ढाई माह तक चक्कर, कोर्ट के आदेश पर खुली पुलिस की फाइल; 2.52 लाख की साइबर ठगी का मामला दर्ज

युवक और उसकी मां के खातों से रकम उड़ाने का आरोप, शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो न्यायालय की शरण

महेन्द्र नागौरी

भीलवाडा / स्मार्ट हलचल|बिजोलिया साइबर ठगी के एक मामले में पुलिस की कार्रवाई करीब ढाई माह बाद न्यायालय के आदेश पर शुरू हुई। बिजोलिया निवासी युवक और उसकी मां के बैंक खातों से कथित तौर पर कुल 2 लाख 52 हजार 943 रुपए ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए निकाल लिए गए। पीड़ित की ओर से शिकायत और कार्रवाई के प्रयास के बावजूद मामला दर्ज नहीं होने पर आखिरकार उसे न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में अब बैंक खातों से लेकर डिजिटल लेनदेन तक की कड़ियां खंगाली जा रही हैं।
रातों-रात खातों से निकल गई रकम
पुलिस के अनुसार बिजोलिया निवासी रमेश खटीक ने न्यायालय में परिवाद पेश कर बताया कि 27 मई की रात उसके बैंक खाते में कई संदिग्ध ट्रांजेक्शन हुए। खाते की जानकारी लेने पर पता चला कि अलग-अलग ऑनलाइन लेनदेन के माध्यम से उसके खाते से 2 लाख 45 हजार 943 रुपए निकाल लिए गए।
पीड़ित का आरोप है कि साइबर ठगों ने उसकी माता काली देवी खटीक के बैंक खाते को भी निशाना बनाया और वहां से 7 हजार रुपए ट्रांसफर कर लिए। इस तरह दोनों खातों से कुल 2,52,943 रुपए की राशि निकलने का आरोप है।
शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, कोर्ट पहुंचा पीड़ित
रमेश के मुताबिक घटना के बाद उसने पुलिस से शिकायत कर रकम वापस दिलाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, लेकिन मामला दर्ज नहीं होने पर उसे न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने अब संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया है।
अब बैंक खातों और डिजिटल ट्रेल की जांच
पुलिस जांच में अब कथित ठगी की रकम किन खातों में पहुंची, किस माध्यम से ट्रांसफर हुई और उसके बाद रकम कहां गई—इन सभी बिंदुओं पर पड़ताल की जा रही है। यूआईडी/यूपीआई ट्रांजेक्शन, बैंक खातों, लाभार्थी खातों और डिजिटल लेनदेन से जुड़े तकनीकी रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।
पीड़ित ने ठगी गई राशि की बरामदगी के साथ संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज कराने तथा आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। अब पुलिस के सामने चुनौती है कि डिजिटल लेनदेन की कड़ियां जोड़कर कथित साइबर ठगों तक कैसे पहुंचा जाए और पीड़ित की रकम की बरामदगी कैसे कराई जाए।