राम नाम की ध्वजा लेकर नेपाल पहुंचा शाहपुरा का रामस्नेही प्रतिनिधिमंडल

महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज के दीक्षा पर्व पर 15 सदस्यीय दल ने काठमांडू में निभाई सत्संग सेवा की भागीदारी
शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
स्मार्ट हलचल|शाहपुरा की धरती से निकली राम नाम की गूंज अब नेपाल की सांस्कृतिक राजधानी काठमांडू तक पहुंची है। रामस्नेही संप्रदाय की मुख्यपीठ शाहपुरा से 15 सदस्यीय रामस्नेही सत्संगी प्रतिनिधिमंडल आद्याचार्य महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज के संन्यास दीक्षा दिवस के पावन अवसर पर नेपाल पहुंचा। राम नाम का जयघोष करते हुए रवाना हुआ यह दल सड़क मार्ग से नेपाल पहुंचा और वहां आयोजित नेपाल दर्शन सत्संग सेवा चातुर्मास-2026 में शामिल होकर सत्संग, आरती, नामजप और भजन के माध्यम से रामस्नेही परंपरा की आध्यात्मिक चेतना से जुड़ा।
शाहपुरा से प्रस्थान के समय रामस्नेही सत्संगीजनों ने रामद्वारा में प्रणाम कर यात्रा का शुभारंभ किया। प्रतिनिधिमंडल में रामस्नेही सूर्य प्रकाश बिड़ला, नारायण सिंह, राकेश सोमानी, सतीश काबरा, रामसहाय अग्रवाल सहित 15 सदस्य शामिल रहे। यात्रा के दौरान दल में राम नाम का जाप और रामस्नेही संप्रदाय का जयघोष लगातार गूंजता रहा।
शाहपुरा से काठमांडू तक जुड़ी राम नाम की कड़ी–
नेपाल पहुंचने के बाद शाहपुरा के रामस्नेही सत्संगी दल ने काठमांडू में आयोजित धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता की। होटल आनंदा पशुपति, काठमांडू में श्री रामस्नेही हरि मानव परमार्थ सेवा संस्थान, जोधपुर के तत्वावधान में चातुर्मास का आयोजन चल रहा है। यह आयोजन श्री हरिरामजी महाराज शास्त्री के संन्यास स्वर्ण दीक्षा वर्ष महोत्सव के अवसर पर विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है।
चातुर्मास के अंतर्गत संध्या आरती, नामजप, भजन और सत्संग की विभिन्न गतिविधियों में देश-विदेश से पहुंचे रामस्नेही श्रद्धालु सहभागी बन रहे हैं। इसी क्रम में शाहपुरा से पहुंचा प्रतिनिधिमंडल भी कार्यक्रम में शामिल हुआ।
शाहपुरा के लिए यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि रामस्नेही संप्रदाय की परंपरा में शाहपुरा केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आद्याचार्य महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज की साधना, तप और आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ी मुख्यपीठ के रूप में विशिष्ट स्थान रखता है। ऐसे में मुख्यपीठ से नेपाल पहुंचे सत्संगीजनों की यह सहभागिता रामस्नेही परंपरा के अंतरराष्ट्रीय विस्तार का जीवंत उदाहरण बनी।
दीक्षा पर्व पर संतों ने ग्रहण किया महाप्रसाद–
नेपाल दर्शन सत्संग सेवा चातुर्मास-2026 के 56वें दिन, अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय शाहपुरा के संस्थापक आद्याचार्य स्वामी श्री रामचरणजी महाराज के संन्यास दीक्षा पर्व के उपलक्ष्य में विशेष आयोजन हुआ। काठमांडू एवं आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे संत-महापुरुषों को महाप्रसाद ग्रहण करवाया गया। इस पवित्र सेवा कार्य में शाहपुरा से पहुंचे रामस्नेही प्रतिनिधिमंडल ने भी भागीदारी निभाई। रामस्नेही परंपरा में सेवा और सत्संग को साधना का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। इसी भावना के अनुरूप प्रतिनिधिमंडल ने कार्यक्रम में सहभागी बनकर केवल एक धार्मिक आयोजन में उपस्थिति दर्ज नहीं कराई, बल्कि शाहपुरा की आध्यात्मिक विरासत को नेपाल की धरती पर भी साझा किया।
कथा में गूंजा महाप्रभु का जीवन दर्शन–
इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय शाहपुरा पीठ बड़ा रामद्वारा जोधपुर के प्रखर वक्ता एवं कथा प्रवक्ता रामस्नेही संत हरिरामजी महाराज शास्त्री ने महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज के जीवन, साधना और संन्यास दीक्षा प्रसंग पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज का जीवन मानवता, भक्ति, आत्मचिंतन और राम नाम की साधना का संदेश देता है। उनका आध्यात्मिक चिंतन किसी एक स्थान या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राम नाम की साधना के माध्यम से व्यापक समाज को जोड़ने का कार्य करता रहा।
संत हरिरामजी महाराज शास्त्री ने कहा कि रामस्नेही संप्रदाय की मुख्यपीठ शाहपुरा से सत्संगीजनों का नेपाल पहुंचना अपने आप में महत्वपूर्ण आध्यात्मिक प्रसंग है। उन्होंने कहा कि शाहपुरा से नेपाल तक रामस्नेही सत्संगीजनों की यह यात्रा दोनों क्षेत्रों को राम नाम की साधना और सत्संग की भावना से जोड़ रही है।
नेपाल की सांस्कृतिक धरती पर रामस्नेही परंपरा का स्पर्श–
नेपाल की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान में काठमांडू का विशेष स्थान है। पशुपतिनाथ की नगरी में विभिन्न भारतीय संत परंपराओं और आध्यात्मिक धाराओं का संगम दिखाई देता है। ऐसे सांस्कृतिक परिवेश में रामस्नेही संप्रदाय के चातुर्मास आयोजन ने शाहपुरा की आध्यात्मिक परंपरा को नेपाल की भूमि से जोड़ने का अवसर दिया। शाहपुरा से पहुंचे सत्संगीजनों ने आरती, भजन और नामजप में सहभागी बनकर राम नाम की साधना को अपने व्यवहार और आस्था के माध्यम से आगे बढ़ाया। यात्रा का उद्देश्य केवल नेपाल भ्रमण नहीं, बल्कि सत्संग, सेवा और संप्रदाय की आध्यात्मिक मर्यादाओं से जुड़ना रहा।
शाहपुरा की पहचान, राम नाम की साधना–
महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज के दीक्षा पर्व पर नेपाल पहुंचा यह प्रतिनिधिमंडल अपने साथ शाहपुरा की उस आध्यात्मिक परंपरा को लेकर गया, जिसकी आधारशिला राम नाम, सत्संग, सेवा और सदाचार पर टिकी है। शाहपुरा से काठमांडू तक हुई यह यात्रा इस बात की अनुभूति कराती है कि आध्यात्मिक परंपराओं की सीमाएं भौगोलिक सीमाओं से बड़ी होती हैं। एक ओर शाहपुरा की मुख्यपीठ से निकला राम नाम, दूसरी ओर नेपाल की सांस्कृतिक एवं धार्मिक धरतीकृदोनों का यह मिलन सत्संग और सेवा की उस परंपरा को आगे बढ़ाता दिखाई दिया, जो मनुष्य को बाहरी भेदों से ऊपर उठाकर आत्मिक एकता का संदेश देती है।