साख के संकट में पत्रकारिता का सहारा कौन?

जयपुर में IFWJ ने उठाई जमीनी पत्रकारों की बुलंद आवाज

दबाव, उपेक्षा और समझौतों के दौर में पत्रकारिता की साख बचाने पर मंथन — राजस्थान में श्रमजीवी पत्रकारों का अपना स्वतंत्र डिजिटल चैनल शुरू करने का निर्णय

जयपुर 26अगस्त।स्मार्ट हलचल|पत्रकारिता आज संक्रमण और संत्रास के ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां कब, कहां और किस पत्रकार को निरंकुश सत्ता अथवा प्रभावशाली तंत्र का शिकार होना पड़े, यह कहना मुश्किल है। इससे भी बड़ी विडंबना यह है कि मुश्किल वक्त में पत्रकार ही पत्रकार के साथ खड़ा दिखाई नहीं दे रहा। ऐसे दौर में पत्रकारिता की साख, पत्रकारों की सुरक्षा और जमीनी पत्रकारों के अधिकारों को लेकर इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) राजस्थान के प्रांतीय सम्मेलन में गंभीर मंथन हुआ।

सी-स्कीम जयपुर स्थित एसबीआई भवन के ऑडिटोरियम में मंगलवार को आयोजित सम्मेलन में प्रदेशभर से आए पत्रकार प्रतिनिधियों ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, कॉरपोरेट नियंत्रण, सत्ता के दबाव और जिला-तहसील स्तर पर काम करने वाले संवाददाताओं की उपेक्षा पर चिंता व्यक्त की। सम्मेलन में तय किया गया कि राजस्थान में श्रमजीवी पत्रकारों का अपना स्वतंत्र डिजिटल चैनल शुरू किया जाएगा, ताकि जमीनी पत्रकारों को ऐसा मंच मिल सके, जहां जनसरोकार के मुद्दों को बिना किसी दबाव के प्रमुखता से उठाया जा सके।

पत्रकारिता का दौर संक्रमण और संत्रास का दौर : राठौड़

सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए IFWJ राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष उपेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि पत्रकारिता का वर्तमान दौर पत्रकारों के लिए संक्रमण और संत्रास का दौर है। उन्होंने कहा कि सत्ता और व्यवस्था के दबाव के बीच कब, कहां और किस पत्रकार को निशाना बनाया जाए, यह कहना मुश्किल है। इससे भी गंभीर स्थिति यह है कि पत्रकार अपने साथी पत्रकार के साथ खड़ा होने से भी पीछे हट रहा है।

उन्होंने पत्रकारों के अधिकार, सुरक्षा और जमीनी हकीकत को बिना लाग-लपेट जनता तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की असली ताकत उसकी स्वतंत्रता और विश्वसनीयता है। इसी उद्देश्य से राजस्थान में IFWJ का स्वतंत्र डिजिटल चैनल शुरू करने का निर्णय लिया गया है।

आंदोलन की शुरुआत करनी होगी : आचार्य संजय तिवारी

सम्मेलन के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार आचार्य संजय तिवारी ने संगठन के ऐतिहासिक संघर्षों का उल्लेख करते हुए चेलापति राव और के. विक्रम राव के दौर को याद किया। उन्होंने कहा कि चुनौतियां पहले भी थीं और आज भी हैं, लेकिन फर्क इतना है कि आज पत्रकारिता का बड़ा हिस्सा मालिकों के मुनाफे और सत्ता के दबाव के बीच उलझता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि किसी विषय को लेकर पत्रकार आंदोलन की शुरुआत करेंगे, तभी वह आंदोलन का रूप लेगा। शुरुआत ही नहीं होगी तो बात केवल चर्चाओं तक सीमित रह जाएगी। समाजवादी नेता मुलायम सिंह का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि संगठन को अपने अस्तित्व और प्रभाव को बनाए रखने के लिए “चर्चा, खर्चा और पर्चा”—तीनों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि जब तक जिला और तहसील स्तर का पत्रकार संगठित होकर अपनी आवाज खुद नहीं उठाएगा, तब तक जमीनी सच्चाई मजबूती से सामने नहीं आ सकेगी।

जिला इकाइयों को मजबूत करने पर जोर : राजेश शर्मा

सम्मेलन को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं IFWJ सवाई माधोपुर जिला अध्यक्ष राजेश शर्मा ने संगठन की जिला इकाइयों को और अधिक मजबूत एवं सक्रिय बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने प्रदेश नेतृत्व से आग्रह किया कि प्रदेश पदाधिकारी समय-समय पर जिलों का दौरा कर स्थानीय पत्रकारों और जिला इकाइयों से सीधा संवाद स्थापित करें, ताकि संगठन की गतिविधियां केवल प्रदेश स्तर तक सीमित न रहकर गांव, कस्बे और तहसील स्तर तक प्रभावी रूप से पहुंच सकें।

शर्मा ने संगठन के सभी साथियों से एकजुट होकर कार्य करने की अपील करते हुए कहा कि संगठन को अपना परिवार मानकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार व्यक्ति अपने परिवार की मजबूती और सम्मान के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करता है, उसी भावना के साथ संगठन की मजबूती के लिए भी सभी पत्रकार साथियों को मिलकर योगदान देना होगा। उन्होंने कहा कि आपसी सहयोग, विश्वास और एकजुटता ही संगठन की सबसे बड़ी ताकत है।

