रमेश चंद डाड
आकोला |स्मार्ट हलचल|बरूंदनी 1962 के भारत-चीन युद्ध में देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए जगनाथ मीणा की प्रतिमा 63 साल के लंबे इंतजार के बाद 23 नवंबर 2025 को स्थापित की गई। प्रतिमा स्थापित होने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि शहीद की स्मृति को सम्मान के साथ संजोया जाएगा, लेकिन वर्तमान में उचित रखरखाव के अभाव में प्रतिमा उपेक्षा का शिकार हो रही है।
प्रतिमा के ऊपर छांव नहीं होने से खुले आसमान के नीचे धूप, बारिश और धूल-मिट्टी का सीधा असर पड़ रहा है। लंबे समय तक मौसम की मार झेलने से प्रतिमा के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय युवा शैतान सिंह मीणा का कहना है कि शहीद की प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए देशभक्ति और बलिदान की प्रेरणा है।
गणमान्य नागरिकों ने उठाई छांव व सुरक्षा की मांग
गांव के गणमान्य नागरिकों ने प्रशासन से शहीद स्मारक की नियमित देखरेख कराने, प्रतिमा के ऊपर स्थायी छांव बनाने तथा आसपास साफ-सफाई और सुरक्षा की उचित व्यवस्था करने की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि 63 साल बाद शहीद की प्रतिमा स्थापित हुई है, ऐसे में इसकी उपेक्षा किसी भी स्तर पर उचित नहीं है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई कर शहीद स्मारक को व्यवस्थित रूप देने की मांग की, ताकि शहीद जगनाथ मीणा की स्मृति को सम्मानपूर्वक सुरक्षित रखा जा सके।
