आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान की पहल पर परिजनों ने दी सहमति, 35 वर्षीय संजय के नेत्रदान हुआ सम्पन्न
कोटा।स्मार्ट हलचल|वीर सावरकर क्षेत्र निवासी 35 वर्षीय संजय महावर के निधन के बाद शोकाकुल परिवार ने नेत्रदान का निर्णय लेकर मानवीय संवेदना की मिसाल पेश की। आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान (ईबीएसआर) की ओर से परिजनों की सहमति से नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न कराई गई।
आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान के अध्यक्ष के.के. कंजोलिया ने बताया कि संजय महावर के निधन की सूचना मिलने के बाद संस्था की ओर से परिजनों से संपर्क किया गया। उनके भाई नरेंद्र महावर और रामचंद्र महावर की सहमति के बाद नेत्रदान की प्रक्रिया के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं।
संस्था के सचिव सुरेश सेडवाल ने बताया कि संजय महावर का न्यू मेडिकल कॉलेज में ब्रेन हेमरेज के कारण निधन हुआ था। सूचना मिलने के बाद संस्था के टेक्नीशियन टिंकू ओझा ने परिजनों से समन्वय कर दोपहर में नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की।
परिजनों के अनुसार संजय महावर दो भाइयों और दो बहनों में से एक थे तथा अपनी माता के साथ रहते थे। उनके निधन से परिवार में शोक का माहौल है, लेकिन इस कठिन समय में परिजनों द्वारा नेत्रदान की सहमति देना दूसरों के जीवन में रोशनी की उम्मीद जगाने वाला कदम है।
शोक के बीच संजय महावर का नेत्रदान, दो लोगों के जीवन में लौट सकती है रोशनी
आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान की पहल पर परिजनों ने दी सहमति, 35 वर्षीय संजय के नेत्रदान हुआ सम्पन्न
कोटा। वीर सावरकर क्षेत्र निवासी 35 वर्षीय संजय महावर के निधन के बाद शोकाकुल परिवार ने नेत्रदान का निर्णय लेकर मानवीय संवेदना की मिसाल पेश की। आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान (ईबीएसआर) की ओर से परिजनों की सहमति से नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न कराई गई।
आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान के अध्यक्ष के.के. कंजोलिया ने बताया कि संजय महावर के निधन की सूचना मिलने के बाद संस्था की ओर से परिजनों से संपर्क किया गया। उनके भाई नरेंद्र महावर और रामचंद्र महावर की सहमति के बाद नेत्रदान की प्रक्रिया के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं।
संस्था के सचिव सुरेश सेडवाल ने बताया कि संजय महावर का न्यू मेडिकल कॉलेज में ब्रेन हेमरेज के कारण निधन हुआ था। सूचना मिलने के बाद संस्था के टेक्नीशियन टिंकू ओझा ने परिजनों से समन्वय कर दोपहर में नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की।
परिजनों के अनुसार संजय महावर दो भाइयों और दो बहनों में से एक थे तथा अपनी माता के साथ रहते थे। उनके निधन से परिवार में शोक का माहौल है, लेकिन इस कठिन समय में परिजनों द्वारा नेत्रदान की सहमति देना दूसरों के जीवन में रोशनी की उम्मीद जगाने वाला कदम है।