श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्थाएं जुटाने में जुटा मेला आयोजन पक्ष-सुरक्षा व यातायात व्यवस्था को लेकर पुलिस तैनात
शिवराज बारवाल मीना
टोंक/अलीगढ़। स्मार्ट हलचल|उनियारा उपखंड क्षेत्र की अलीगढ़ तहसील के ग्राम रोशनपुरा में मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को दुधारू पशुओं के लोक देवता हीरामन बाबा का विशाल मेला आयोजित होगा। मेले में टोंक जिले के अलावा बूंदी, कोटा, झालावाड़, सवाई माधोपुर, भीलवाड़ा, जयपुर, अजमेर, दौसा सहित मध्यप्रदेश से भी हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
हीरामन बाबा के पुजारी बीरबल मीणा (गोठिया) के अनुसार मेले में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर बाबा के दर्शन करते हैं। मेले को लेकर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी उत्साह का माहौल है। मेले में खिलौनों, घरेलू सामान सहित विभिन्न प्रकार की दुकानें सजती हैं, जिससे मेले में विशेष रौनक देखने को मिलती है।
*देसी घी की पूड़ी और दूध की खीर बनेगी मुख्य प्रसादी*
मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए देसी घी की पूड़ी और दूध की खीर प्रसादी के रूप में वितरित की जाती है। प्रसादी ग्रहण करने के लिए श्रद्धालुओं की करीब तीन से चार किलोमीटर तक लंबी कतारें लगने की बात बताई गई है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं तक प्रसादी पहुंचाने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का भी उपयोग किया जाता है।
*श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर व्यवस्थाएं*
मेले में संभावित भीड़ को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, प्रसादी वितरण, आवागमन, पार्किंग, साफ-सफाई और भीड़ नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। आयोजन स्थल पर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो, इसके लिए स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाएं की जा रही हैं। वहीं दुकानदारों एवं वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित रखने के लिए भी आवश्यक इंतजाम किए जाएंगे।
*सुरक्षा और यातायात व्यवस्था रहेगी प्रमुख*
मेले में हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सोप थाना पुलिस जाप्ता तैनात रहेगा। भीड़ के दौरान यातायात व्यवस्था सुचारू बनाए रखने, वाहनों को व्यवस्थित खड़ा कराने तथा किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस एवं प्रशासन की ओर से निगरानी रखी जाएगी। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं से भी अपील की गई है कि वे भीड़ के दौरान पुलिस एवं मेला व्यवस्था में सहयोग करें और अपने वाहनों को निर्धारित स्थान पर ही खड़ा करें, ताकि आवागमन बाधित न हो। रोशनपुरा का यह पारंपरिक मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ ग्रामीण संस्कृति और सामाजिक मेल-मिलाप का भी प्रमुख अवसर माना जाता है।