भजनों व कानुड़ा गीतों पर महिलाओं ने किया गरबा-रास; समाजसेवी भीखाराम प्रजापत ने बताया पर्व का आध्यात्मिक व ऐतिहासिक महत्व

भजनों व कानुड़ा गीतों पर महिलाओं ने किया गरबा-रास; समाजसेवी भीखाराम प्रजापत ने बताया पर्व का आध्यात्मिक व ऐतिहासिक महत्व

जालौर (स्मार्ट हलचल)जालौर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव (श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व) श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ धूमधाम से मनाया गया। इस पावन अवसर पर मंदिरों व घरों में विशेष सजावट की गई तथा श्रद्धालुओं ने दिनभर उपवास रखकर मध्यरात्रि ठीक 12 बजे भगवान के प्राकट्य पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

अधर्म के नाश व धर्म स्थापना का प्रतीक है जन्माष्टमी

समारोह के दौरान समाजसेवी भीखाराम प्रजापत ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अधर्म, अन्याय और अत्याचार के विनाश तथा सत्य की पुनर्स्थापना के लिए हुआ था। उन्होंने बताया कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की आधी रात को मथुरा के कारागार में माता देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान के रूप में कान्हा का प्राकट्य हुआ। कंस के कारागार के ताले चमत्कारिक रूप से खुल गए और वासुदेव जी नवजात कृष्ण को यमुना पार गोकुल में नंद बाबा और यशोदा मैया के घर पहुंचा आए।

🌸 कानुड़ा गीतों और भजनों पर महिलाओं ने किया डांडिया-रास

मध्यरात्रि 12 बजे जन्मोत्सव की महाआरती के पश्चात महिलाओं व युवतियों ने पारंपरिक कानुड़ा गीत, ‘गोपियों के श्याम’, ‘हारे का श्याम हमारा’ और ‘हैप्पी बर्थडे कृष्णा’ जैसे भजनों पर भक्तिभाव से गरबा और रास नृत्य प्रस्तुत किया। ढोल-थाली की थाप और जयकारों से समूचा क्षेत्र गूंज उठा।

महोत्सव में ये रहे उपस्थित

इस धार्मिक आयोजन में समरथाराम, मोडाराम, मगाराम, भरत, दुष्यंत कुमार, नरेन्द्र, कैलाश, नेहा, कमला, पोनी, रेणुका परिहार सहित बड़ी संख्या में स्थानीय मोहल्लेवासी एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।