राजनीतिक शिष्टाचार,’असमंजस का आसन’ और मौन तेवर……….

विशेष रिपोर्ट-आकाश शर्मा
चित्तौड़गढ़ ।स्मार्ट हलचल|राजनीति में भाषा से अधिक शक्तिशाली ‘बॉडी लैंग्वेज’ देह-भाषा होती है। हाल ही में चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह आक्या के पूज्य पिताजी स्व. रामसिंह चौहान के निधन पर संवेदना व्यक्त करने पहुंचे राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आक्या गाँव आगमन केवल एक शोक-मुलाकात तक सीमित नहीं रहा । हेलीपैड पर कैमरे के लेंस में कैद हुईं कुछ तस्वीरों ने सत्ता के समीकरणों, झिझक और अभिवादन की कला पर कई व्यंग्यात्मक प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं ।
शिष्टाचार का ‘सरल नमन’
तस्वीरों में पूर्व यूडीएच मंत्री व निम्बाहेड़ा विधायक श्रीचंद कृपलानी मुख्यमंत्री के ठीक सामने सीधे खड़े होकर आदरपूर्वक दोनों हाथ जोड़कर मुस्कुराते/गंभीरता से अभिवादन करते दिखाई दे रहे हैं। यह सत्ता और अनुभव का सहज शिष्टाचार है, जहाँ न कोई झिझक है और न ही कोई अतिरिक्त तनाव। यह दो वरिष्ठ नेताओं के बीच सीधे संवाद और प्रोटोकॉल का सटीक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
‘प्रणामासन’ या ‘असमंजस की मुद्रा’ !
तस्वीरों के केंद्र में खड़े राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सहकारिता गौतम कुमार दक का दृश्य सबसे अधिक ध्यान खींचता है। दोनों हाथ जुड़े हुए हैं, शरीर हल्का सा आगे झुका हुआ है और नजरें नीचे की ओर हैं। दूर से देखने पर यह मुद्रा ऐसी प्रतीत होती है मानो वे समझ नहीं पा रहे हों कि वे मुख्यमंत्री से सीधे आँखें मिलाकर बात करें या एक कदम पीछे हटकर केवल अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं । साहित्यिक शब्दावली में कहें तो इसे ‘राजनीतिक योगासन’ या ‘संकोच का ताड़ासन’ कहा जा सकता है जहाँ एक मंत्री जी का मन तो कह रहा है कि वे मुखिया के करीब जाएँ, लेकिन परिस्थितियां और तेवर उन्हें वहीं थमकर सूक्ष्म एकाग्रता (योग) में जाने पर मजबूर कर रही हैं !
जमीन की ओर इशारा या कोई नई योग-विधि !
तीसरी तस्वीर इस नाटकीय दृश्य में एक नया मोड़ लाती है। इसमें पीछे खड़े एक अन्य साथी नेता नीचे झुककर हाथ से जमीन/हेलीपैड की ओर इशारा करते दिखाई दे रहे हैं । इस दृश्य को देखकर सहज ही व्यंग्य उभरता है कि क्या हेलीपैड पर केवल मुख्यमंत्री का स्वागत हो रहा था या फिर नेताओं के बीच कोई ‘योगासन शिविर’ चल रहा था जहाँ एक नेता दूसरे को बता रहा है मंत्री जी, झुकना इतना है और ध्यान जमीन के स्पर्श पर लगाना है ! यह दृश्य यह भी दर्शाता है कि जब सत्ता का शीर्ष सामने हो, तो आसपास खड़े नेताओं का ध्यान अभिवादन से ज्यादा अपनी स्थिति और अनुशासन को बनाए रखने में लगा रहता है।
क्या यह मुख्यमंत्री की स्पष्ट नाराजगी है !
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का रुख और कृपलानी जी की ओर केंद्रित संवाद यह संकेत देता है कि आक्या गाँव की इस जमीन पर राजनीतिक दूरियाँ भले ही शोक की घड़ी में मिटती दिख रही हों, लेकिन सरकार के भीतर के कड़वे-मीठे समीकरण पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। जब मुखिया किसी एक नेता की ओर आत्मीयता से हाथ जोड़ता है और बगल में खड़े मंत्री जी के चेहरे पर केवल अनिश्चितता की रेखाएं होती हैं, तो कयास यही लगाए जाते हैं कि यह केवल एक साधारण तस्वीर नहीं, बल्कि “अदृश्य नाराजगी और प्रशासनिक अनुशासन” की स्पष्ट झलक है। आक्या गाँव के हेलीपैड पर खिंची ये तस्वीरें साबित करती हैं कि भारतीय राजनीति में केवल शब्द ही बयान नहीं देते, बल्कि झुकी हुई गर्दन, जुड़े हुए हाथ और नीचे देखती आँखें भी पूरी कहानी बयाँ कर देती हैं। अब यह देखने वाले पर निर्भर करता है कि वह इसे सहकारिता मंत्री की अति-विनम्रता समझे, कोई ‘योगासन क्रिया’ या फिर प्रदेश के मुखिया का वह मौन तेवर जो बिना बोले ही सत्ता की हनक समझा देता है !