चेक अनादरण के मामले में आरोपी दोषसिद्ध, एक वर्ष का कारावास

50 हजार के चेक के मामले में 80 हजार रुपये प्रतिकर राशि देने का आदेश

चित्तौड़गढ़, स्मार्ट हलचल। चेक अनादरण के मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या 02, चित्तौड़गढ़ की पीठासीन अधिकारी श्रीमती अंकिता चन्द्रावत ने 4 अगस्त 2026 को महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए अभियुक्त रतनलाल कुमावत निवासी सिरोड़ी, तहसील चित्तौड़गढ़ को दोषसिद्ध घोषित किया। न्यायालय ने अभियुक्त को एक वर्ष के साधारण कारावास तथा परिवादी को 80 हजार रुपये प्रतिकर राशि अदा करने से दंडित किया।

प्रकरण के अनुसार परिवादी नवीन कुमार नाहर, निवासी लक्ष्मी ज्वैलर्स, सदर बाजार चित्तौड़गढ़ ने अपने अधिवक्ताओं रत्नेश कुमार जैन (बोहरा), विशाल सिंह भाटी एवं मोनिका जैन के माध्यम से अभियुक्त के विरुद्ध चेक अनादरण का परिवाद न्यायालय में पेश किया था।

परिवाद के अनुसार अभियुक्त ने व्यवसाय एवं घरेलू खर्च सहित अन्य आवश्यकताओं के लिए परिवादी से 50 हजार रुपये उधार लिए थे। इसकी अदायगी के लिए अभियुक्त ने 50 हजार रुपये का चेक परिवादी को दिया। चेक बैंक में प्रस्तुत किए जाने पर अपर्याप्त राशि के कारण अनादरित हो गया।

इसके बाद परिवादी की ओर से अभियुक्त को कानूनी नोटिस भेजा गया, लेकिन चेक की राशि का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद परिवादी ने अधिवक्ताओं के माध्यम से न्यायालय में परिवाद पेश कर कानूनी कार्रवाई शुरू की।

मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों एवं दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर अभियुक्त रतनलाल कुमावत को चेक अनादरण के अपराध का दोषी माना। न्यायालय ने अभियुक्त को एक वर्ष के साधारण कारावास से दंडित करते हुए परिवादी को 80 हजार रुपये प्रतिकर राशि दिलाने का आदेश दिया।

परिवादी की ओर से अधिवक्ता रत्नेश कुमार जैन (बोहरा), विशाल सिंह भाटी एवं मोनिका जैन ने पैरवी की।