(महेन्द्र नागौरी)
करोड़ों मतदाताओं के नाम हटाने की आशंका पर उठाए सवाल, ECINet और AI के इस्तेमाल पर मांगी पारदर्शिता
भीलवाड़ा|स्मार्ट हलचल|मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। जिला कांग्रेस कमेटी भीलवाड़ा (देहात) के अध्यक्ष रामलाल जाट ने मंगलवार को एक निजी रिसोर्ट में पत्रकार वार्ता कर चुनाव आयोग के हालिया प्रेस नोट पर सवालों की बौछार कर दी। जाट ने कहा कि आयोग का स्पष्टीकरण उठ रहे सवालों का ठोस जवाब देने के बजाय ‘डैमेज कंट्रोल की कोशिश’ नजर आता है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव जयराम रमेश ने भी 27 सितंबर को आयोग के कदमों को लेकर इसी तरह के सवाल उठाए थे और कहा था कि SIR से प्रभावित या हटाए जाने के जोखिम वाले मतदाताओं के लिए बताए गए कदम मूल चिंताओं का समाधान नहीं करते।
5.43 करोड़ मतदाताओं को लेकर सवाल
जाट ने कहा कि करीब 5.43 करोड़ मतदाताओं के नाम हटने के जोखिम की बात सामने आ रही है। आयोग अब ऐसे मतदाताओं के घर BLO भेजने की बात कर रहा है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि घर-घर जाकर सत्यापन SIR की शुरुआती प्रक्रिया में ही होना था।
जाट ने सवाल उठाया कि जब पहली बार की प्रक्रिया में ही कई स्तरों पर शिकायतें सामने आईं तो अब दोबारा घर-घर जाने की व्यवस्था कितनी प्रभावी होगी? कांग्रेस का दावा है कि कई क्षेत्रों में पहले चरण की घर-घर संपर्क प्रक्रिया सीमित और असमान रही।
हालिया रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस ने 5.43 करोड़ मतदाताओं को अतिरिक्त दस्तावेज देने की जरूरत वाले मतदाताओं के रूप में चिन्हित किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं।
‘पहले नाम हटाओ, फिर जुड़वाने के लिए दौड़ाओ’
जाट ने SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों को लेकर भी तीखी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यदि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से हट जाता है और उसे फिर से शामिल होने के लिए ERO के समक्ष आवेदन करना पड़ता है तो इससे आम नागरिक पर अतिरिक्त प्रक्रिया का बोझ पड़ता है।
कांग्रेस की ओर से दावा किया गया है कि SIR के विभिन्न चरणों में बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं और भविष्य में यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। हालांकि, इन आंकड़ों और उनके कारणों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद हैं। कांग्रेस ने करीब 14 करोड़ नाम हटाए जाने का दावा किया है।
जाट ने कहा कि “मतदाता का नाम सूची से हटना सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उसके मतदान के अधिकार से जुड़ा सवाल है।”
ECINet को लेकर भी घेरा
पत्रकार वार्ता में जाट ने चुनाव आयोग की डिजिटल व्यवस्था ECINet को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची तैयार करने में सॉफ्टवेयर की भूमिका, पात्र मतदाताओं के नाम हटने और ERO के अधिकारों को लेकर उठ रहे सवालों पर आयोग को स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
हाल में ECINet और Form-6 में बदलाव को लेकर भी विवाद सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार आयोग के भीतर ही इस संबंध में आपत्तियां उठी थीं और प्रक्रिया की वैधानिकता तथा नए मतदाताओं पर प्रभाव को लेकर सवाल किए गए।
जाट ने कहा कि “मतदाता सूची का अंतिम अधिकार किसका है—निर्वाचन अधिकारी का या सॉफ्टवेयर की प्रक्रिया का, यह स्पष्ट होना चाहिए।”
AI के इस्तेमाल पर पारदर्शिता की मांग
कांग्रेस ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर भी चुनाव आयोग से पारदर्शिता की मांग की। जाट ने कहा कि यदि किसी नागरिक के नाम को चिन्हित करने, नोटिस जारी करने या सत्यापन की प्रक्रिया में तकनीकी प्रणाली का इस्तेमाल हो रहा है तो उसके मानक और प्रक्रिया सार्वजनिक होनी चाहिए।
कांग्रेस ने दिल्ली में SIR से जुड़ी कुछ प्रक्रियाओं में ‘सिस्टम जनरेटेड’ नोटिस और पश्चिम बंगाल में AI के इस्तेमाल को लेकर सामने आए बयानों का हवाला देते हुए आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं, कांग्रेस ने जुलाई 2026 में संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदकों को आयोग की ओर से दिए गए उस जवाब का भी उल्लेख किया, जिसमें AI के इस्तेमाल से इनकार किया गया था।
जाट ने कहा कि “जब किसी तकनीकी सिस्टम का असर सीधे नागरिक के मताधिकार पर पड़ सकता है तो उसकी कार्यप्रणाली में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए।”
कैबिनेट सचिव को पत्र का मुद्दा भी उठाया
जाट ने कैबिनेट सचिव को लिखे गए पत्र को लेकर चुनाव आयोग की सफाई पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि इसे केवल किसी अधिकारी के कामकाज से जुड़ा मामला बताकर मूल प्रश्नों को खत्म नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस का आरोप है कि ECINet की कार्यप्रणाली और वैधानिक सुरक्षा प्रावधानों को लेकर जो चिंताएं उठाई गईं, उनका स्पष्ट समाधान अब भी सामने नहीं आया है।
‘वोटर लिस्ट लोकतंत्र की नींव’
जाट ने कहा कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को शामिल करना और अपात्र नामों को हटाना हो सकता है, लेकिन पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, सत्यापन योग्य और कानून के अनुरूप होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का सवाल किसी एक राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष का नहीं, बल्कि हर पात्र नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा का है। चुनाव आयोग को आंकड़ों और प्रक्रिया के आधार पर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
जाट ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को आगे भी उठाती रहेगी और मतदाता सूची, ECINet, SIR तथा AI के इस्तेमाल से जुड़े सवालों पर चुनाव आयोग से जवाब मांगेगी।