जिन सीढ़ियों से रोज बढ़े कदम, विदाई पर उन्हीं को नमन कर भावुक हुए कुलगुरू प्रो. सारस्वत”
13 माह 18 दिन का कार्यकाल बना विश्वविद्यालय के इतिहास का यादगार अध्याय, राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलगुरु के रूप में संभालेंगे नई जिम्मेदारी
राहुल पारीक
कोटा। स्मार्ट हलचल|कोटा विश्वविद्यालय में शनिवार का दिन भावुक विदाई का साक्षी बना। कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत के राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के कुलगुरु के रूप में नई जिम्मेदारी संभालने के लिए रवाना होने से पहले विश्वविद्यालय परिसर में विदाई का माहौल रहा। उनके प्रस्थान के समय अनेक प्रोफेसरों, शिक्षकों और कार्मिकों की आंखें नम थीं। स्वयं प्रो. सारस्वत भी भावुक नजर आए।
अपने कार्यकाल के दौरान विश्वविद्यालय में उच्च आदर्शों, अनुशासन और अकादमिक प्रतिबद्धता को प्राथमिकता देने वाले प्रो. सारस्वत ने रवाना होने से पहले विश्वविद्यालय परिवार से आत्मीय मुलाकात की। विदाई के क्षणों में भावनाओं का ऐसा संगम रहा कि लंबे समय तक साथ काम करने वाले शिक्षक और कार्मिक उन्हें विदा करते हुए अपने भाव रोक नहीं सके।
विश्वविद्यालय की सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए सामने वही सीढ़ियां थीं, जिनसे वे पिछले 13 माह 18 दिन तक प्रतिदिन अपने दायित्वों को निभाने के लिए गुजरते रहे थे। उन्होंने उन सीढ़ियों को नमन किया। यह केवल सीढ़ियों के प्रति सम्मान नहीं था, बल्कि उस विश्वविद्यालय के प्रति कृतज्ञता का भाव था, जिसने उनके कार्यकाल के अनेक महत्वपूर्ण क्षणों को अपने भीतर समेटा है।
उस क्षण वातावरण पूरी तरह भावुक हो उठा। कई आंखों में आंसू थे और चेहरों पर विदाई की उदासी साफ दिखाई दे रही थी। प्रो. सारस्वत भी इस भावनात्मक क्षण से अछूते नहीं रहे। कुछ क्षण पहले तक प्रशासनिक दायित्वों में दृढ़ दिखाई देने वाला व्यक्तित्व विदाई के समय भावनाओं से भरा नजर आया। उन्होंने पीछे मुड़कर विश्वविद्यालय की ओर देखा और फिर अपनी कार की ओर बढ़ गए। मानो एक अध्याय पीछे छूट रहा था और सामने एक नई जिम्मेदारी उनका इंतजार कर रही थी।
कोटा विश्वविद्यालय में प्रो. सारस्वत का 13 माह 18 दिन का कार्यकाल अब विश्वविद्यालय के इतिहास का हिस्सा बन चुका है। इस अवधि में उनके नेतृत्व में किए गए कार्यों की सूची लंबी है। विश्वविद्यालय के अकादमिक विकास, प्रशासनिक व्यवस्था, शोध, नवाचार और विभिन्न संस्थागत गतिविधियों को गति देने के प्रयास उनके कार्यकाल की प्रमुख विशेषताओं में रहे।
दिलचस्प बात यह है कि कोटा विश्वविद्यालय में उनके कार्यकाल की निर्धारित अवधि में अभी 22 माह 13 दिन शेष थे, लेकिन नियति ने उनके लिए एक नई जिम्मेदारी तय कर दी। अब वे राजस्थान विश्वविद्यालय की बागडोर संभालने जयपुर जा रहे हैं। कोटा विश्वविद्यालय परिवार के लिए यह विदाई केवल एक कुलगुरु के प्रस्थान का अवसर नहीं, बल्कि ऐसे कार्यकाल के समापन का क्षण है, जिसकी स्मृतियां लंबे समय तक विश्वविद्यालय से जुड़े लोगों के साथ रहेंगी।