जयशंकर ने वैश्विक कूटनीतिक मंच पर भारत की भूमिका को दी मजबूती

शाश्वत तिवारी

न्यूयॉर्क। स्मार्ट हलचल|संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र के दौरान न्यूयॉर्क पहुंचे विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक कूटनीतिक मंच पर भारत की भूमिका को और मजबूती दी है। अपने व्यस्त दौरे के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण बहुपक्षीय बैठकों को संबोधित किया और वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं कीं।
डॉ. जयशंकर ने यूएन हाई-लेवल वीक के दौरान आयोजित पहली ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज़्म, इंटरनेशनल लॉ, पीस एंड प्रॉस्पेरिटी’ (पी4एम) समिट को संबोधित किया। शिखर सम्मेलन में भारत ने बहुपक्षवाद को पुनर्जीवित करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति प्रतिबद्धता पर जोर दिया। विदेश मंत्री जयशंकर ने वैश्विक शांति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए सभी देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और वैश्विक संस्थाओं में समयबद्ध सुधार की आवश्यकता को रेखांकित किया।
इसी दौरे के बीच एक और ऐतिहासिक कूटनीतिक मील का पत्थर तब स्थापित हुआ, जब विदेश मंत्री ने वी4+भारत विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया। विसेग्राड समूह – वी4, जिसमें मध्य यूरोपीय देश चेक गणराज्य, हंगरी, पोलैंड और स्लोवाकिया शामिल हैं, के साथ भारत की यह पहली औपचारिक विदेश मंत्री स्तर की बैठक थी। बैठक में भारत और मध्य यूरोप के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने की रणनीतिक रूपरेखा तैयार की गई।
विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, डॉ. जयशंकर ने पी4एम समिट में कहा ईंधन, भोजन, उर्वरक और वित्त (4एफ) के संकट को यूं ही नहीं छोड़ा जा सकता। जहां नई क्षमताएं और चिंताएं पैदा होती हैं, वहां फ्रेमवर्क और सुरक्षा उपायों की बहुत मज़बूत ज़रूरत होती है। जहां महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रभुत्व और व्यवधान का खतरा हो, वहां जोखिम कम करने और विविधता लाने को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। बहुपक्षवाद को सबसे अच्छी तरह से तब आगे बढ़ाया जा सकता है, जब अंतरराष्ट्रीय कानूनों, नियमों और मानदंडों का सख्ती से पालन किया जाए।
विदेश मंत्रालय ने कहा वी4+भारत बैठक विदेश मंत्रियों के स्तर पर भारत और विसेग्राड समूह के बीच जुड़ाव स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी। यह प्रारूप बातचीत और सहयोग के लिए एक अतिरिक्त मंच प्रदान करता है, जो वी4 देशों के साथ भारत के लंबे समय से चले आ रहे और ठोस संबंधों को और मजबूत करता है।
इस दौरान डॉ. जयशंकर ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा से मुलाकात की और भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) के रणनीतिक संबंधों, मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की प्रगति तथा वैश्विक भू-राजनीतिक मुद्दों पर सार्थक चर्चा की। इसके साथ ही, विदेश मंत्री ने दुनिया के कई अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और अपने समकक्षों के साथ भी बैठकें कीं।