बनेठा थाना क्षेत्र में बीते पांच दिन से दिनरात दौड़ रहे बजरी से भरे ओवरलोड वाहन,पुलिस-माफियाओं के बीच आंख-मिचौली का आरोप
शिवराज बारवाल मीना
टोंक/बनेठा/उनियारा। स्मार्ट हलचल|उनियारा सर्किल क्षेत्र के बनेठा थाना सहित अन्य थाना क्षेत्रों में में बीते पांच दिन (7 सितम्बर) से अवैध बजरी खनन एवं परिवहन का मामला कुछ दिनों के अंतराल के बाद एक बार फिर सुर्खियों में है। बनेठा थाना क्षेत्र में पांच दिन से रात-दिन बजरी से भरी ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के आवागमन की चर्चा के बीच पुलिस एवं संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। बनेठा थाना क्षेत्र की बात करें तो बीते पांच दिन (7 सितम्बर) से लगातार एक ही ड्यूटी ऑफिसर दयाराम चौधरी (323) हैड कांस्टेबल को लगाया जा रहा हैं, तब से लगातार बेखौफ बजरी खनन व परिवहन जारी हैं। उक्त हैड कांस्टेबल दयाराम चौधरी के विरूद्ध पूर्व में भी फरवरी 2026 महीने में अवैध बजरी खनन व परिवहन की कथित चौथ वसूली के मामले में नाम चर्चा में आया था।
स्थानीय ग्रामीणों एवं क्षेत्रवासियों का आरोप है कि रात के समय बनेठा थाना क्षेत्र के मीणों की झोपड़ियां, खद्दो की झौपड़ियां एवं सुरेली क्षेत्र की ओर से बनास नदी क्षेत्र में कथित अवैध खनन के बाद बजरी से भरे वाहन बनेठा थाना क्षेत्र से होकर अलीगढ़, सोप, उनियारा, नगरफोर्ट एवं टोंक सदर थाना क्षेत्र की ओर निकल रहे हैं। जहां गुरूवार व शुक्रवार रात्रि को बनास नदी डेम क्षेत्र, मीणों की झोपड़ियां, सुरेली-सूरज्या भैरूं मोड़ नाका, बनेठा कस्बा टोंक रोड घाटी, थाने के समीप छतरी चौराहा, रूपपुरा से बजरी परिवहन के ओवरलोड वाहनों के नजारे देखे गए। जिसके वीडियो भी सामने आए हैं।
*आरएसी नाके के बावजूद बजरी परिवहन पर सवाल*
स्थानीय ग्रामीणों व क्षेत्रवासियों के अनुसार सूरज्या भैरूं मोड़ पर आरएसी जवानों की निगरानी में नाका लगा हुआ है। इसके बावजूद यहां से बजरी से भरे वाहनों के गुजरने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कुछ लोगों द्वारा नाके पर तैनात स्टाफ एवं पुलिस की कथित मिलीभगत से 500 से 1000 रुपये प्रति वाहन की कथित ‘एंट्री’ लिए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। इन गंभीर आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और यह जांच व गोपनीय सत्यापन का विषय है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि कुछ माह पूर्व भी सूरज्या भैरूं मोड़ चेक पोस्ट के पास तैनात महिला एवं पुरुष आरएसी जवानों के सामने से बजरी से भरी करीब आधा दर्जन ट्रैक्टर-ट्रॉलियां गुजरती नजर आई थीं। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात भी सामने आई थी। ऐसे में सवाल है कि निगरानी नाके के बावजूद बजरी परिवहन कैसे जारी है?
