जिनालयों में अभिषेक-पूजन, तपस्वी श्रावक-श्राविकाओं का सम्मान
अनिल कुमार खींची
ब्यावर। स्मार्ट हलचल|दिगंबर जैन समाज के दस दिवसीय दशलक्षण महापर्व का समापन रविवार को क्षमावाणी पर्व के साथ श्रद्धा और भक्तिभाव से हुआ। शहर के विभिन्न जिनालयों में विशेष धार्मिक आयोजन हुए। श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेंद्र का अभिषेक-पूजन कर सुख-शांति एवं आत्मकल्याण की कामना की।श्री दिगंबर जैन पंचायती नसियां में आयोजित कार्यक्रम में विद्वान शास्त्री ने क्षमावाणी पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दशलक्षण महापर्व आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का पर्व है। क्षमा व्यक्ति को क्रोध, अहंकार और द्वेष का त्याग कर सभी के प्रति मैत्रीभाव रखने की प्रेरणा देती है।महापर्व के दौरान उपवास एवं विभिन्न प्रकार की तपस्या करने वाले श्रावक-श्राविकाओं का सम्मान किया गया। तपस्वियों को तिलक, माला, साफा एवं शाल ओढ़ाकर अभिनंदन किया गया। समाजजनों ने तपस्वियों की साधना की अनुमोदना की।
क्षमावाणी पर्व के अवसर पर समाजजनों ने परस्पर ‘उत्तम क्षमा’ कहते हुए जाने-अनजाने में हुई भूलों के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांगी। इस दौरान लोगों ने आपसी मनमुटाव एवं कटुता भुलाकर प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि क्षमा से मन का बोझ हल्का होता है और रिश्तों में आत्मीयता एवं मधुरता बढ़ती है।