नवरात्रि में अष्टमी और नवमी का क्या महत्व है?नवरात्रि की पूजा में कौन-से मंत्र बोलें?


नवरात्रि के बारे में संपूर्ण जानकारी

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नवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख धार्मिक पर्व है। ‘नवरात्रि’ का अर्थ है नौ रातें। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। यह पर्व शक्ति, भक्ति, साहस, बुराई पर अच्छाई की विजय और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

भारत के अलग-अलग राज्यों में नवरात्रि को अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कहीं व्रत और पूजा की जाती है, कहीं गरबा और डांडिया होता है, तो कहीं दुर्गा पूजा के भव्य पंडाल सजाए जाते हैं।

1. नवरात्रि क्यों मनाई जाती है?

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नवरात्रि मनाने के पीछे प्रमुख धार्मिक मान्यताएँ हैं।

1. माँ दुर्गा और महिषासुर की कथा: धार्मिक मान्यता के अनुसार, महिषासुर नामक असुर ने देवताओं को परेशान कर दिया था। तब देवताओं की शक्तियों से माँ दुर्गा प्रकट हुईं। माँ दुर्गा और महिषासुर के बीच नौ दिनों तक युद्ध हुआ और दसवें दिन माँ ने महिषासुर का वध किया। इसी कारण नवरात्रि को शक्ति की विजय का पर्व माना जाता है।

2. भगवान राम और रावण की कथा: रामायण की परंपरा के अनुसार, भगवान राम ने रावण पर विजय प्राप्त करने से पहले देवी दुर्गा की आराधना की थी। विजयादशमी को राम की विजय के रूप में भी मनाया जाता है।

3. शक्ति की उपासना: माँ दुर्गा को शक्ति, साहस, रक्षा, करुणा और धर्म की प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि में भक्त अपने जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हैं।

2. नवरात्रि कितने प्रकार की होती है?

हिंदू परंपरा में वर्ष भर में चार नवरात्रियों का विशेष उल्लेख मिलता है।

नवरात्रिसमयविशेषता
चैत्र नवरात्रिचैत्र मास, मार्च–अप्रैलहिंदू नववर्ष का आरंभ; रामनवमी प्रमुख
शारदीय नवरात्रिआश्विन मास, सितंबर–अक्टूबरसबसे व्यापक रूप से मनाई जाने वाली नवरात्रि; दशहरा इसका समापन पर्व
माघ गुप्त नवरात्रिमाघ मास, जनवरी–फरवरीविशेष साधना और शक्ति उपासना
आषाढ़ गुप्त नवरात्रिआषाढ़ मास, जून–जुलाईसाधना, मंत्र-जप और देवी उपासना की परंपरा

तिथियाँ चंद्र पंचांग के अनुसार निर्धारित होती हैं, इसलिए अंग्रेज़ी कैलेंडर में हर वर्ष बदलती हैं। गुप्त नवरात्रि विशेष साधकों में अधिक प्रचलित हैं।

3. माँ दुर्गा के नौ स्वरूप और उनका महत्व

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नवरात्रि के प्रत्येक दिन माँ दुर्गा के एक विशेष स्वरूप की पूजा की जाती है। इन्हें नवदुर्गा कहा जाता है।

दिनदेवी का नामप्रमुख महत्व
पहलामाँ शैलपुत्रीशक्ति, स्थिरता और दृढ़ संकल्प
दूसरामाँ ब्रह्मचारिणीतपस्या, ज्ञान और संयम
तीसरामाँ चंद्रघंटासाहस, वीरता और रक्षा
चौथामाँ कूष्मांडासृजन, ऊर्जा और उत्साह
पाँचवाँमाँ स्कंदमाताममता, प्रेम और संतान की मंगलकामना
छठामाँ कात्यायनीशक्ति, साहस और धर्म की रक्षा
सातवाँमाँ कालरात्रिभय और नकारात्मकता से मुक्ति की प्रतीक
आठवाँमाँ महागौरीपवित्रता, शांति और करुणा
नौवाँमाँ सिद्धिदात्रीज्ञान, सिद्धि और आध्यात्मिक पूर्णता

प्रत्येक देवी के स्वरूप, वाहन और पूजा से जुड़ी कथाएँ हैं। भक्त अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार उनकी पूजा करते हैं।

4. नवरात्रि 2026 में कब है?

इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर 2026 तक मनाई जा रही है। विजयादशमी अर्थात दशहरा 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को है।

तारीखपूजा का दिन
11 अक्टूबरप्रथम दिन — माँ शैलपुत्री
12 अक्टूबरदूसरा दिन — माँ ब्रह्मचारिणी
13 अक्टूबरतीसरा दिन — माँ चंद्रघंटा
14 अक्टूबरचौथा दिन — माँ कूष्मांडा
15 अक्टूबरपाँचवाँ दिन — माँ स्कंदमाता
16 अक्टूबरछठा दिन — माँ कात्यायनी
17 अक्टूबरसातवाँ दिन — माँ कालरात्रि
18 अक्टूबरआठवाँ दिन — माँ महागौरी
19 अक्टूबरनौवाँ दिन — माँ सिद्धिदात्री
20 अक्टूबरविजयादशमी / दशहरा

ध्यान दें: तिथियों और पूजा के स्थानीय मुहूर्त में स्थान तथा पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है।

5. नवरात्रि में कलश स्थापना कैसे करें?

