वनवासी कल्याण आश्रम के केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक में प्रस्ताव पारित, पाठ्यक्रमों में मानगढ़ के इतिहास को शामिल करने की भी मांग
भीलवाड़ा। मूलचन्द पेसवानी
स्मार्ट हलचल।मानगढ़ धाम को अविलंब राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग को लेकर अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम ने आवाज बुलंद की है। भीलवाड़ा के रामेश्वरम भवन में चल रही संगठन की केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक में आज इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया गया। संगठन ने केंद्र सरकार से मानगढ़ धाम के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के अनुरूप संरक्षण और विकास सुनिश्चित करने की मांग भी की है।
बैठक के बाद आयोजित पत्रकार वार्ता में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने प्रस्ताव की जानकारी देते हुए कहा कि 17 नवंबर 1913 को वागड़ क्षेत्र में संत गोविंद गुरु के नेतृत्व में चल रहे भगत आंदोलन को दबाने के लिए ब्रिटिश शासन ने मानगढ़ धाम में गोलीकांड किया था। संगठन के अनुसार इस घटना में बड़ी संख्या में जनजातीय महिला, पुरुष और बच्चे मारे गए थे।
वनवासी कल्याण आश्रम ने मानगढ़ गोलीकांड को जनजातीय समाज के स्वतंत्रता संघर्ष और बलिदान का महत्वपूर्ण अध्याय बताते हुए कहा कि यह घटना जलियांवाला बाग हत्याकांड से छह वर्ष पूर्व हुई थी। संगठन का कहना है कि मानगढ़ की घटना को राष्ट्रीय स्तर पर उचित ऐतिहासिक पहचान मिलना आवश्यक है।
भगत आंदोलन ने जगाई थी सामाजिक चेतना–
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि संत गोविंद गुरु के नेतृत्व में भगत आंदोलन ने अंग्रेजी शासन के दमनकारी कानूनों के खिलाफ जनजागरण के साथ-साथ जनजातीय समाज की संस्कृति, आस्था और जीवन मूल्यों को भी जागृत किया। मानगढ़ की घटना के बाद राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के जनजातीय क्षेत्रों में अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष की चेतना और व्यापक हुई।
प्रस्ताव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 1 नवंबर 2022 को मानगढ़ धाम पहुंचकर बलिदानी जनजातीय समाज को श्रद्धांजलि देने तथा राष्ट्रपति के 4 अक्टूबर 2024 को मानगढ़ धाम पहुंचकर बलिदानियों को नमन करने का उल्लेख भी किया गया।
संगठन ने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग भी मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में मान्यता देने की सिफारिश कर चुका है। ऐसे में केंद्र सरकार को मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर उसके संरक्षण एवं विकास के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
पाठ्य-पुस्तकों में मिले मानगढ़ को स्थान–
वनवासी कल्याण आश्रम ने राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश सरकारों से स्कूल एवं कॉलेजों की पाठ्य-पुस्तकों में मानगढ़ के इतिहास को उचित स्थान देने का आग्रह किया। संगठन का कहना है कि जनजातीय समाज के स्वतंत्रता संघर्ष और बलिदान की गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। केंद्रीय कार्यकारी मंडल ने सामाजिक-धार्मिक नेताओं और जनप्रतिनिधियों से भी अपील की कि मानगढ़ के ऐतिहासिक महत्व से जुड़े विषय को राजनीतिक या अन्य मतभेदों से ऊपर उठकर सामूहिक प्रयास के रूप में आगे बढ़ाया जाए।
350 से अधिक पदाधिकारी ले रहे हिस्सा-
वनवासी कल्याण आश्रम की केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक 30 सितंबर से प्रारंभ हुई। इसके बाद 2 एवं 3 अक्टूबर को देशभर के प्रांत पदाधिकारियों की व्यापक बैठक भीलवाड़ा के रामेश्वर भवन में आयोजित की जा रही है, जिसमें 350 से अधिक पदाधिकारी शामिल हो रहे है।
इससे पहले अखिल भारतीय वनवासी कार्यकर्ता सम्मेलन का उद्घाटन जगतगुरु निंबार्काचार्य पीठाधीश्वर श्रीजी महाराज ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान वनवासी समाज के साथ आत्मीय संबंध स्थापित किए, उसी प्रकार वनवासी कल्याण आश्रम वनवासी समाज को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कार्य कर रहा है।
राष्ट्रीय महामंत्री योगेश बापट ने संगठन की ओर से वनवासी समाज के लिए किए जा रहे विभिन्न कल्याणकारी कार्यों की जानकारी दी।
पत्रकार वार्ता में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तेची गुबिन, संयुक्त महामंत्री विष्णुकांत, राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद के अध्यक्ष डॉ. थावरचंद डामोर, प्रचार प्रमुख प्रमोद पेठकर तथा बैठक के मीडिया एवं प्रचार-प्रसार संयोजक कैलाश सोनी मौजूद रहे।
बैठक की तैयारियों को अंतिम रूप् देने में रामप्रकाश अग्रवाल, ज्ञानचंद जैन, दुर्गालाल सोनी, नरेश ओझा, महावीर सोनी, अनीता काबरा, गणेश काबरा, कैलाश नंदावत, दिवाकर जावा, गुणमाला अग्रवाल, महेश खंडेलवाल, कन्हैयालाल मूंदड़ा, यश श्रीवास्तव, कमल गोखरू, तरुणा शर्मा, ओमप्रकाश अग्रवाल, भागचंद बाहेती, पदम जैन, दीपक पुरोहित, सर्वेश्वर कल्याण सहित अनेक कार्यकर्ता जुटे।