गांवों में ‘इलाज का कारोबार’ बेखौफ! कथित अवैध क्लिनिकों पर किसकी मेहरबानी?

गांवों में ‘इलाज का कारोबार’ बेखौफ!

 

The ‘medical business’ is unafraid in villages.

कथित अवैध क्लिनिकों पर किसकी मेहरबानी? बिना अनुमति उपचार के आरोप, मेडिकल वेस्ट खुले में फेंकने से संक्रमण का खतरा

अलकेश पारीक

शक्करगढ़।स्मार्ट हलचल|क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की आड़ में कथित रूप से बिना वैध अनुमति संचालित हो रहे निजी क्लिनिकों को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। शक्करगढ़, बाकरा, टिटोड़ा जागीर सहित आसपास के दर्जनों गांवों में ऐसे क्लिनिक संचालित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जहां मरीजों का उपचार करने के साथ दवाइयां भी दी जा रही हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर क्लिनिक संचालकों के पास मरीजों के उपचार के लिए आवश्यक वैध पंजीयन, अनुमति और निर्धारित योग्यता है या नहीं, इसकी जांच तक नहीं की जा रही। यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज के नाम पर कथित रूप से मनमानी का खेल लंबे समय से जारी है।

इलाज के बाद कचरा भी खुले में, जिम्मेदार कौन?

मामला केवल कथित अवैध उपचार तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार कुछ जगहों पर उपचार के बाद निकलने वाला मेडिकल वेस्टेज भी खुले स्थानों पर फेंका जा रहा है। इस्तेमाल की गई सिरिंज, ग्लव्स, पट्टियां, दवाइयों के खाली पैकेट सहित अन्य चिकित्सकीय कचरा आबादी के आसपास नजर आने की शिकायतें हैं।

खुले में पड़ा यह कचरा बच्चों, ग्रामीणों और पशुओं के लिए संक्रमण तथा चोट का खतरा पैदा कर सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि मेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण के नियमों की निगरानी कौन कर रहा है?

कागजों में नियम, जमीन पर बेखौफ क्लिनिक?

ग्रामीणों का कहना है कि यदि क्षेत्र में निजी क्लिनिक संचालित हो रहे हैं तो उनकी नियमित जांच होनी चाहिए। संचालकों की शैक्षणिक योग्यता, पंजीयन, क्लिनिक की अनुमति, दवाइयों की वैधता और मेडिकल वेस्टेज निस्तारण की व्यवस्था की जांच जिम्मेदार विभाग को करनी चाहिए।

ग्रामीणों ने चिकित्सा विभाग से मांग की है कि शक्करगढ़ क्षेत्र के गांवों में संचालित सभी निजी क्लिनिकों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए। यदि कोई क्लिनिक बिना अनुमति या निर्धारित मापदंडों के विपरीत संचालित पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या चिकित्सा विभाग गांव-गांव पहुंचकर इन शिकायतों की हकीकत जांचेगा, या फिर कथित अवैध क्लिनिकों का यह कारोबार इसी तरह चलता रहेगा?