क्रोध ही पाप की जड़ है, क्रोध घर मे जहर घोलता है: साध्वी श्री प्रतिभा श्री जी

ओम जैन

शंभूपुरा। स्मार्ट हलचल|उपनगरीय क्षेत्र सेन्थी स्थित शान्ति भवन मे चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान जैन सिहान्ताचार्य श्री प्रतिभा श्री जी मा.सा. ने अपने प्रवचन में फरमाया की क्रोध पाप की जड़ है। ईंट का जवाब पत्थर से नहीं प्यार से दिया जाना चाहिए। क्रोध साधुओ को भी आता है परन्तु वे विवेकशील होते है। श्रावक अपना विवेक खो बैठते है व उनका दिमाकी सन्तुलन बिगड़ जाता है। मन अशान्त हो जाता है। यदि क्रोध को कम करना है तो जो क्रोध कर रहा है उसी से एक रोटी ज्यादा खाना वैसे ही सामने वाले का गुस्सा शान्त हो जाएगा। गुस्सा आए तो मौन रखना, पूर्व मे क्रोध के वशीभूत महिलाएं कोप भवन का आश्रय लेती है आज महिलाएं बेड रूप का आश्रय लेती है।
क्रोध के वशीभूत यदि व्यक्ति खाना छोड़ता है तो वह काम नही करेगा। काम नही करेगा तो खाली दिमाक शैतान का घर वाली कहावत चरितार्थ होगी।
परमात्मा की वाणी कहती है कम से कम क्रोध करो। क्रोध घर मे जहर घोलता है। जिसने क्रोध पर विजय प्राप्त कर ली है वह व्यक्ति अवश्य ही सदगति प्राप्त करेगा।
इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय व आसपास के गांवों से श्रावक श्राविकाएँ प्रवचन सुनने पहुंचे जिनका श्रीसंघ सेन्थी ने अभिनन्दन किया।