काछोला 8 सितम्बर – स्मार्ट हलचल|कस्बे में बछ बारस के पावन पर्व पर महिलाओं ने गौ माता व बछड़े की पूजा अर्चना व विधिवत पूजन कर संतान के दीर्घायु होने व सुख समृद्धि की कामना की।वही महिलाओं ने इससे पूर्व गौ माता व बछड़े को सजाकर उनकी पूजा अर्चना की और परिवार की सुख समृद्धि खुशहाली की कामना की।
भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में गाय की पूजा-अर्चना कर संतान के सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना करने का विशेष महत्व है। विशेषकर बछ बारस (गोवत्स द्वादशी) और गोपाष्टमी जैसे त्योहारों पर महिलाएं अपनी संतान की खुशहाली के लिए गाय और बछड़े की विशेष पूजा करती हैं।
संतान के सुख-समृद्धि की कामना के लिए पूजा की सरल विधि और महत्व नीचे दिया गया है:
- विशेष भोग: गाय और बछड़े को भीगे हुए चने, मूंग, बाजरा और महुए का भोग लगाया जाता है। इस दिन गाय के दूध से बनी चीजों और गेहूं-चावल का सेवन करने से बचा जाता है।
- आशीर्वाद: पूजा के बाद गाय के पैर छूकर अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और समृद्धि का आशीर्वाद मांगें।
✨ संतान सुख के लिए विशेष मंत्र
पूजा के दौरान या बाद में गाय माता के सामने इस मंत्र का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:
“सर्वकामदुधे देवि सर्वतीर्थाभिषेचिनि।
पावने सुरभि श्रेष्ठे देवि तुभ्यं नमोऽस्तुते॥”
🌾 धार्मिक महत्व
- ३३ कोटि देवताओं का वास: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गाय में ३३ कोटि (प्रकार) देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए गाय की सेवा और पूजा करने से सभी देवताओं का आशीर्वाद एक साथ मिल जाता है।
- संतान की रक्षा: मां गाय को मातृत्व का सर्वोच्च प्रतीक माना गया है। ऐसी मान्यता है कि जो माताएं पूरी श्रद्धा से गो-माता की पूजा करती हैं, उनके बच्चों पर आने वाले सभी संकट दूर हो जाते हैं और संतान को सुखी व समृद्ध जीवन मिलता है।