- कम क्रेडिट स्कोर (700 से कम) होना।
- पुराने ऋणों या क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान समय पर न करना।
- एक साथ कई बैंकों में लोन की पूछताछ (हार्ड इंक्वायरी) करना।
- GST रिटर्न, ITR और बैंक स्टेटमेंट के आंकड़ों में मेल न होना।
- दस्तावेजों (PAN, आधार, बिजनेस प्रूफ) में नाम या पते की गलती होना।
- अधूरे या पुराने कागजात अपलोड करना।
- लोन लेने का कारण (जैसे वर्किंग कैपिटल या विस्तार) साफ न बताना।
- अधूरी या गलत बिजनेस प्रोजेक्ट रिपोर्ट देना।
- कमजोर या अव्यवहारिक बिजनेस मॉडल दिखाना।
- बिजनेस एक्टिव होने पर भी बैंक खातों में पर्याप्त लेनदेन न दिखना।
- खाते में लगातार न्यूनतम शेष राशि (Minimum Balance) या ईएमआई बाउंस होना।
- व्यवसाय का बहुत ज्यादा अनौपचारिक (Informal) तरीके से चलना।
- आय की तुलना में पहले से ही बहुत अधिक ईएमआई का बोझ होना।
- क्षमता से अधिक पुराना कर्ज लिया होना।
- ऋण चुकाने की क्षमता (Repayment Capacity) कम दिखना
DPR में गलती करने से होगा लोन रिजेक्ट
DPR यानी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट। यह ऐसा दस्तावेज है जिसमें कारोबार की पूरा रोडमैप दिया जाता है। इसमें प्रोजेक्ट की लागत, मशीनरी, कच्चा माल, बाजार, अनुमानित बिक्री, लाभ, कैश फ्लो, रोजगार, ब्रेक-ईवन और लोन चुकाने की योजना जैसी जानकारी शामिल होती है।
अधूरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट
कई आवेदक सिर्फ लागत और अनुमानित बिक्री लिखकर DPR तैयार कर देते हैं। बैंक पूरा वित्तीय अनुमान, मार्केट स्टडी और व्यवसाय की व्यवहार्यता देखना चाहते हैं। अधूरी DPR लोन रिजेक्शन का बड़ा कारण बन सकती है।
बिक्री और मुनाफे का अनुमान
यदि रिपोर्ट में पहले ही साल करोड़ों रुपये की बिक्री या असामान्य लाभ दिखाया गया है, लेकिन उसका कोई ठोस आधार नहीं है, तो बैंक उसे अविश्वसनीय मान सकता है। जैसे आपने अपने प्रोजेक्ट में लिखा है कि आप महीने में ₹10 लाख की बिक्री करेंगे लेकिन मार्केट और कस्टमर की जानकारी में असंतुलन है तो लोन रिजेक्ट हो सकता है।
बाजार और खरीदार की जानकारी नहीं देना
बिजनेस लोन अप्लाई करने वालों से बैंक जानना चाहते हैं कि प्रोडक्ट या सर्विस कौन खरीदेगा, आपका मार्केट कितना बड़ा है और कॉम्पटीशन कितना है। यह जानकारी न होने पर प्रोजेक्ट कमजोर माना जा सकता है। इसके अलावा आप मनमानी मार्केट और कस्टमर की जानकारी फिल नहीं कर सकते हैं।
लागत और मशीनरी के गलत कोटेशन
कई मामलों में मशीनरी की कीमत बढ़ाकर दिखाने या क्लियर कोटेशन न लगाने से भी बैंक संदेह कर सकते हैं। इससे फाइल रिजेक्ट होने का जोखिम बढ़ जाता है। कुछ लोग अधिक लोन पास करने के लिए अपने प्रोजेक्ट को बड़ा दिखाते हैं, लेकिन बैंक के रिव्यू में अक्सर वो गलत साबित होता है, ऐसी स्थिति में भी लोन रिजेक्ट हो सकता है।