न्यूयॉर्क।स्मार्ट हलचल|संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित वार्षिक ‘हिंदी दिवस 2026’ कार्यक्रम में भारतीय सांसद सीपी जोशी के नेतृत्व में पहुंचे एक उच्च स्तरीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। वैश्विक मंच पर हिंदी भाषा के बढ़ते प्रभाव और वैश्विक पहचान को रेखांकित करने वाले इस विशेष समारोह में दुनिया भर के कई देशों के राजनयिकों ने भी अपनी भागीदारी दर्ज की।
न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने ‘एक्स’ पर लिखा सीपी जोशी के नेतृत्व में आए संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र में हर साल होने वाले ‘हिंदी दिवस 2026’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में अंडोरा, जमैका, फिजी, गुयाना, मालदीव, मॉरिशस, नेपाल, कतर, सूरीनाम और त्रिनिदाद और टोबैगो के स्थायी प्रतिनिधियों और राजनयिकों ने भी अपनी बात रखी।
बता दें कि भारत सरकार यूएन में हिंदी को आधिकारिक भाषाओं में शामिल कराने के लिए ‘हिंदी एट यूएन’ परियोजना चला रही है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य केवल दिवस मनाना नहीं, बल्कि कूटनीतिक रूप से मित्र देशों को एक मंच पर लाना था। यही वजह है कि इसमें भारत के कई मित्र एवं ग्लोबल साउथ के देशों के स्थायी प्रतिनिधियों को विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया था, जिन्होंने वैश्विक संवाद में हिंदी की भूमिका का समर्थन किया तथा वैश्विक स्तर पर हिंदी की प्रासंगिकता को लेकर अपनी बात रखी।
न्यूयॉर्क में कूटनीतिक सक्रियता के साथ ही जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र में भी भारत ने मानवाधिकारों पर अपना संकल्प दोहराया है। वहां संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) का एक महीने तक चला 63वां नियमित सत्र संपन्न हुआ है। परिषद के एक सक्रिय सदस्य के रूप में भारत ने बिना किसी भेदभाव या दोहरे रवैये के दुनिया के सभी नागरिकों के अधिकारों, गरिमा और सम्मान की रक्षा करने के अपने अटूट संकल्प को फिर से दोहराया। इसके साथ ही आतंकवाद से पीड़ित लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा के मोर्चे पर वैश्विक संस्थाओं की जवाबदेही तय करने की मांग भी की गई।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)