डिजिटल इंडिया और स्वच्छता अभियान को मुंह चिढ़ाती तस्वीरें: गुरलां ग्राम पंचायत में बेजुबान खा रहे प्लास्टिक, आखिर कौन है इसका जिम्मेदार?

गुरलां (भीलवाड़ा)। स्मार्ट हलचल|ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के दावों के बीच गुरलां ग्राम पंचायत से एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया और स्वच्छता अभियान को पूरी तरह ठेंगा दिखाती यह ग्राउंड रियलिटी स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। सफाई के नाम पर कागजों में करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद जमीनी स्तर पर हर तरफ सिर्फ गंदगी का साम्राज्य फैला हुआ है।

*बेजुबानों की जिंदगी से सरेआम खिलवाड़*

सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा मवेशी अक्सर भूख मिटाने के चक्कर में इन कचरा डिपो और रास्तों पर मुंह मारने को मजबूर हैं। कचरे के निस्तारण की सही व्यवस्था न होने के कारण आवारा पशु चारे की तलाश में भारी मात्रा में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक, पॉलीथिन और जहरीला कचरा निगल रहे हैं। पेट में प्लास्टिक जमा होने के कारण कई बेजुबान अकाल मृत्यु का शिकार हो रहे हैं। बेजुबानों की जिंदगी के साथ हो रहा यह खिलवाड़ प्रशासन की घोर लापरवाही को बयां करता है।

*बदबू और बीमारियों का घर बना गांव, फैल रहा संक्रमण*

पेड़ के नीचे, रास्तों और पत्थरों के आस-पास महीनों से फैला यह सड़ता हुआ कचरा न केवल गांव के दृश्य को खराब कर रहा है, बल्कि भीषण बदबू का कारण भी बन चुका है। डंपिंग यार्ड न होने और नियमित उठाव न होने के कारण यह जगह अब मच्छरों और संक्रामक बीमारियों का गढ़ बन चुकी है। मौसम के बदलते मिजाज के बीच इस गंदगी के कारण ग्रामीणों में संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

*सफाई के नाम पर करोड़ों का बजट, फिर ग्राउंड पर क्यों है कचरा?*

ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में सफाई व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर सरकार द्वारा लाखों-करोड़ों रुपए का बजट जारी किया जाता है। लेकिन हकीकत यह है कि ग्राम पंचायत में सप्ताह में एक दिन भी ढंग से सफाई नहीं हो रही है। ऐसे में जनता यह पूछने पर मजबूर है कि क्या स्वच्छता का यह पैसा धरातल पर लगने के बजाय सीधे जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की भेंट चढ़ रहा है?

*नालियां चोक, रास्तों में भरा पानी, राहगीर परेशान*

गांव की नालियों की स्थिति और भी बदतर है। नालियों में गंदगी इस कदर ठसाठस भरी है कि नालियां पूरी तरह चोक हो चुकी हैं और गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। रास्ते पानी और कीचड़ से लबालब भरे हुए हैं, जिससे वहां से गुजरने वाले आम राहगीरों और वाहनों पर कीचड़ के छींटे उड़ रहे हैं। इस अव्यवस्था से आम जनता में भारी रोष है, लेकिन गुरलां ग्राम पंचायत प्रशासन कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है।

*जनता का सवाल- “आखिर कब जागेगा प्रशासन और कब होगी सफाई?”*

ग्रामीणों का कहना है कि समस्या को लेकर कई बार ध्यान आकर्षित कराया जा चुका है, लेकिन अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। अब देखना यह है कि स्वच्छ राजस्थान का दावा करने वाला पंचायती राज विभाग इस बदहाली पर क्या एक्शन लेता है या फिर गुरलां की जनता को यूं ही नरकीय जीवन जीने के लिए छोड़ दिया जाएगा। I