राजस्व रिकॉर्ड से खिलवाड़ और भू-माफियाओं का मकड़जाल

चित्तौड़गढ़ में कब्रिस्तान और रास्तों की जमीन पर सुनियोजित अतिक्रमण……………

खोजी रिपोर्ट – आकाश शर्मा

चित्तौड़गढ़ ।स्मार्ट हलचल।चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय के राजस्व इतिहास में एक ऐसा गंभीर प्रकरण सामने आया है, जो प्रशासनिक तंत्र की पारदर्शिता और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है। ग्राम चित्तौड़गढ़ की साबिक आराजी नंबर 979/मी. और 978/मी., जो कि मूल रूप से जनहित, सार्वजनिक उपयोग और धार्मिक भावना से जुड़ी कब्रिस्तान व रास्तों की भूमि थी, उसे सैटलमेंट के पश्चात नवीन आराजी नंबर 1702 (रकबा 0.26 हेक्टेयर) के रूप में दर्ज किया गया था । लेकिन रसूखदार निजी व्यक्तियों को अवैध लाभ पहुँचाने के लिए इस भूमि के रिकॉर्ड में जो हेरफेर की गई, वह प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा है ।

इस गंभीर प्रकरण के मुख्य बिंदु-

रिकॉर्ड में अवैध काट-छाँट – बिना किसी सक्षम न्यायालय या प्राधिकृत अधिकारी के वैध आदेश के, राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज ‘कब्रिस्तान व रास्ता’ की प्रविष्टि को हटाकर चुपचाप ‘सिनेमा’ के नाम पर दर्ज कर दिया गया।

संवत 2036 के रिकॉर्ड की गवाही- ग्राम चित्तौड़गढ़ के राजस्व अभिलेख (संवत 2036 के मिलान खसरे) इस बात के पुख्ता गवाह हैं कि उक्त भूमि हमेशा से कब्रिस्तान और सार्वजनिक रास्ते के नाम पर दर्ज चली आ रही थी।

कानून की सरेआम धज्जियां – कानूनी प्रावधानों के अनुसार, सार्वजनिक हित, रास्तों और कब्रिस्तानों के लिए आरक्षित भूमि का किसी भी निजी व्यक्ति के पक्ष में आवंटन, नियमन या उपयोग-उपभोग परिवर्तन पूर्णतः प्रतिबंधित और गैर-कानूनी है।
भ्रष्टाचार और मिलीभगत – तत्कालीन समय के कुछ भ्रष्ट राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों ने भू-माफियाओं के साथ मिलकर बिना किसी उचित वैधानिक प्रक्रिया के यह कारनामा अंजाम दिया, जो कि पूरी तरह विधि-विरुद्ध और आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है।

निष्पक्ष उच्चस्तरीय जाँच*

एक ओर जहाँ शासन आम जनता को न्याय और पारदर्शी प्रशासन देने का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर इस प्रकार के मामले सरकारी तंत्र के भीतर छिपे उन तत्वों को बेनकाब करते हैं जो निजी स्वार्थ के लिए सार्वजनिक संपत्तियों को खुर्द-बुर्द करने से बाज नहीं आते। कब्रिस्तान और रास्तों जैसी संवेदनशील और अति-आवश्यक सार्वजनिक संपत्तियों पर इस तरह का डाका डालना न केवल जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ है, बल्कि कानून के शासन को खुली चुनौती भी है।
यह प्रकरण सिर्फ एक खसरे का फेरबदल नहीं है, बल्कि यह इस बात की बानगी है कि कैसे मिलीभगत से सरकारी दस्तावेजों को बदला जाता है। अब समय आ गया है कि शासन-प्रशासन इस खुलासे का संज्ञान ले, संवत 2036 से लेकर अब तक के तमाम पत्रावलियों की स्वतंत्र व उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए, और रिकॉर्ड में अवैध फेरबदल करने वाले दोषियों तथा अनुचित लाभ उठाने वाले भू-माफियाओं के खिलाफ कठोरतम वैधानिक कार्रवाई की जाए ।  गौरतलब हैं वर्तमान नगर परिषद आयुक्त पूर्व में रास्तो व नालों से अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही को अंजाम दे चुके हैं लेकिन रसूख के काबिज अतिक्रमण को देखा तक नहीं और तो और रसूख को पट्टा तक जारी कर दिया l

बने रहें हमारे साथ… जल्द बेनकाब होंगे इस खेल के असली चेहरे  !

यूआईटी और भू-माफियाओं का बड़ा खेल ! …………..शहर के मास्टर प्लान में बताये गयें भू उपयोग के अनुसार कृषि भूमि का अकृषि में परिवर्तन किए बिना मास्टर प्लान के विरुद्ध 90-A और योजनाओं का अनुमोदन धड़ल्ले से किया जा रहा है। जिन अवैध योजनाओं को सील किया गया था, उन्हें अब भू-माफियाओं के प्रभाव में आकर फिर से बहाल किया जा रहा है। सबूत खुद ही गवाही दे रहा है चामटी खेड़ा गांव (कंडारा वाली जमीन) की यूआईटी पत्रावली इसका खुला प्रमाण है । जल्द आ रहा हैं………..