*पुलिस गश्त और बजरी वाहनों के बीच आंख-मिचौली का खेल*
बताया जा रहा है कि गुरुवार व शुक्रवार की रात को अवैध बजरी परिवहन की भनक लगने व मामला उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद पुलिस गश्त सक्रिय हुई। स्थानीय लोगों के अनुसार कार्रवाई के बजाय पुलिस गश्त और बजरी वाहनों के बीच आंख-मिचौली जैसी स्थिति देखने को मिली तथा कुछ वाहन चालक रास्ता बदलकर निकलते नजर आए, जो आम जनता के केमरों में कैद हैं। उस समय बनेठा थाना पुलिस थाने पर सोती रही। सूचना के बाद पुलिस महज दिखावी गश्त के लिए बजरी माफियाओं के विपरीत दिशा में घूमती नजर आई। तब तक बजरी परिवहन हो चुका था। वास्तविक स्थिति पुलिस की रात्रि गश्त, सीसीटीवी/नाका रिकॉर्ड एवं विभागीय कार्रवाई के रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकती है।
*एसआईटी की सक्रियता पर भी उठे सवाल*
अवैध बजरी खनन एवं परिवहन की रोकथाम के लिए राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन के निर्देश पर उनियारा उपखण्ड क्षेत्र में गठित विभिन्न विभागों की संयुक्त एसआईटी की सक्रियता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि संयुक्त टीम द्वारा नियमित एवं प्रभावी निगरानी की जाए तथा खनन स्थल से लेकर परिवहन मार्ग तक कार्रवाई की जाए तो रात के समय कथित रूप से जारी अवैध बजरी परिवहन पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
*चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र से भी बजरी आने का दावा*
वहीं, समीपवर्ती सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा थाना क्षेत्र के बड़ागांव-डिडायच-देवली इलाके से भी कथित अवैध बजरी के ओवरलोड वाहनों के आने की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है।
बताया जा रहा है कि ऐसे वाहन उनियारा सर्किल के अलीगढ़, बनेठा, उनियारा एवं सोप थाना क्षेत्र से होकर समीपवर्ती बूंदी एवं सवाई माधोपुर जिले की ओर गुजरते हैं। इन दावों की भी संबंधित विभागों से पुष्टि अपेक्षित है।
*चुनाव ड्यूटी के कारण स्टाफ की कमी का फायदा?*
नगर निकाय चुनाव के चलते पुलिसकर्मियों की ड्यूटी अन्य स्थानों पर लगने से थानों में स्टाफ की कमी होने की बात भी सामने आ रही है। आरोप है कि इसी स्थिति का फायदा अवैध बजरी परिवहन से जुड़े लोग उठा रहे हैं। वहीं, कुछ स्थानों पर पुलिस सहित अन्य जिम्मेदारों द्वारा बजरी परिवहन को लेकर कथित चौथ वसूली एवं एंट्री के आरोप भी चर्चा में हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पुलिस एवं प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठ रही है।
*पूर्व में पकड़े गए बजरी वाहनों के मामलों में भी उठ रहे सवाल*
क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि कभी-कभार अवैध बजरी परिवहन के नाम पर वाहन पकड़े जाने के बाद कथित रूप से प्रकरण को कमजोर करने अथवा वाहन चालकों के बजाय वास्तविक संचालकों तक कार्रवाई नहीं पहुंचने के आरोप लगाए जा रहे हैं। बनेठा थाना पुलिस द्वारा पूर्व में कथित तौर पर सौतेली कार्यवाही भी देखने को मिली है, जहां पर बजरी के खाली ट्रैक्टर ट्रॉलीयों को बजरी भरा हुआ दिखाया तो वहीं बजरी भरे हुए बजरी के ट्रैक्टर-ट्रालीयों को खाली दिखाने के मामले भी सामने आ चुके हैं, जिनमें बनेठा थाना पुलिस द्वारा पूर्व में पुलिस-मीडिया पुष्टि रही की पुलिस द्वारा पीछा करने पर चालक ट्रैक्टर ट्रॉली से बजरी को खाली करके भाग गए। वहीं कुछ मामलों में यह सामने आया कि सूचना पर पुलिस मौके पर भी पहुंची, ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली पानी भरे कीचड़ में फंस गए थे, इसलिए जाप्ते के अभाव में उनको मौके पर ही छोड़ आए। यदि ऐसे आरोप सही हैं तो यह भी गंभीर जांच का विषय है कि कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया में कहीं कोई खामी तो नहीं छोड़ी जा रही। वहीं अवैध बजरी परिवहन से जुड़े मामले में कथित तौर पर कुछ दलालों व वाहन चालक द्वारा पुलिस के नाम पर चौथ वसूली के मामले भी सामने आ रहे हैं।
*सूचना के बावजूद प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं?*
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि आमजन को रात के समय बजरी से भरे ओवरलोड वाहन सड़कों पर दिखाई दे रहे हैं और संबंधित विभागों को इसकी सूचना भी दी जा रही है, तो प्रभावी एवं निरंतर कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही? स्थानीय ग्रामीणों व क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन, पुलिस, खनिज एवं वन विभाग से संयुक्त अभियान चलाकर अवैध खनन के संभावित स्रोत से लेकर परिवहन मार्ग तक निगरानी और कार्रवाई करने की मांग की है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग सामने आ रहे इन आरोपों एवं शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और अवैध बजरी खनन-परिवहन पर न्यायालय के आदेशों एवं लागू नियमों की पालना सुनिश्चित करते हुए वास्तविक और प्रभावी कार्रवाई कब तक दिखाई देती है।