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कलश स्थापना को घटस्थापना भी कहा जाता है। यह नवरात्रि की पूजा आरंभ करने की प्रमुख परंपरा है।

आवश्यक पूजा सामग्री

  • कलश या तांबे का लोटा

  • स्वच्छ जल, आम के पत्ते और नारियल

  • मिट्टी और जौ के बीज

  • लाल या पीला कपड़ा

  • माँ दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति

  • रोली, कुमकुम, अक्षत और हल्दी

  • फूल, माला और लाल चुनरी

  • दीपक, घी या तेल, रुई की बत्ती और धूप

  • फल, मिठाई और प्रसाद

कलश स्थापना की सामान्य विधि

  1. सुबह स्नान करके पूजा स्थान को साफ करें और चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएँ।

  2. एक पात्र में मिट्टी भरकर जौ बोएँ और उचित स्थान पर रखें।

  3. कलश में स्वच्छ जल भरें। अपनी परंपरा के अनुसार उसमें सुपारी, अक्षत आदि डालें और ऊपर आम के पत्ते तथा नारियल रखें।

  4. कलश को जौ के पात्र के पास स्थापित करें। माँ दुर्गा का चित्र या मूर्ति रखें।

  5. गणेश जी का स्मरण करके माँ दुर्गा का आवाहन करें।

  6. रोली, अक्षत, फूल, दीपक और प्रसाद अर्पित करें।

  7. दुर्गा मंत्र का जाप करें, कथा पढ़ें और आरती करें।

यह सामान्य घरेलू विधि है; परिवार और क्षेत्र के अनुसार विधि अलग हो सकती है। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त स्थानीय पंचांग से देखना उचित है। अखंड ज्योत जलाएँ तो उसे सुरक्षित स्थान पर रखें और बिना निगरानी के न छोड़ें।

6. नवरात्रि की पूजा में कौन-से मंत्र बोलें?

माँ दुर्गा की आराधना के लिए निम्न मंत्रों का जाप किया जा सकता है।

माँ दुर्गा का सामान्य मंत्र

ॐ दुं दुर्गायै नमः॥

माँ दुर्गा का प्रसिद्ध शक्ति मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥

नौ देवियों के सरल मंत्र

देवीमंत्र
माँ शैलपुत्रीॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
माँ ब्रह्मचारिणीॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
माँ चंद्रघंटाॐ देवी चंद्रघण्टायै नमः॥
माँ कूष्मांडाॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
माँ स्कंदमाताॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥
माँ कात्यायनीॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
माँ कालरात्रिॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
माँ महागौरीॐ देवी महागौर्यै नमः॥
माँ सिद्धिदात्रीॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥

मंत्रों की सही उच्चारण-पद्धति सीखकर श्रद्धापूर्वक जाप करना अच्छा माना जाता है। आप चाहें तो केवल “जय माता दी” का स्मरण करते हुए भी पूजा कर सकते हैं।

7. नवरात्रि में व्रत कैसे रखें?

नवरात्रि में बहुत से श्रद्धालु नौ दिनों का व्रत रखते हैं। कुछ लोग पूरे नौ दिन उपवास करते हैं, जबकि कुछ पहले और अंतिम दिन या अष्टमी-नवमी को व्रत रखते हैं।

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व्रत में क्या खा सकते हैं?

व्रत की अपनी प्रचलित परंपरा के अनुसार लोग आम तौर पर इन खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं:

  • फल, दूध, दही और छाछ

  • साबूदाना और मखाना

  • कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की रोटी अथवा पूरी

  • आलू, शकरकंद और मूँगफली

  • सेंधा नमक से बने व्रत के व्यंजन

  • सूखे मेवे और पर्याप्त पानी

व्रत में किन चीजों से परहेज किया जाता है?

बहुत-सी परंपराओं में सामान्य अनाज, दालें, प्याज, लहसुन तथा साधारण नमक से परहेज किया जाता है। नियम परिवार और क्षेत्र के अनुसार बदल सकते हैं।

स्वास्थ्य का ध्यान रखें: व्रत में पर्याप्त पानी और पौष्टिक भोजन लेना महत्वपूर्ण है। गर्भावस्था, मधुमेह या किसी अन्य बीमारी की स्थिति में कठोर उपवास रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लें।

8. नवरात्रि में अष्टमी और नवमी का क्या महत्व है?

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महाष्टमी: नवरात्रि का आठवाँ दिन माँ महागौरी की पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। कई घरों में इस दिन कन्या पूजन, दुर्गा पूजा और हवन किया जाता है।

महानवमी: नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। अनेक परिवार इस दिन कन्या पूजन और हवन करके व्रत का समापन करते हैं।

कन्या पूजन कैसे किया जाता है?

