अनंत चतुर्दशी पर दिगम्बर जैन समाज ने मनाया उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म

अनिल कुमार खींची

वासुपूज्य भगवान के मोक्ष कल्याणक पर चढ़ाया निर्वाण मोदक, जिनालयों में हुए विशेष धार्मिक आयोजन

ब्यावर। स्मार्ट हलचल |दिगम्बर जैन समाज के दस दिवसीय दशलक्षण महापर्व का समापन अनंत चतुर्दशी के अवसर पर उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा-अर्चना, अभिषेक एवं धार्मिक आयोजनों के साथ हुआ। शहर के विभिन्न जिनालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। समाजजनों ने भगवान के दर्शन, अभिषेक एवं पूजन कर धर्मलाभ लिया। इस दौरान शहर का वातावरण धर्ममय और भक्तिमय बना रहा।अनंत चतुर्दशी पर भगवान वासुपूज्य के मोक्ष कल्याणक को श्रद्धापूर्वक मनाया गया। विभिन्न जिनालयों में विशेष पूजन-अभिषेक के बाद निर्वाण मोदक अर्पित किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान के चरणों में श्रद्धा समर्पित कर परिवार एवं समाज की सुख-शांति और समृद्धि की मंगलकामना की।नसिया में स्वर्ण-रजत कलशों से अभिषेक: सेठ चम्पालाल रामस्वरूप की नसिया में विशेष धार्मिक आयोजन हुए। ट्रस्टी अनिल जी रानीवाला एवं रानीवाला परिवार द्वारा स्वर्ण एवं रजत कलशों से श्रीजी का अभिषेक किया गया। मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ हुए अभिषेक के दौरान जिनालय का वातावरण भक्तिमय हो गया।

आदिनाथ जिनालय में कासलीवाल परिवार ने किया अभिषेक: आदिनाथ जिनालय में मनोज कुमार, धीरज कुमार, रोनक, रोनित, मनन एवं पुण्यम कासलीवाल परिवार को रजत कलशों से श्रीजी का अभिषेक करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। परिवार के सदस्यों ने विधि-विधान से अभिषेक कर पूजा-अर्चना की। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

ब्रह्मचर्य को बताया आत्मशुद्धि का मार्ग: धर्मसभा में पंडितजी शास्त्री ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की महत्ता बताते हुए कहा कि ब्रह्मचर्य संयम, सदाचार और आत्मिक शुद्धि का आधार है। उन्होंने कहा कि संयमित जीवन व्यक्ति को इंद्रियों पर नियंत्रण रखने और अपने लक्ष्य के प्रति एकाग्र रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने दशलक्षण धर्म के सिद्धांतों को केवल पर्व तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

जिनालयों में हुआ संगीतमय भक्तामर पाठ: शाम को श्री दिगम्बर जैन पंचायती नसियांजी, पार्श्वनाथ जिनालय, आदिनाथ जिनालय सहित विभिन्न जिनालयों में रिद्धि-सिद्धि भक्तामर पाठ का संगीतमय आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने भक्तामर स्तोत्र का पाठ कर भगवान की आराधना की। धार्मिक भजनों से जिनालयों का वातावरण भक्तिमय हो उठा। इसके बाद भगवान की आरती की गई, जिसमें बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए।

दशलक्षण महापर्व के दौरान उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन और ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना की गई। अनंत चतुर्दशी पर महापर्व के समापन के साथ समाजजनों ने दसों धर्मों के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने तथा संयम, त्याग, तप, सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।