रमेश चंद्र डाड
आकोला | स्मार्ट हलचल|काछोला तहसील क्षेत्र की आठ ग्राम पंचायतों के किसानों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। वर्ष 2024-25 और 2025-26 की खरीफ फसलों के खराबे की बकाया मुआवजा राशि का भुगतान न होने से नाराज किसानों में भारी आक्रोश है। क्षेत्र के 60 प्रतिशत से अधिक किसान आज भी अपनी न्यायसंगत राशि के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
*50 राजस्व गांव घोषित हुए थे अभावग्रस्त*
जीएसएस (GSS) अध्यक्ष राधेश्याम कंजर ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने आदेश जारी कर खरीफ सीजन 2024 और खरीफ सीजन 2025 में हुई भीषण ओलावृष्टि के बाद काछोला तहसील क्षेत्र की 8 ग्राम पंचायतों के 50 राजस्व गांवों को अभावग्रस्त घोषित किया था। इन क्षेत्रों में 33 फीसदी से अधिक फसलों का भारी नुकसान आंका गया था।
*SDRF नियमों की उड़ रही धज्जियां*
नियमों के मुताबिक, इन अभावग्रस्त गांवों के प्रभावित किसानों को एसडीआरएफ (SDRF) नियमों के तहत तत्काल कृषि अनुदान राशि का वितरण किया जाना था। लेकिन विडंबना यह है कि दो वर्ष का लंबा समय बीत जाने के बाद भी आधे से अधिक (60% से ज्यादा) किसान इस राहत राशि से वंचित हैं।
*किसानों ने सरकार से पूछा- देरी का कारण स्पष्ट करें*
पीड़ित किसानों ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों की मांग है कि सरकार इस देरी का मुख्य कारण स्पष्ट करे। किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा से नष्ट हुई फसलों का उचित मुआवजा समय पर न मिलना बेहद चिंता का विषय है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक संकट और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है।
*दी उग्र आंदोलन की चेतावनी*
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बकाया राशि का निपटारा जल्द से जल्द और पारदर्शी तरीके से नहीं किया गया, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। आने वाले दिनों में अपनी मांगों को लेकर किसान उग्र आंदोलन और प्रदर्शन के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
