पान का बीड़ा, काला चश्मा और 33+23+4 सीटर बस…….

 

एक बेबाक राजनीतिक व्यंग्य # 16— आकाश शर्मा

चित्तौड़गढ़ l स्मार्ट हलचल|सांवलिया सेठ की पावन धरा मंडफिया पर जहाँ एक ओर जलझूलनी ग्यारस के पावन पर्व पर स्वयं भगवान श्री सांवलिया सेठ अपने भक्तों के दुखों का उद्धार करने और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए ठाठ-बाट से विशाल रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे… वहीं दूसरी ओर, ठीक उसी समय चित्तौड़गढ़ की इस रणबांकुरों वाली राजनीतिक धरती पर एक ऐसा महात्वाकांक्षी और अकल्पनीय ‘ब्रह्मांडीय नाटक’ मंचित होने जा रहा है, जिसे देखकर देवलोक के देवता भी चक्राकर सोच में पड़ जाएं !
​फर्क सिर्फ इतना सा है भगवान जहाँ अपनी रथयात्रा से भक्तों को भवसागर से ‘मुक्ति और दर्शन’ देने निकल रहे हैं, वहीं हमारे आधुनिक युग के ये राजनीतिक कर्णधार अपनी ही पार्टी के गायब और डगमगाते पार्षदों को अज्ञातवास की ‘सुरक्षित कैद’ से छुड़ाकर सत्ता की कुर्सी तक पहुँचाने की जुगत में पसीना बहा रहे हैं । एक तरफ प्रभु की रथयात्रा से आस्था जागृत हो रही है, तो दूसरी तरफ इस 33 सीटर बाड़ेबंदी एक्सप्रेस से लोकतंत्र की ऐसी धज्जियाँ उड़ रही हैं कि सियासत का हर एक खिलाड़ी बस अपने पाले की गोटी बचाने में जुटा है !”
​राजनीतिक अजूबे और किरदारों का लाइव एक्शन……
निकाय चुनावों की चौसर पर जीत का सेहरा सजने के बाद जो 33 नगीने, पार्षदगण अज्ञातवास की गहरी गुफाओं में गायब हो गए थे, वे अब एक भव्य 33 सीटर बस में सवार होकर प्रकट हो रहे हैं। इस बस के सारथी और मार्गदर्शक बने हैं मुकेश्या नंद महाराज, जिनकी छत्रछाया में यह बाड़ेबंदी की बारात भारी सुरक्षा के साये में चित्तौड़गढ़ नगर परिषद पहुँचेगी ।
भाजपा के सभापति पद के अधिकृत उम्मीदवार अनिल ईनाणी बस के अंदर बैठने के बजाय बस की छत पर विराजमान होकर ऐसा विजय उद्घोष करेंगे, मानो वे किसी रथ पर सवार होकर चित्तौड़गढ़ विजय करने निकले हों । मुँह में पान का बीड़ा और आँखों पर काला चश्मा चढ़ाए उनका यह तेवर देखने लायक होगा कसम से, ‘पुष्पा’ फिल्म का झुका नहीं साला वाला स्टाइल भी इसके आगे पानी कम चाय लगे ! दूसरी तरफ विपक्षी खेमें के सभापति पद पर कांग्रेस उम्मीदवार नगेन्द्र सिह राठौड़ नगर परिषद के भीतर पहले से ही डेरा डाले बैठे अपने 23 योद्धा और 4 अन्य जांबाज अपने तरकश में तीर सजाए इस महामुकाबले का इंतजार कर रहे होंगे ।
जिला और पुलिस प्रशासन का ‘इम्तिहान-ए-वक्त’……….
जब यह 33 सीटर बस भारी लाव-लश्कर और पुलिस सुरक्षा के बीच परिषद पहुँचेगी, तब पुलिस के पसीने इस बात पर छूटेंगे कि कहीं कोई पार्षद रास्ते में ‘तीर्थयात्रा’ के नाम पर फिर से पलटी न मार जाए । ​जब तक आखिरी वोट नहीं डल जाता और ये सभी जिस्म-ओ-जान अपनी-अपनी सुरक्षित पनाहगाहों में वापस नहीं लौट जाते, तब तक प्रशासन की धड़कनें किसी परमाणु रिएक्टर के अनियंत्रित तापमान जैसी ही रहेंगी।
​सांवलिया सेठ के मेले में तो भगवान भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं, लेकिन चित्तौड़गढ़ की इस राजनीति में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये 33-23-4 लोग किसकी मनोकामना पूरी करते हैं और किसकी लुटिया डुबोते हैं ! यहाँ भगवान रथ पर हैं और हमारे नेता बस की छत पर फर्क बस आस्था और अवसर का है ? अगला उप सभापति का अवसर किसे….दिनेश गवारिया,अविनाश शर्मा, सुदर्शन रामपुरिया….?????