निंबाहेड़ा निकाय चुनाव का रोमांच और आध्यात्मिक संवाद

एक बेबाक राजनीतिक व्यंग्य # 7 — आकाश शर्मा

स्मार्ट हलचल|सुबह के सात बजते ही निंबाहेड़ा नगर परिषद क्षेत्र के मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की कतारें लगनी शुरू हो गईं। लोकतंत्र के इस महापर्व में हिस्सा लेने को लेकर शहरवासियों में गजब का उत्साह देखने को मिला। हर कोई अपने वार्ड और शहर की सरकार चुनने के लिए उत्सुक नजर आया ।
सुबह 10 बजे तक के आंकड़ों पर नजर डालें, तो कुल 58,651 मतदाताओं में से 13,220 लोगों ने अपने मताधिकार का उपयोग कर लिया था, जो कि 22.71 प्रतिशत रहा। इसके बाद दोपहर 1 बजे तक यह आंकड़ा बढ़कर 26,949 मतदाताओं तक पहुंच गया और कुल मतदान 45.95 प्रतिशत दर्ज किया गया। वहीं, अगर जिले के अन्य निकायों की बात करें, तो निम्बाहेड़ा, बड़ी सादड़ी, आकोला और कपासन—इन चारों निकायों का कुल मतदान प्रतिशत 51.62 रहा।
चुनावी गहमागहमी के बीच कुछ पल सुकून के मिले, तो मन स्वतः ही परम पूज्य मुकेश्यानंद महाराज के स्मरण में लीन हो गया। आंखें बंद कर उनका ध्यान लगाया, तो अंतर्मन में उनके चरणों के पुष्प उभर आए। अंतरात्मा से आवाज आई, “बाबाजी, आप इस वक्त कहां हैं ?” कुछ ही क्षणों में बाबाजी का जवाब गूंजा, “वत्स, मैं वार्डों में ही व्यस्त हूं और अपने सांसारिक भक्तों को देख रहा हूं। जरा देखो तो सही, किस तरह लोग मतदान के इस महाकुंभ में अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए अनुशासित तरीके से लाइनों में लगकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।” मैंने जिज्ञासावश पूछा, “बाबाजी, क्या कहीं से किसी अप्रिय घटना या माहौल खराब होने की आशंका है ?”
बाबाजी ने सहज मुस्कान के साथ समझाया, “लड़ाई-झगड़े और छोटी-मोटी बातें तो हर चुनाव में हर जगह होती हैं, वत्स! उन्हें छोटी ही रहने दो, बड़ा मत बनने दो।” मैंने फिर पूछा, “बाबाजी, इस वक्त निम्बाहेड़ा में लंबे और छोटू के क्या हाल-चाल हैं ?” बाबाजी ने भेद खोलते हुए कहा, “दोनों बिल्कुल निश्चित हैं। एक हारेगा और एक जीतेगा, इसलिए उन्हें कोई तनाव नहीं है। तनाव तो सिर्फ कार्यकर्ता और प्रत्याशी ले रहे हैं।” मैंने सिर हिलाते हुए कहा, “बाबाजी, यह बात तो सौ फीसदी सही कही आपने।”