(चिमु धतरवाल)
ग्रामीणों ने विभागीय व्यवस्था पर उठाए सवाल, तत्काल रेस्क्यू और उपचार की मांग
बायतु । स्मार्ट हलचल|बायतु क्षेत्र में खेमाबाबा जन्मस्थली मंदिर के पास राजस्व गांव खेमाबाबा, ग्राम पंचायत नगोनी धतरावलों की ढाणी में करीब दो दिन पूर्व किसी अज्ञात वाहन की टक्कर से एक ऊंट गंभीर रूप से घायल हो गया। ग्रामीणों के अनुसार हादसे में ऊंट के पैर टूट गए हैं और वह पिछले दो दिनों से मौके पर ही दर्द से तड़प रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि हादसे की सूचना वन विभाग तथा 1962 पशु चिकित्सा सेवा को फोन के माध्यम से दी गई। इसके बावजूद अब तक घायल ऊंट का उपचार नहीं होने तथा उसे मौके से रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर नहीं ले जाने को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभागों को सूचना देने के बावजूद उन्हें उचित सहायता नहीं मिली। ग्रामीणों के अनुसार विभागीय स्तर पर कथित रूप से यह जवाब दिया गया कि “हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं है।” हालांकि इस संबंध में संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
दो दिन से खुले में पड़ा है घायल ऊंट-
ग्रामीणों का कहना है कि घायल ऊंट खुले स्थान पर पड़ा हुआ है और उसकी हालत लगातार चिंताजनक होती जा रही है। समय पर उपचार नहीं मिलने से उसकी जान पर भी खतरा मंडरा रहा है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब गंभीर रूप से घायल पशु की सूचना संबंधित विभागों तक पहुंच चुकी है, तो अब तक मौके पर चिकित्सा टीम क्यों नहीं पहुंची और रेस्क्यू की कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
प्रशासन से ग्रामीणों के सीधे सवाल
– सूचना मिलने के बावजूद घायल ऊंट का उपचार अब तक क्यों नहीं हुआ?
– 1962 पशु चिकित्सा सेवा को सूचना देने के बाद टीम मौके पर क्यों नहीं पहुंची?
– वन विभाग को सूचना देने के बावजूद रेस्क्यू क्यों नहीं किया गया?
– घायल पशु की देखरेख की जिम्मेदारी आखिर किस विभाग की है?
– सूचना मिलने के बाद कार्रवाई में देरी के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
– क्या घायल ऊंट को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है?
– जिस वाहन की टक्कर से ऊंट घायल हुआ, उसका पता लगाने के लिए क्या कार्रवाई की गई?
– क्या संबंधित विभागों के बीच घायल पशुओं के रेस्क्यू को लेकर कोई समन्वय व्यवस्था है?
– यदि संबंधित विभाग कार्रवाई नहीं करेंगे तो ग्रामीण किसके पास जाएं?
– यदि समय पर उपचार नहीं मिलने से ऊंट की मौत होती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
तत्काल रेस्क्यू की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल पशु चिकित्सा टीम को मौके पर भेजा जाए, घायल ऊंट का उपचार कराया जाए और आवश्यकता के अनुसार उसे सुरक्षित स्थान पर रेस्क्यू किया जाए। साथ ही वाहन की टक्कर से घायल होने की घटना की जांच कर जिम्मेदार वाहन चालक का पता लगाने की कार्रवाई भी की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि बेजुबान पशु अपनी पीड़ा बता नहीं सकता, इसलिए उसकी जान बचाने के लिए प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ तत्काल कदम उठाने चाहिए।