छुट्टियों की आड़ में शुरू हो गया ‘खेल’……….. नवरात्र के पावन पर्व पर प्राकृतिक नाले को पाटने में जुटे ‘नेताजी’

सवालों के घेरे में नगर परिषद की कार्यप्रणाली………..

विशेष रिपोर्ट-आकाश शर्मा
चित्तौड़गढ़ ।स्मार्ट हलचल|चित्तौड़गढ़ नगर परिषद में भाजपा का बोर्ड बनते ही शहर की बेशकीमती और सार्वजनिक जमीनों पर अवैध कब्जे का काला खेल जोर-शोर से शुरू हो गया है। शहर के व्यस्तम महाराणा प्रताप सेतू मार्ग दक्षिण से उत्तर की ओर, श्रीनाथ वाटिका के समीप से गुजरने वाले प्राकृतिक नाले और उसकी बहुमूल्य आसपास की जमीन अब भूमाफियाओं की सीधी नजर में आ चुकी है। सबसे चिंताजनक और शर्मनाक पहलू यह है कि ठीक कल से शारदीय नवरात्र जैसे पावन और बड़े धार्मिक पर्व का शुभारंभ होने जा रहा है, और इस बात की पूरी आशंका है कि भूमाफिया इस पवित्र त्योहार की आड़ और प्रशासनिक व्यस्तता का फायदा उठाकर किसी बड़े और अवैध खेल को अंजाम दे रहे हैं !
प्रशासन की ढिलाई,10 दिन बाद भी नहीं लगा बोर्ड
इस गंभीर अतिक्रमण की आहट मिलते ही जागरूक नागरिकों द्वारा आज से ठीक 10 दिन पूर्व नगर परिषद आयुक्त को लिखित और मौखिक रूप से पूरे मामले से अवगत करा दिया गया था । मामले की गंभीरता को भांपते हुए नगर परिषद के एक अधिकारी ने मौके पर जाकर वस्तुस्थिति का जायजा भी लिया था और आयुक्त को पूरी रिपोर्ट सौंपी थी । इसके बाद आयुक्त ने तत्काल प्रभाव से मौके पर नगर परिषद का स्वामित्व बोर्ड लगाने के स्पष्ट आदेश दिए थे। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि 10 दिन बीत जाने के बाद भी उस जमीन पर बोर्ड क्यों नहीं लगाया गया ? क्या नगर परिषद के उच्च अधिकारियों के आदेश केवल फाइलों तक सीमित हैं या फिर किसी रसूखदार ‘नेताजी’ के दबाव में प्रशासनिक आदेशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया ?
छुट्टियों का फायदा उठाकर ‘युद्ध स्तर’ पर अवैध भराव !
प्रशासन की इस ढुलमुल कार्यप्रणाली और कथित संरक्षण का पूरा फायदा उठाते हुए भूमाफियाओं ने दो दिन के शासकीय अवकाश (वीकेंड) का पूरा लाभ उठाया । शनिवार सुबह से ही बेखौफ होकर दर्जनों डंपर और जेसीबी मशीनें उतार दी गईं और नाले के बहाव क्षेत्र में युद्ध स्तर पर मिट्टी और मलबे का भराव कार्य शुरू कर दिया गया, जो समाचार लिखे जाने तक लगातार जारी था ।
आखिर कौन है वो ‘माननीय नेताजी’ जो चांदी कूटने में लगे हैं !
शहर के गलियारों में अब आम चर्चा यह है कि आखिर ऐसे कौन से ‘नेताजी’ हैं, जो नाले के पास बफर जोन में आने वाली इस कीमती जमीन पर डंपर के डंपर भरवाकर किसे उपकृत करने में लगे हैं या खुद की चांदी कूटने की जुगत में हैं? असली स्थिति तो सोमवार को नगर परिषद कार्यालय खुलने के बाद ही सामने आएगी, लेकिन तब तक जिस काम के लिए यह सब रचा जा रहा है, वह ‘माननीय नेताजी’ का खेल पूरा हो चुका होगा। इसके बाद क्या होगा? क्या प्रशासन अपनी जमीन बचाने का नाटक करेगा या फिर खानापूर्ति के लिए कोई छोटी-मोटी अतिक्रमण हटाने की औपचारिकता पूरी कर इस मामले को हमेशा के लिए ठंडे बस्ते में डाल देगा? और उसके बाद शुरू होगा इस बेशकीमती जमीन का असली मोल-भाव !
मास्टर प्लान, NGT और नियमों की उड़ रही धज्जियां !
यह पूरा अवैध कृत्य कानून के प्रावधानों को ठेंगा दिखा रहा है। मास्टर प्लान एवं नगरीय भवन उपनियमों के अनुसार, किसी भी मुख्य या प्राकृतिक नाले के बाहरी किनारे से 3 मीटर से 15 मीटर तक ( जल प्रवाह क्षमता के अनुसार ) का क्षेत्र पूरी तरह बफर जोन / सेटबैक होता है, जहाँ एक इंच भी स्थायी निर्माण गैर-कानूनी है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्राकृतिक जल स्रोतों और उनके कैचमेंट एरिया में छेड़छाड़ करने पर नगर निकाय द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के ध्वस्तीकरण और कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए । मास्टर प्लान 2001-2025 के तहत इन नालों और सुरक्षा कॉरिडोर को ‘ग्रीन बेल्ट’ के रूप में चिन्हित किया गया है ।
क्या प्रशासन की नींद नवरात्र के बाद टूटेगी या तब तक नाला पूरी तरह निगल लिया जाएगा !
शारदीय नवरात्र के पावन पर्व की शुरुआत से ठीक पहले इस प्रकार खुलेआम प्राकृतिक नाले का गला घोंटा जाना और भूमाफियाओं का यह दुसाहस प्रशासनिक और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। यदि समय रहते इस अवैध भराव को नहीं रोका गया, तो आने वाले दिनों में यह क्षेत्र गंभीर जलभराव का शिकार बनेगा और जनता का आक्रोश सड़कों पर फूटेगा ।