अवैध बजरी परिवहन मामले में 112 पुलिस वाहन चालक को पकड़े जाने के बाद उठे सवाल-डीएसटी की कार्रवाई में बजरी की पांच ट्रैक्टर-ट्रॉलियां जब्त

एफआईआर में पूछताछ के दौरान ट्रैक्टर मालिकों के नाम सामने आने का उल्लेख; 112 वाहन चालक की गिरफ्तारी दर्ज नहीं होने सहित कई बिंदु जांच के दायरे में

शिवराज बारवाल मीना
टोंक/अलीगढ़। स्मार्ट हलचल|उनियारा सर्किल अन्तर्गत अलीगढ़ थाना क्षेत्र में अवैध बजरी परिवहन को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बीच जिला पुलिस अधीक्षक टोंक रोशन मीना (आईपीएस) के निर्देश पर जिला स्पेशल टीम (DST) द्वारा की गई कार्रवाई के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। शुक्रवार, 25 सितंबर की अल सुबह (सूर्योदय) समय चोरू-चौथ का बरवाड़ा रोड चोरू तन क्षेत्र में हुई कार्रवाई के संबंध में अलीगढ़ थाना पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर संख्या 171/2026 में थाने के 112 पुलिस वाहन चालक राजीव उर्फ गोलू मीणा निवासी लसाड़िया को मौके से पकड़े जाने का उल्लेख है। पुलिस दस्तावेजों के अनुसार कार्रवाई के दौरान पांच ट्रैक्टर-ट्रॉलियां अवैध बजरी से भरी हुई मिलीं। एफआईआर में पूछताछ के दौरान 112 वाहन चालक द्वारा पांच ट्रैक्टरों के मालिकों के नाम बताए जाने का भी उल्लेख किया गया है। पुलिस ने पांचों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को जब्त कर अलीगढ़ थाने पर खड़ा करवाया।
*एफआईआर में पांच ट्रैक्टरों की जानकारी दर्ज*
एफआईआर के अनुसार पूछताछ में पांच ट्रैक्टरों के मालिकों के संबंध में नाम सामने आए। संबंधित ट्रैक्टरों के मॉडल, इंजन नंबर और चेसिस नंबर भी पुलिस दस्तावेज में दर्ज किए गए हैं। हालांकि प्रकरण में अज्ञात चालकों एवं मालिकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार एफआईआर संख्या 171/2026 थाना अलीगढ़ पर मामले में धारा 303(2), 112(2) BNS तथा 4/21 MMDR Act के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। मामले की जांच उनियारा थानाधिकारी ओम कंवर, पुलिस निरीक्षक को सौंपी गई है।
*112 वाहन चालक की गिरफ्तारी दर्ज नहीं होने सहित कई सवाल*
मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि 112 पुलिस वाहन चालक को डीएसटी टीम द्वारा मौके से पकड़ा गया था, तो उसकी गिरफ्तारी की स्थिति क्या है और उसके विरुद्ध तत्काल कौन-सी वैधानिक कार्रवाई की गई। क्या उसके पास से अवैध चौथ वसूली एंट्री राशि भी जप्त की गई है। इस संबंध में पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड एवं जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि 112 पुलिस वाहन चालक राजीव उर्फ गोलू मीणा कथित रूप से अवैध बजरी परिवहन से जुड़े लोगों के संपर्क में था या नहीं और यदि था तो स्थानीय थाना पुलिस को इसकी जानकारी थी या नहीं।
*पांच ट्रैक्टर मौके पर मिले-चालक भागे*
एफआईआर में उल्लेख है कि नाकाबंदी के दौरान पांच बजरी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दिखाई दीं। पुलिस के अनुसार चार ट्रैक्टरों के चालक वाहन छोड़कर मौके से भाग गए, जबकि एक ट्रैक्टर चालक वाहन लेकर आगे बढ़ा और सड़क किनारे कच्चे रास्ते में फंस गया। इसके बाद चालक ट्रैक्टर-ट्रॉली छोड़कर भाग गया। अब जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि इन वाहनों के चालक कौन थे तथा एफआईआर में पूछताछ के दौरान सामने आए वाहन मालिकों और मौके से फरार चालकों के बीच क्या संबंध था।
*थाने की सरकारी बोलेरो और पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच का विषय*
मामले में अलीगढ़ थाने की सरकारी बोलेरो के चालक कांस्टेबल नवरत्न चौधरी का नाम भी कथित रूप से चर्चा में आने की जानकारी सामने आई है। हालांकि उनकी भूमिका अथवा किसी प्रकार की मिलीभगत के संबंध में फिलहाल कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसी प्रकार थानाधिकारी अलीगढ़ राजकुमार चौधरी, पुलिस निरीक्षक सहित अन्य पुलिसकर्मियों की कथित भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों की पुष्टि भी आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकती है। पुलिस के 112 वाहन चालक की गिरफ्तारी दर्ज नहीं होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि गिरफ्तारी की वास्तविक स्थिति पुलिस रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी। अवैध बजरी परिवहन से जुड़े लोगों से कथित वसूली अथवा पुलिस वाहन के कथित इस्तेमाल संबंधी आरोप भी सामने आए हैं, लेकिन इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
*CCTV और GPS रिकॉर्ड व कॉल डिटेल से सामने आ सकता है सच*
मामले में पुलिस थाने के CCTV फुटेज, 112 वाहन के GPS रिकॉर्ड, ड्यूटी रजिस्टर, रोजनामचा, वाहन संचालन रिकॉर्ड, मोबाईल सीडीआर तथा उपलब्ध वैध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इन रिकॉर्ड से यह पता लगाया जा सकता है कि संबंधित 112 वाहन निर्धारित ड्यूटी पर कहां-कहां गया, वाहन का वास्तविक संचालन किसने किया तथा कार्रवाई वाले दिन वाहन की लोकेशन क्या थी। यदि 112 वाहन का इस्तेमाल अवैध बजरी परिवहन से जुड़े लोगों से कथित वसूली के लिए किए जाने का आरोप है, तो GPS, CCTV और ड्यूटी रिकॉर्ड जैसे साक्ष्य इस आरोप की पुष्टि अथवा खंडन करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
*निष्पक्ष जांच से स्पष्ट होगी वास्तविक भूमिका*
पूरे मामले में जांच एजेंसी द्वारा 112 वाहन के GPS एवं CCTV रिकॉर्ड, ड्यूटी रजिस्टर, रोजनामचा, कॉल डिटेल सहित वैध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, जब्त ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज तथा संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ को जांच में शामिल किया जाना महत्वपूर्ण होगा। इन तथ्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि 112 पुलिस वाहन चालक की वास्तविक भूमिका क्या थी और क्या उसका अवैध बजरी परिवहन से कोई संगठित संबंध था।