  1. कन्याओं को आदरपूर्वक घर बुलाया जाता है।

  2. उनके पैर धोने की परंपरा हो तो श्रद्धापूर्वक उनका सम्मान किया जाता है।

  3. तिलक लगाकर भोजन या हलवा, पूरी और चने जैसे प्रसाद दिए जाते हैं।

  4. परिवार की परंपरा के अनुसार दक्षिणा या उपहार देकर आशीर्वाद लिया जाता है।

कई स्थानों पर एक बालक को भैरव के प्रतीक के रूप में भी भोजन कराया जाता है। कन्या पूजन की विधि और संख्या अलग-अलग परंपराओं में भिन्न हो सकती है।

9. नवरात्रि में नौ दिनों के भोग

लोकप्रिय परंपराओं में अलग-अलग दिनों पर अलग-अलग भोग चढ़ाने की प्रथा है। उदाहरण के लिए:

दिनदेवीप्रचलित भोग
पहलामाँ शैलपुत्रीघी
दूसरामाँ ब्रह्मचारिणीचीनी या मिश्री
तीसरामाँ चंद्रघंटादूध से बनी मिठाई
चौथामाँ कूष्मांडामालपुआ
पाँचवाँमाँ स्कंदमाताकेला
छठामाँ कात्यायनीशहद
सातवाँमाँ कालरात्रिगुड़
आठवाँमाँ महागौरीनारियल
नौवाँमाँ सिद्धिदात्रीतिल

ये भोग पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं, अनिवार्य नियम नहीं। उपलब्ध सामग्री के अनुसार फल, मिठाई या घर में बना सात्विक प्रसाद भी अर्पित किया जा सकता है।

10. नवरात्रि में कौन-से रंग पहने जाते हैं?

कई लोग हर दिन देवी के स्वरूप के अनुसार अलग रंग के कपड़े पहनते हैं। 2026 की एक प्रचलित रंग-सूची इस प्रकार है:

दिनरंग
पहलानारंगी
दूसरासफेद
तीसरालाल
चौथाशाही नीला
पाँचवाँपीला
छठाहरा
सातवाँस्लेटी
आठवाँबैंगनी
नौवाँमोरपंखी हरा

रंगों का क्रम अलग-अलग क्षेत्रीय कैलेंडर और परंपराओं में बदल सकता है। किसी विशेष रंग के कपड़े पहनना अनिवार्य नहीं है।

11. भारत में नवरात्रि कैसे मनाई जाती है?

Your Guide To Celebrating Navratri In Gujarat | Outlook Traveller

गुजरात

गरबा और डांडिया नृत्य, रंगीन पारंपरिक परिधान तथा सामूहिक देवी आराधना इस पर्व की प्रमुख विशेषताएँ हैं।

BengalInfo - Durga Puja Photo

पश्चिम बंगाल

दुर्गा पूजा के भव्य पंडाल, देवी की प्रतिमाएँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विजयादशमी पर विसर्जन विशेष आकर्षण हैं।

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उत्तर भारत

दुर्गा पूजा, रामलीला, भजन-कीर्तन और दशहरे पर रावण दहन की परंपरा लोकप्रिय है।

Navaratri Bommai Kolu or Navaratri Golu 2023

दक्षिण भारत

कई क्षेत्रों में गोलू या बोम्मई कोलु के नाम से गुड़ियों की सजावटी सीढ़ियाँ बनाई जाती हैं तथा देवी की उपासना और सांस्कृतिक आयोजन होते हैं।

12. नवरात्रि का आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व

नवरात्रि केवल पूजा और व्रत का पर्व नहीं है। यह हमें अपने जीवन में अच्छे विचारों और व्यवहार को अपनाने की प्रेरणा भी देता है।

  • साहस: कठिनाइयों का सामना करने का संकल्प।

  • संयम: अपनी आदतों और इच्छाओं पर नियंत्रण।

  • करुणा: जरूरतमंद लोगों की सहायता और सभी के प्रति सम्मान।

  • शुद्धता: स्वच्छता, सात्विक भोजन और अच्छे आचरण को महत्व देना।

  • एकता: परिवार और समाज के साथ मिलकर पर्व मनाना।

  • नारी शक्ति का सम्मान: महिलाओं की गरिमा, अधिकार और योगदान का आदर करना।

13. नवरात्रि में क्या करना चाहिए और क्या नहीं?

करने योग्य बातें: पूजा स्थान की स्वच्छता रखें, श्रद्धापूर्वक मंत्र-जाप करें, अपनी सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखें, जरूरतमंदों की मदद करें तथा परिवार की परंपराओं का पालन करें।

ध्यान रखने योग्य बातें: दूसरों की धार्मिक मान्यताओं का अपमान न करें, व्रत के कारण अपने स्वास्थ्य को नुकसान न पहुँचाएँ और दीपक या अखंड ज्योत जलाते समय अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखें। व्रत न रख पाने पर भी श्रद्धा से पूजा करना संभव है।

नवरात्रि का सार

माँ दुर्गा की आराधना हमें शक्ति, ज्ञान, करुणा और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देती है। नवरात्रि का वास्तविक भाव केवल अनुष्ठानों में नहीं, बल्कि अपने आचरण में अच्छे गुण अपनाने और दूसरों के प्रति सम्मान रखने में भी है।