चार दशक की पत्रकारिता का अनुभव साझा किया

कोटा के वरिष्ठ पत्रकार पुरुषोत्तम पचौली ने चार दशकों की पत्रकारिता के अनुभव साझा करते हुए कहा कि रसातल में जा रही पत्रकारिता की साख को बचाना आज हर पत्रकार की पहली जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि कलम के सिपाहियों ने समझौतावादी रवैया नहीं छोड़ा तो आने वाला समाज पत्रकारिता को कभी माफ नहीं करेगा।

प्रदेश उपाध्यक्ष पशुपति शर्मा ने कहा कि पत्रकार छोटा या बड़ा नहीं होता। उसकी रीढ़, निष्पक्षता और जवाबदेही ही उसकी वास्तविक पहचान है। उन्होंने कहा कि सहमति और समझौते की पत्रकारिता आम जनता की वास्तविक पीड़ा से कटती जा रही है। ऐसे में पत्रकारों को अपनी साख दोबारा हासिल करने के लिए जमीनी मुद्दों और सच की कसौटी पर लौटना होगा।

डिजिटल मंच को लेकर सकारात्मक पहल

बीकानेर के वरिष्ठ पत्रकार एवं लायन एक्सप्रेस से जुड़े बृजमोहन रामावत ने अपनी डिजिटल यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कहा कि यदि व्यक्ति कुछ करने की ठान ले तो रास्ते अपने आप आसान होते चले जाते हैं। उन्होंने IFWJ राजस्थान के प्रस्तावित डिजिटल चैनल को हरसंभव मार्गदर्शन और सहयोग देने का आश्वासन दिया।

बैठक का मुख्य केंद्र राजस्थान में पत्रकारों के लिए एक स्वायत्त डिजिटल मंच तैयार करना रहा। वक्ताओं ने कहा कि मुख्यधारा का मीडिया ग्रामीण और जमीनी सरोकारों से जुड़े अनेक मुद्दों को पर्याप्त जगह नहीं दे पा रहा है। ऐसे में डिजिटल मंच जमीनी पत्रकारों और आम जनता के बीच प्रभावी सेतु बन सकता है।

प्रदेशभर के पत्रकारों ने रखी अपनी बात

सम्मेलन में संगठन के वरिष्ठ सदस्य शंकर नागर, विष्णु दत्त शर्मा, कोटा संभाग प्रभारी शुभम जैन, जयपुर संभाग प्रभारी शालिनी श्रीवास्तव, सच बेधड़क चैनल के बीकानेर संभाग प्रभारी रवि विश्नोई, बीकानेर आज तक ब्यूरो कुलदीप चारण, कोटा अध्यक्ष शैलेश पांडेय, सवाई माधोपुर अध्यक्ष राजेश शर्मा, टोंक अध्यक्ष प्रेम रघुवंशी, बारां अध्यक्ष लक्ष्मीचंद नागर, हनुमानगढ़ अध्यक्ष जुगल किशोर स्वामी, उदयपुर अध्यक्ष परमवीर सिंह दुलावत, राजसमंद अध्यक्ष सुरेशचंद्र भाट, बालोतरा अध्यक्ष करनाराम मांजू, करौली अध्यक्ष डीडी सारस्वत, बाड़मेर अध्यक्ष महेन्द्र सिंह मुनाबाव, सीकर अध्यक्ष संदीप हुड्डा, झुंझुनूं अध्यक्ष विकास पुनिया, प्रदेश समिति सदस्य कुलदीप गुप्ता, निर्मला राव, अमृता मौर्य, नारायण मेघवाल , राजेश गोयल सहित अन्य प्रतिनिधियों ने विचार व्यक्त किए और अपने-अपने क्षेत्रों की जमीनी समस्याओं को साझा किया।

प्रदेश कार्यालय प्रभारी गणेश प्रजापति ने जिला इकाइयों के बीच सामंजस्य, सहयोग और सहकार के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने का विश्वास दिलाया। बैठक में बड़ी संख्या में अन्य पदाधिकारियों ने भी अपनी उपस्थिति और सहमति दर्ज कराई।

श्रमजीवी पत्रकारों द्वारा संचालित होगा डिजिटल चैनल

सम्मेलन में तय किया गया कि प्रस्तावित डिजिटल चैनल पूरी तरह श्रमजीवी पत्रकारों द्वारा संचालित होगा। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं, सामाजिक कुरीतियों, जनता के मूलभूत संकट, प्रशासनिक खामियों और हाशिए पर खड़े वर्गों की आवाज को प्रमुखता दी जाएगी।

इसके साथ ही जिला स्तर पर सक्रिय पत्रकारों के परिचय-पत्र, सुरक्षा और आर्थिक स्थायित्व को लेकर भी संगठनात्मक रूपरेखा तैयार करने पर सहमति बनी। सम्मेलन में आगामी 28 अक्टूबर को संगठन के स्थापना दिवस पर व्यापक प्रतिनिधित्व के साथ बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय भी लिया गया।

द्वितीय सत्र के बाद धन्यवाद प्रस्ताव के साथ सम्मेलन संपन्न हुआ। सम्मेलन से निकला सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि पत्रकारिता की साख किसी संस्थान, मालिक या सत्ता से नहीं, बल्कि पत्रकार की निर्भीक कलम और जनता के प्रति उसकी जवाबदेही से बनती है।