इच्छाओं के जाल में फंसाता है लोभ, आत्मा की शुद्धि का मार्ग संयम

पर पदार्थों का संग्रह नहीं देता स्थायी सुख, लोभ आत्मा को करता है अपवित्र

लोभ के जाते ही आत्मा हो जाती है पवित्र, इच्छाओं के जाल से मुक्त होने का दिया संदेश

कोटा। स्मार्ट हलचल|मनुष्य जन्म के समय कुछ लेकर नहीं आता और मृत्यु के समय भी संसार की कोई वस्तु साथ नहीं ले जा सकता। इसके बावजूद जीवनभर पर पदार्थों को एकत्र करने की प्रवृत्ति में लगा रहता है। पर पदार्थों से प्राप्त सुख क्षणिक है, जबकि लोभ आत्मा को अपवित्र करने वाली प्रमुख कषाय है। 24 घंटे इच्छाएं मनुष्य से निरंतर कर्म करवाती रहती हैं और इन्हीं इच्छाओं के जाल में मनुष्य लोभ के कारण फंसता चला जाता है। लोभ समाप्त होते ही आत्मा की पवित्रता का मार्ग प्रशस्त होता है।
विज्ञाननगर जैन मंदिर महामंत्री अनिल ठौरा ने बताया कि कार्यक्रम में जैन सोशल ग्रुप चंबल सिटी की ओर से मुख्य शांति धारा की गई। पारसनाथ भगवान पर शांति धारा का सौभाग्य राजेंद्र पाटनी को प्राप्त हुआ। इसके अलावा प्रवीण जैन, त्रिलोक जैन, जीनेश सेठी, चेतन प्रकाश बंसल, पीके हरसोरा, पारस जैन, अनिल बाकलीवाल, विजय पाटौदी, आशीष जैसवाल, महावीर जैन, अरुण पांडेया, सुनील जैन, आवा मूलचंद जैन, मनोज टौगया, मनोज जैसवाल, विनोद बाहुबली, अनिल ठौरा, इंद्र कुमार जैन, बीरधी चंद जैन, अरविंद ठौरा एवं पदम हरसोरा सहित श्रद्धालुओं ने भी अभिषेक एवं शांति धारा में भाग लिया।

पुष्पदंत भगवान के कल्याण दिवस पर विशेष पूजन
मंदिर अध्यक्ष राजमल पाटौदी ने बताया कि पुष्पदंत भगवान के मुख्य कल्याण दिवस के अवसर पर सीताराम जैन एवं मनोरमा बाबरिया द्वारा विधि-विधान और भक्तिभाव के साथ पूजन कराया गया। इस अवसर पर निर्माण कांड का वाचन कर निर्माण मोदक अर्पित किया गया। मोदक चढ़ाने का सौभाग्य श्री अनिल एवं सुनीता ठौरा को प्राप्त हुआ।

भाव-वंदना और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
सायंकाल समेदशिखर की भाव-वंदना कराई गई। इसके बाद सामायिक एवं भक्तिभाव से आरती का आयोजन हुआ। रात्रि में समंती पाठशाला के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने उपस्थित समाजबंधुओं का मन मोह लिया और सभी ने कार्यक्रम की सराहना की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री महावीर अजमेरा तथा विशेष अतिथि राजमल पाटौदी, चैतन्य बंसल, राजेंद्र पाटनी, सुनील कासलीवाल, विजय पाटनी एवं कन्हैया लाल जैन उपस्थित रहे। धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में समाजबंधुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर धर्मलाभ लिया।