चेक अनादरण के मामले में 1 वर्ष का कारावास, 3.54 लाख रुपए प्रतिकर का आदेश

चेक अनादरण के मामले में 1 वर्ष का कारावास, 3.54 लाख रुपए प्रतिकर का आदेश

घरेलू खर्च और कर्ज अदायगी के लिए लिए 3 लाख रुपए के बदले दिया था चेक, अपर्याप्त राशि के कारण हुआ बाउंस

चित्तौड़गढ़, स्मार्ट हलचल। विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट एनआई एक्ट प्रकरण की पीठासीन अधिकारी मेघना यादव ने चेक अनादरण के एक मामले में निर्णय सुनाते हुए अभियुक्त को एक वर्ष के कारावास तथा 3 लाख 54 हजार रुपए प्रतिकर से दंडित करने का आदेश दिया है।

मामले में परिवादी कन्हैयालाल तेली, निवासी ऐराल, जिला चित्तौड़गढ़ की ओर से अधिवक्ता जयदीप बिल्लु, अधिवक्ता विदुषी बिल्लु, अधिवक्ता मनोज शर्मा एवं अधिवक्ता गुड्डी कुमावत ने अभियुक्त श्यामलाल मीणा, निवासी बावड़ीखेड़ा, जिला चित्तौड़गढ़ के विरुद्ध परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत परिवाद न्यायालय में पेश किया था।

3 लाख रुपए उधार लेने के बाद दिया चेक

परिवादी कन्हैयालाल तेली ने न्यायालय में बताया कि अभियुक्त श्यामलाल मीणा ने घरेलू खर्च एवं कर्ज की अदायगी के लिए उनसे 3 लाख रुपए नगद उधार लिए थे। उधार राशि की अदायगी के लिए अभियुक्त ने भारतीय स्टेट बैंक, शाखा चित्तौड़गढ़ का चेक दिया था।

बाद में परिवादी ने जब राशि वापस मांगी तो अभियुक्त ने उक्त चेक को बैंक में प्रस्तुत करने के लिए कहा। परिवादी ने चेक अपने बैंक खाते में जमा कराया, लेकिन बैंक की ओर से ‘फंड्स इनसफीशिएंट’ यानी खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने की टिप्पणी के साथ चेक अनादरित होकर वापस हो गया।

नोटिस के बाद न्यायालय में पेश किया परिवाद

चेक बाउंस होने के बाद परिवादी की ओर से अधिवक्ता के माध्यम से अभियुक्त को उसके पते पर कानूनी नोटिस भेजा गया। इसके बाद न्यायालय में परिवाद पेश किया गया। सुनवाई के दौरान परिवादी कन्हैयालाल तेली के बयान दर्ज किए गए तथा संबंधित दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रदर्शित किए गए।

बचाव में चेक को लेकर नहीं कर सका प्रभावी साबित

सुनवाई के दौरान परिवादी के अधिवक्ताओं जयदीप बिल्लु, विदुषी बिल्लु एवं मनोज शर्मा ने न्यायालय के समक्ष तर्क प्रस्तुत किया कि चेक अभियुक्त की ओर से ही जारी किया गया था तथा उस पर किए गए हस्ताक्षर भी अभियुक्त के हैं, जिनको लेकर कोई विवाद नहीं है।

अधिवक्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि चेक के दुरुपयोग को लेकर अभियुक्त की ओर से परिवादी के खिलाफ किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। उनके अनुसार अभियुक्त यह साबित करने में भी असफल रहा कि चेक उसके द्वारा जारी नहीं किया गया था।

न्यायालय ने सुनाई सजा

मामले में विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट एनआई एक्ट प्रकरण की पीठासीन अधिकारी मेघना यादव ने परिवादी पक्ष की ओर से प्रस्तुत तर्कों को स्वीकार करते हुए परिवाद स्वीकार किया। न्यायालय ने अभियुक्त श्यामलाल मीणा को एक वर्ष के कारावास तथा 3 लाख 54 हजार रुपए प्रतिकर से दंडित करने का आदेश दिया।