायरन लगातार बज रहा था। करीब 20 मिनट तक एंबुलेंस खड़ी रही, लेकिन मरीज को लेने के लिए अस्पताल से न कोई वार्ड बॉय आया और न ही वार्ड लेडी।
अन्य प्रत्यक्षदर्शी कैलाश बेरवा ने बताया कि एंबुलेंस का सायरन काफी देर से सुनाई दे रहा था। आवाज सुनकर हम लोग भी अस्पताल से बाहर आए। मरीज करीब 20 मिनट तक एंबुलेंस में तड़पता रहा, लेकिन उसे लेने के लिए अस्पताल से कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा।
*गंभीर मरीज होता तो कौन लेता जिम्मेदारी?*
यह घटना जिला अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। सड़क हादसे में घायल मरीज को अस्पताल पहुंचने के बाद भी यदि उसे समय पर अंदर ले जाने के लिए स्ट्रेचर और कर्मचारी नहीं मिलें तो गंभीर मरीजों की सुरक्षा का क्या होगा?
अगर घायल की हालत गंभीर होती और उसे तत्काल उपचार की जरूरत होती, तो 20 मिनट की यह देरी उसकी जान पर भारी पड़ सकती थी। सवाल यह भी है कि जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में आपातकालीन मरीजों के लिए पर्याप्त स्ट्रेचर और तत्काल सहायता की व्यवस्था क्यों नहीं है?
आमजन का कहना है कि अस्पताल में रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं। ऐसे में केवल डॉक्टर और दवाइयां ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि मरीज को एंबुलेंस से अस्पताल के अंदर पहुंचाने जैसी बुनियादी व्यवस्था भी मजबूत होनी चाहिए।
