रामदेवजी और तेजाजी सामाजिक चेतना के आधार स्तंभ थे: समुत्कर्ष गोष्ठी

_150 वी समुत्कर्ष विचार गोष्ठी_

_रामदेवजी और तेजाजी सामाजिक चेतना के आधार स्तंभ थे: समुत्कर्ष गोष्ठी_

 

उदयपुर 19 सितम्बर
स्मार्ट हलचल|राष्ट्रवाद और वैचारिक चेतना को समर्पित अग्रणी संस्था ‘समुत्कर्ष समिति’ की ‘रामदेवजी और तेजाजी : राजस्थान की लोकआस्था और सामाजिक चेतना के लोकनायक’ विषयक 150 वीं विचार गोष्ठी आज सम्पन्न हुई।गोष्ठी के संयोजक हरिदत्त शर्मा ने बताया कि गोष्ठी में वक्ताओं ने बाबा रामदेवजी एवं वीर तेजाजी को राजस्थान की लोकआस्था के साथ-साथ सामाजिक समरसता और चेतना का महान स्तंभ बताया साथ ही इन लोकनायकों द्वारा समाज से छुआछूत, ऊंच-नीच के भेदभाव और अंधविश्वासों को समाप्त कर सर्वधर्म समभाव के संदेशों को उद्धृत किया गया। उन्होंने बताया कि वक्ताओं के अनुसार इन दोनों लोकनायकों का जीवन पथ भक्ति, कर्तव्यनिष्ठा, मानव सेवा और सामाजिक क्रांति का एक अनुपम मार्गदर्शक है।

समुत्कर्ष समिति के अध्यक्ष संजय कोठारी एवं सचिव विनोद चपलोत ने जानकारी देते हुए बताया कि गोष्ठी में वक्ताओं का अभिमत था कि रामदेवजी और तेजाजी का जीवन संदेश भक्ति के साथ-साथ मानव सेवा, नीति, जीव-दया और सामाजिक क्रांति का अनुपम मार्गदर्शक है। इन लोकनायकों की शिक्षाएं मध्यकाल की भांति आज के आधुनिक दौर में भी उतनी ही व्यावहारिक और प्रासंगिक हैं।

शिक्षाविद् पीयूष दशोरा ने कहा कि बाबा रामदेवजी ने ‘जम्मा जागरण’ और अपनी रचना ‘चौबीस प्रमाणियां’ द्वारा समाज से छुआछूत मिटाकर समरसता की नींव रखी वहीँ वीर तेजाजी का जीवन लाछां गूंजरी की गायों की रक्षा हेतु बलिदान, सत्य और सर्वोच्च वचनबद्धता का अमिट उदाहरण है। एक सर्प को दिए गए अपने वचन को निभाने के लिए मृत्यु के मुख में जाना उनकी अद्वितीय सत्यनिष्ठा को दर्शाता है।

विचार गोष्ठी के शुभारम्भ में मंगलाचरण का पाठ आर्य सत्यप्रिय ने किया वही डॉ.गोविन्द सिंह शक्तावत, विद्यासागर, डॉ अनिल दशोरा, संजय लूणावत एवं रश्मि मेहता ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के साहित्यिक सत्र में गरिमा खंडेलवाल ने ओजस्वी एवं भावपूर्ण काव्य पाठ कर लोकनायकों की महिमा का बखान किया l

समुत्कर्ष पत्रिका के उप संपादक गोविन्द शर्मा द्वारा ने ऑनलाइन जुड़े सभी संभागियों एवं वक्ताओं का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि गोष्ठी का यह विमर्श समाज को एक नई वैचारिक दिशा देगा। समुत्कर्ष विचार गोष्ठी का संचालन शिवशंकर खण्डेलवाल ने किया ।
इस विचार गोष्ठी में कविता शर्मा, अवनीश तिवारी, अरविंद सिंह सिसोदिया, मुकेश जैन, चैनशंकर दशोरा, गिरीश चौबीसा , रामेश्वर प्रसाद शर्मा, दिनेश बंसल, सुदर्शना भट्ट, डॉ जगदीश कुमावत, नर्बदा देवी तथा तरुण शर्मा सम्मिलित हुए।