ओम जैन
शंभूपुरा।स्मार्ट हलचल|सेन्थी स्थित शांति भवन मे चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान जैन सिदान्ताचार्य श्री प्रतिभा श्री जी म.सा. ने व्याख्यान के दौरान फरमाया कि भौतिक प्रकाश की सीमा है किन्तु आध्यात्मिक प्रकाश असीमित है। मिट्टी के दिपक को प्रज्वलित करने के लिए तेल व बाती चाहिए वह अंधकार का भक्षण कर धुआ ऊंगलता है व सीमित क्षेत्र ही प्रकाशवान करता है। दिपक हवा के जोके से बुझ जाता है, किन्तु आध्यात्मिक प्रकाश कभी बुझता नही है। मनुष्य ऐसी प्रकाश यात्रा मे विश्वास रखता है जहाँ उसका कल्याण हो। दिपक का गुण है स्वंय प्रकाशित होना। आप भी आध्यात्मिक रूपी दिपक को जलाकर अन्य लोगो को प्रकाशित कर सकते हो, जरूरत है मजबूत ईच्छा शक्ति की। दिपक 4 प्रकार के होते है, दिन का दिपक सूर्य, रात्री का दिपक चन्द्र, कुल का दिपक पुत्र व तीनो का दिपक तीर्थकर। अतिजात या अनुजात पुत्र अपने कुल को आलोकित करता है जो अपने कुटुम्ब को अंधकार से उजाले की ओर ले जाता है।
नवकार मंत्र के जाप की श्रृंखला मे कल 1 सितम्बर के जाप के लाभार्थी सागरमल, दिव्या बोहरा रहेंगे।
श्री संघ सेन्थी ने प्रवचन ओर जाप में अधिकाधिक संख्या मे पधारकर धर्म लाभ लेने का आव्हान किया।
