एक्सिस बैंक के नाम पर ठगी करने के आरोप में 64 आरोपी गिरफ्तार

रेखचन्द्र भारद्वाज

दिल्ली में संचालित साइबर अपराध सिंडिकेट का पर्दाफाश

कार्यवाही में डीएसटी डीग प्रभारी अमरसिंह उ.नि. व कांस्टेबल नेतराम की रही विशेष भूमिका

जुरहरा, जिला डीग: स्मार्ट हलचल|डीग जिला पुलिस अधीक्षक शरण गोपीनाथ के. द्वारा जिले में साइबर ठगों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ” ऑपरेशन काउण्टडाउन‘‘ के तहत डीग पुलिस द्वारा कार्यवाही करते हुए एक्सिस बैंक के नाम पर चल रहे एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। जिसके तहत साइबर क्राइम के बड़े नेटवर्क पर राजस्थान पुलिस ने प्रहार करते हुए दिल्ली में संचालित एक संगठित साइबर अपराध सिंडिकेट का पर्दाफाश कर कुल 64 आरोपी (पुरूष 31 एवं महिला 42) को गिरफ्तार करते हुए 02 नाबालिगों को भी रेस्क्यू किया है। आरोपियों के कब्जे से 88 एन्ड्रोएड मोबाईल फोन भी जब्त किए गए हैं। जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार शाखा प्रबंधक, एक्सिस बैंक डीग फूलसिंह द्वारा साइबर क्राइम थाना डीग में एक लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट के अनुसार, एक संगठित साइबर अपराधी गिरोह एक्सिस बैंक की साख, नाम, लोगो एवं फर्जी वेब का दुरुपयोग कर ग्राहकों को फर्जी कॉल कर रहा था। आरोपी खुद को बैंक का वरिष्ठ अधिकारी बताकर फर्जी आईडी कार्ड दिखाते थे और क्रेडिट कार्ड की सीमा बढ़ाने, नवीनीकरण आदि का झांसा देकर गोपनीय डेटा (पैन कार्ड डिटेल्स, जीमेल आईडी, जन्मतिथि आदि) हासिल कर बैंक खातों से अवैध ऑनलाइन वित्तीय ट्रांजैक्शन कर ठगी को अंजाम दे रहे थे। बैंक की प्रारंभिक जांच एवं डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर गिरोह के मुख्य सदस्य की पहचान आकाश पुत्र रामप्रकाश निवासी बनकट, थाना ताहवरपुर, जिला आजमगढ़ उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है। यह गिरोह उत्तम नगर, दिल्ली में एक तीन मंजिला ईमारत में अवैध कॉल सेंटर संचालित कर राजस्थान के विभिन्न मोबाइल नंबरों पर संपर्क कर संगठित रूप से साइबर अपराध को अंजाम दे रहा था। उक्त सूचना पर मामले की गंभीरता को देखते हुए अति. पुलिस अधीक्षक कामां दिनेश यादव के नेतृत्व मे स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम गठित की गई। पुलिस टीम ने जब मौके पर दबिश दी तो तीन मंजिला ईमारत में कुल 85 व्यक्ति जिनमे 41 युवक, 42 युवतिया एवं 02 नाबालिग थे। जिनसे पूछताछ एवं अनुसंधान से कुल 64 व्यक्तियों (31 युवक एवं 33 युवतियों) को डिटेन व 02 नाबालिग को रेस्क्यू किया गया। पूछताछ व अनुसंधान के बाद कुल 19 युवक – युवतियों को उनके परिजनों के साथ भेज दिया गया। प्राप्त रिपोर्ट व डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर साइबर क्राइम पुलिस थाना डीग में आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उक्त मामले की जांच एवं अग्रिम कानूनी कार्यवाही विरेन्द्र पाल पुलिस उपाधीक्षक, साइबर क्राइम पुलिस थाना डीग द्वारा की जा रही है।

क्या था अपराध का तरीका- यह शातिर गिरोह जॉब पोर्टल्स से बेरोजगार युवाओं के रिज्यूमे निकालकर, उन्हें एक फर्जी कंपनी का नाम बताकर अपनी गैंग में शामिल करता था। गिरोह में ट्रेनिंग, इंटरव्यू, टीम लीडर और एम्प्लॉई (कर्मचारी) जैसे अलग-अलग स्तरों पर काम बांटा गया था। युवाओं को 11,000 से 15,000 रुपये तक की मासिक सैलरी दी जाती थी। सबसे गंभीर बात यह है कि इस अपराध में 18 वर्ष से कम उम्र के नाबालिग बच्चों को भी काम पर रखा गया था। जो कर्मचारी (ठग) ज्यादा लोगों के साथ धोखाधड़ी करता था, उसे वेतन के अलावा एक्स्ट्रा कमीशन का लालच दिया जाता था। ये साइबर ठग कॉल और व्हाट्सएप के माध्यम से ग्राहकों से संपर्क करते थे। इसके लिए वे पहले से लिखी गई स्क्रिप्ट का उपयोग करते थे ताकि ग्राहकों को विश्वास में लेकर उनकी व्यक्तिगत जानकारी हासिल कर सकें।

फर्जी आईडी कार्ड व बल्क डेटा बरामद- पुलिस को जांच में प्रमुख बैंकों के अधिकारियों के फर्जी आईडी काड्र्स मिले हैं साथ ही भारी मात्रा में ग्राहकों का बल्क डेटा भी मिला है, जिसमें लोगों के बैंक अकाउंट, पैन कार्ड, नाम, आवासीय पते और अन्य बैंकिंग जानकारियां शामिल हैं। इस ठगी के लिए एक ही व्यक्ति के नाम पर कई फर्जी सिम कार्ड्स का इस्तेमाल किया जा रहा था। जांच में अब तक करोड़ों रुपये के अवैध वित्तीय लेनदेन उजागर हुए हैं। इस गिरोह के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी कई शिकायतें दर्ज पाई गई हैं।