‘सांसद का पीए हूं’ कहकर दबाव बनाने का आरोप, कलेक्टर-एसीबी तक पहुंची शिकायत
समग्र शिक्षा के संवेदकों ने एडीपीसी डॉ. कल्पना शर्मा पर लगाए गंभीर आरोप, भुगतान अटकाने और कथित दबाव बनाने की शिकायत
भीलवाड़ा (महेन्द्र नागौरी)
स्मार्ट हलचल|जिला मुख्यालय स्थित अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक (एडीपीसी), समग्र शिक्षा कार्यालय इन दिनों गंभीर आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। समग्र शिक्षा से जुड़े संवेदकों ने एडीपीसी डॉ. कल्पना शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार और कथित रूप से भुगतान में अड़चन डालने के गंभीर आरोप लगाते हुए जिला कलेक्टर भीलवाड़ा एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) भीलवाड़ा को शिकायत दिए जाने का दावा किया है।
शिकायत में लगाए गए आरोपों ने शिक्षा विभाग के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी हलचल पैदा कर दी है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि कथित तौर पर सांसद के निजी सहायक से पारिवारिक संबंध का हवाला देकर संवेदकों पर दबाव बनाया जाता है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना बाकी है।
‘मेरे सिस्टम में चलना होगा, वरना बिल पास नहीं होगा’—शिकायत में आरोप
संवेदकों ने शिकायत में आरोप लगाया है कि एडीपीसी द्वारा कथित रूप से कहा जाता है कि “समसा में कार्य करना है तो मेरे सिस्टम के अनुसार चलना होगा, अन्यथा बिल पास नहीं करूंगी।” शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उन्हें कथित तौर पर यह भी कहा जाता है कि उनका कुछ नहीं बिगाड़ा जा सकता, क्योंकि उनके पति सांसद के निजी सहायक हैं।
यदि शिकायत में लगाए गए ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल भुगतान प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रशासनिक पद के कथित दुरुपयोग और राजनीतिक प्रभाव के इस्तेमाल के गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
भुगतान प्रक्रिया पर भी सवाल:-
संवेदकों का कहना है कि उनके बिल संबंधित कनिष्ठ अभियंता एवं सहायक अभियंता के प्रमाणीकरण के बाद आगे बढ़ते हैं तथा कनिष्ठ लेखाकार और सहायक लेखाधिकारी द्वारा आवश्यक जांच के पश्चात भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके बावजूद कथित तौर पर नए-नए प्रमाण पत्र मांगे जाने और आपत्तियां लगाने से भुगतान में देरी हो रही है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इससे ठेकेदारों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगामी दिनों में काम बंद करने का निर्णय ले सकते हैं।
पांच साल से पहले जर्जर भवन का भी उठाया मुद्दा
शिकायत में एडीपीसी की पूर्व पदस्थापना से जुड़ा एक और गंभीर आरोप उठाया गया है। संवेदकों ने दावा किया है कि जब डॉ. कल्पना शर्मा राजकीय स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल, बनेड़ा में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत थीं, उस दौरान निर्मित विद्यालय भवन की गुणवत्ता पर सवाल हैं और भवन पांच वर्ष पूरे होने से पहले ही जर्जर स्थिति में पहुंच गया।
संवेदकों ने इस मामले की भी तकनीकी एवं प्रशासनिक जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, भवन निर्माण की गुणवत्ता और इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
20 से अधिक फर्मों के नाम शिकायत से जुड़े:-
शिकायत में केजीएन कंस्ट्रक्शन, रुचि कंस्ट्रक्शन, श्री देव मटेरियल, चारभुजा कंस्ट्रक्शन, बालाजी कंस्ट्रक्शन, जगदंबा कंस्ट्रक्शन, जोगणिया कंस्ट्रक्शन, चौहान कंस्ट्रक्शन, आदित्या कंस्ट्रक्शन, शिव शक्ति एंटरप्राइजेज, तेजा ग्रुप ऑफ कंस्ट्रक्शन, मेसर्स बनवारी लाल, विश्वकर्मा इंजीनियरिंग, आंचल एंटरप्राइजेज, महालक्ष्मी सप्लायर, श्री श्याम इंटरप्राइजेज, अभी एंटरप्राइजेज, रामदेव कंस्ट्रक्शन, भेरुनाथ कंस्ट्रक्शन और सांवरिया कंस्ट्रक्शन सहित कई फर्मों के नाम बताए गए हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल शिकायत, जांच के बाद ही खुलेगा सच:-
उक्त शिकायत की प्रतियां सोशल मीडिया पर भी वायरल होने की बात सामने आई है। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल शिकायत की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि शिकायत में भ्रष्टाचार के साथ सांसद के नाम और उनके निजी सहायक का कथित तौर पर प्रभाव इस्तेमाल किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। यदि शिकायत की निष्पक्ष जांच होती है तो आरोपों की सच्चाई सामने आने के साथ यह भी स्पष्ट हो सकता है कि भुगतान प्रक्रिया में वास्तव में अनियमितता हुई या नहीं।
अब निगाहें जिला प्रशासन और एसीबी की कार्रवाई पर हैं—क्या शिकायत जांच की चौखट तक पहुंचेगी या आरोप फाइलों में ही दबकर रह जाएंगे?
