गोचर भूमि बचाने की मांग, तीन दिन में कार्रवाई बंद नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
चित्तौड़गढ़, स्मार्ट हलचल। ग्राम नरपत की खेड़ी में नगर विकास न्यास (यूआईटी) चित्तौड़गढ़ द्वारा विकसित की जा रही आवासीय भूखंड योजना का ग्रामीणों ने विरोध जताया है। ग्रामीणों और महिलाओं ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर योजना को निरस्त करने तथा संबंधित भूमि को पुनः गोचर भूमि के रूप में सुरक्षित रखने की मांग की।ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि गांव में बड़ी संख्या में गरीब परिवार निवास करते हैं, जिनकी आजीविका और पशुपालन के लिए गोचर भूमि महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों का कहना है कि आवासीय भूखंडों की लॉटरी के माध्यम से किए जा रहे आवंटन को तत्काल निरस्त किया जाए और भूमि को पशुधन तथा ग्रामीण हितों के लिए गोचर के रूप में सुरक्षित रखा जाए।
• आवासीय भूखंड योजना को निरस्त किया जाए।
• 215 बीघा भूमि को गोचर भूमि के रूप में दर्ज किया जाए।
• यूआईटी की कार्रवाई तीन दिन के भीतर बंद की जाए।
ज्ञापन में ग्राम नरपत की खेड़ी में 215 बीघा भूमि को गोचर भूमि के रूप में दर्ज करने की मांग भी की गई है। ग्रामीणों ने यूआईटी द्वारा की जा रही कार्रवाई को तीन दिन के भीतर बंद करने की मांग करते हुए कहा कि मांग पूरी नहीं होने पर रोड जाम, बाजार बंद, धरना-प्रदर्शन सहित आंदोलन किया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि गोचर भूमि कम होने से पशुपालकों और गरीब परिवारों के सामने समस्या खड़ी हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से गांव के पशुधन, रोजगार और भविष्य को ध्यान में रखते हुए भूमि को सुरक्षित रखने की मांग की।
ज्ञापन देने वालों में गौशाला अध्यक्ष शिवरतन सालवी, वार्ड सदस्य हनुमान चौबीसा, पूर्व सरपंच रतन सुथार, पूर्व वार्ड सदस्य पन्नालाल पालीवाल, मदन वैष्णव, शुभम सालवी, पवन सालवी, प्रेम माली, नानालाल माली, मोतीलाल माली, प्रकाश पुरोहित, रामलाल चौबीसा, मदन चौबीसा एवं सुनील तेली सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नरपत की खेड़ी की गोचर भूमि को संरक्षित करते हुए गांव के पशुधन और गरीब परिवारों के हितों की रक्षा की जाए।
